किसीने बहुत खूब कहा है,
           “  क्या जिंदगी है ओ जिसमे लन्ड खड़ा न हो
             कैसी मर्दानगी उसकी जिसके हाथो चूचा बड़ा न हो
      चूत का छेद और हाल कैसे हो मेरे हवसी नाथ
      चोद दे ना उस चूत रानी को चाहे उसका पति खड़ा हो न हो”
नमस्ते दोस्तो मेरा नाम मि.सेक्सी वेबी.कुछ लेके आया हु नया नही है पर रोमांचक भरा जरूर है,अच्छा लगे तो भी कमेंट करना और बुरा लगे तो भी,क्योकि मार्गदर्शन बहुत कुछ सीखा देता है लेखक को,उसके लिए भाषा मायने नही रखती,जड़ बकचोदी न करते हुए.स्टोरी का पहला सीजन पेश करने जा रहा हु.आपके साथ कि आशा है,धन्यवाद!!!

आजकल की जिंदगी तेज रफ्तार सी हो गयी है.हर एक को अपने सपने पूरे करने में बहोत कठिन से कठिन चुनोतीओंका सामना करना पड़ता है।अइसे ही दिल मे अरमान और मन मे बहोत सपने लिए एक साधारण से गांव में पला बड़ा लड़का अपने सपनो को साकार करने शहर आ पहुंचा,सपनो का शहर मुंबई।
नाम है जय।उम्र करीब 21 साल।अच्छा खासा तगड़ा जवान।गरीब किसान के परिवार में पैदा हुआ एक अनमोल रत्न,जिसमे जन्म से हो या कर्म से संगीत गायकी और हार्मोनियम वादन की अलग सी कला अवगत थी,गांव में उसके इस रत्न का पारखी नही था।
     गर्मियों का वक्त था,उसका चाचा छुटियो में गांव आया हुआ था।उसकी इस तम्मना को जानते हुए और भाई की परिस्थिति को समझते हुए उसने जय को मुम्बई लेकर जाने का प्रस्ताव रखा।पहले तो जय के माता पिता ने न नकुर कि पर बाद में मान गये।
कुछ दिन रहने के बाद चाचा जय को लेकर मुम्बई आ गया।जय के लिए शहर वाली जिंदगी नई थी।उसका चाचा एक चॉल में रहता है,उसकी एक 40 साल की बीवी और 5 साल की बेटी है।
चाचा जब जय को घर लेकर आता है तो चाची उसका खूब अच्छे तरह से स्वागत करती है ।चाचा चाची को पूरे परिस्थिति का ज्ञान करा देता है।हालांकि चाचा का रूम बहोत छोटा था पर 4 लोग तो सहजता से रह सकते थे।चाचा ने जय को कुछ दिन रुकने को बोला जबतक उसे कोई काम न ढूंढ ले।दिन अइसे ही जाने लगे।रोज सुबह जल्दी उठना चाची को घर के कामो में मदत करना उसकी दिनचर्या बन चुकी थी।जय की चाची भी घर के काम करने जाती थी तो जय घर पे अकेला हारमोनियम बजाते बैठता था।
एकदिन जब ओ अयसेही घर में बैठा था तो चाल में रहने वाली उसके चाची की दोस्त घर पे आ गयी।चाल का माहौल आम तौर पर क्या रहता है ओ तो सभी अच्छे तरह से जानते है ।जय घर में बनियान और शॉर्ट में बैठा tv देख रहा था,जब चाची की दोस्त अंदर आई तो ओ हड़बड़ा कर खड़ा हुआ।
पहले तो ओ एक दूसरे को ताकते ही रह गए,पर कुछ पल गुजरने के बाद चाची की दोस्त बोली “बेटा निर्मला किधर है”
जय:ओ चाची काम पर गयी है,वैसे आप कौन है?
चाची की दोस्त:निर्मला को बोलना शालू आई थी।
जय :ठीक है।
शालू:वैसे तुम कौन हो,कभी देखा नही?
जय:मैं विकास चाचा का गांव का भतीजा हु,काम के खोज में यह आया हु अभी कूछ दिनों पहले।
शालू:गांव का?अरे तो तुम विजय के लड़के हो,सुमित्रा कैसी है?
जय पहले तो शालू के मुह में मा बाप का नाम सुन चौक गया 
उसने हड़बड़ाते हुए कहा:है ठीक सब सब लोग मजे में
शालू:तू तो बहुत बड़ा हो गया रे,(जय को ताड़ते हुए)बचपन में तो मेरे सामने नंगा घूमता था।
जय थोड़ा शर्मा जाता है।
शालू:ठीक है मैं शाम को अति हु।
शालू के जाते हुए ताड़ते हुए जय सोचविचार में पैड जाता है की ये है कोन?मेरे परिवार के बारे में जानती कैसे है?

शाम 6 बजे जब उसकी चाची निर्मला घर आ जाती है तो ओ सब कुछ जो घटा ओ बया कर देता है।चाची थोड़ा सोचके इस बात को टालने की कोशिश करती है,और उसे बाहर घूमके आने को बोलती है।जय को ये बात थोड़ी खटक जाती है।पर दिनभर घर पे बैठ ओ भी थक चुका था तो ओ भी बाहर घूमने चला जाता है।
इधर उधर टहलकर जय जब घर आता है तो घर के बाहर से उसे अंदर किसी के होने की आवाज सुनाई देती है।अध खुली खिड़की से ओ अंदर देखती है तो,उसे अंदर वही दोपहर वाली शालू चाची दिखाई देती है।उनके बीच कोई बात चल रही थी।जय ओ सुनने की कोशिश करता है।
शालू:तूने बताया नही,विजय का लड़का आया है।
निर्मला:अरे अभी आया है,बताने ही वाली थी।
शालू:अच्छा,तुम मुझे बताने वाली थी(अजीब सी मुस्कान)
निर्मला:देख शालू जेठ जी और तुम्हारे बीच जो था,ओ कब का खत्म हो चुका है,तुम लोगो की प्रेम कहानी को 23 साल पहले ही हो गयी।तुम्हारे सरफिरे स्वभाव को जानकर ही ओ गांव में जाके शादी किया
शालू:मैंने क्या किया,ओ मुझसे भी शादी कर सकता था।
निर्मला:तुम दोनो में क्या गहमागहमी हुई मालूम नही पर इसका मतलब तुम अभी जय पे डोरे न डाल।बचपन में उसके तूने जो तमाशा किया तब जय बहोत छोटा था अभी ओ जवान है।तेरे इस स्वभाव के वजह से न जेठ जी यहां आते है न किसीको भेजते है।बड़ी मुश्किल से जय को भेजा है।
शालू:तूने ही विकास को बोला न उसको लाने को?
शालू के अचानक बोलने से निर्मला हड़बड़ा गयी।
शालू:सच बोल क्या प्लान है तुम लोगो का?
निर्मला:तुम तो जानती हो,बेटी को पैदा करने में ही कितना समय लग गया,अभी उन्हें बेटाभी चाहिए पर उम्र के हिसाब से उनसे ओ हो नही पा रहा।इसलिए हैम दोनो ने मिल कर सोच समज कर ये कदम उठाया है।
शालू:यानी विकास भी इसमे शामिल है।
निर्मला:हा,ये पूरा प्लान ही उनका है,मैने सिर्फ हा कहा है,जिससे मैं मा भी बन जाउंगी और जय जेठ जी का एकलौता लड़का है तो जो संपत्ति है ओ भी हमारे पास आ जाएगी।
शालू:इस प्लान में मैं भी शामिल होना चाहती हु।मुझे भी अपने अधूरे अरमान पूरे करने है।जो बाप से न हुआ ओ मैं बेटे से करवाउंगी
निर्मला:पर थोड़ा धीरज रख तेरे यही सरफिरे स्वभाव के वजह से बाप छूट गया अब बेटे से हाथ धो बैठोगी,तू जो भी करेगी कर पर इनको उसका पता न चल पाए
शालू:ठीक है,पर कुछ भी बोल विजय का लड़का उससे भी दमदार लगता है।
निर्मला:देख ओ मुझे भी बहुत पसंद आया है,पर जैसे उसका हमे फायदा है वैसे ओ जिसके लिए आया है ओ सपना भी उसका पूरा करना पड़ेगा याफिर करने का दिखावा करना पड़ेगा,क्योकि ओ बहोत होशियार है,गरीबी होते हुए भी उसने अपनी कला को निखारते हुए पढ़ाई पूरी की है,ध्यान नही रखा तो पंछी उड़ जाएगा।
दोनो भी हँसने लगे।
जय को ये सब सुन के थोड़ा अजीब से तो फील हुआ पर उसने भी वैसे रिएक्ट न होते हुए जैसे हूँ रहा है वैसे जाने देने का फैसला किया क्योकि सवाल परिवार का था,माता पिता के भावना ओ का था।बस उसे अभ चौकन्ना रह के नहले पे दहला देना था।

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.कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

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