मैं हमेशा की तरह सुबह आफिस चला गया।आज शनिवार था।दूसरे दिन संडे होने के कारण काम ज्यादा रहता था।शाम को जब काम खत्म हुआ,तो मुझे मेरे भाई का msg दिखा
“मैं 5 दिन के लिए आउट ऑफ मुम्बई हु,ध्यान रखना,bye”
कल संडे था,मैं अकेला क्या करूँगा इस छूटी में।भाईथा तब घूमते थे।इस बार का प्लान बनाने ही वाला था उसके पहले ही श्यामजी शाह का msg
“कल छुटी है तो कुछ प्लान नही होगा तो आज शाम आ जाना”
उसके msg के साथ लोकेशन भी था।
मैंने सोचा ये अचानक नियोता।थोड़ी अजीब सा महसूस हुआ।उसदिन की चैट बाद में पहले दिन वाला ओ सीन मुझे याद आ गया।पर फिर भी मैन मन से समजोता किया”तू कुछ भी मत सोच,अच्छे लोग है,दोस्ती बढ़ाने के लिए किया प्रयास होगा उनका”
मुझे वैसे भी कुछ काम नही था।तो मैं अपनी बैग ऑफिस में रख कर मैं उस लोकेशन पे पहोंच गया।लोकेशन मुम्बई का उच्च दर्जे वाले लोगो की रहनी वाली जगह थी।ओ एक अपार्टमेंट्स की लाइन थी जिसके लास्टके बिल्डिंग के टॉप के फ्लोर पे जाना था।मैं लिफ्ट से ऊपर गया।वहाँपर एक फ्लोर मतलब एक घर था,मतलब पूरा फ्लोर उनका था।
मैंने बेल बजाई।2 मिनटके बाद दरवाजा खुला,30 साल की एक औरतने दरवाजा खोला
ओ:कोन?
मैं:ओ श्यामजी सर ने बुलाया था।
ओ:क्या नाम है आपका?
मैं:विजय 
ओ:अच्छा तो आप हो
तभी अंदर से आवाज आई
“कौन है सीमा”
ओ मतलब सिमा:वो आपके विजय जी आये है मेमसाब
और ओ मेरे तरफ नशीली नजर डालके ओंठो में हसके अंदर चली गयी।
अच्छा तो ये नौकरानी थी।मैने दरवाजा बन्द करके।घर देखने लगा।
बड़ा हॉल,एक साइडमें किचन और मन्दिर 
दूसरे साइड में दो बेडरूम और सामने एक बेडरूम
घर तो शानदार था।
उधर कुछ फैमिली फोटो थी caption के साथ
फोटो के हिसाब से इनका एक ही बेटा था ओ भी शादी शुदा,आंटी की माँ और एक और लेडी थी पर उसका कोई रिश्ता उधर नही लिखा था।
तभी अंकल बाहर आ गए
“अरे विजय कब आये”
अंकल सिर्फ टॉवल में थे,पर सिर गिला नही था।
मतलब नहा के तो नही आये थे।और बर्ताव से ओ नहाने जा रहे है अयसे भी नही लग रहा था।ओ बात मुझे खटकी।
और उस खटकी बात को साबित करने के लिए।आंटी भी नाइटी में बाहर आ गयी।40 साल की भरे हुए दमदार शरीर वाली औरत ,क्या खूब दिख रही थी।
उन दोनो को इस हालत में देख मैं बात को समझ गया,पर मुझसे यहां उनका क्या काम अगर दोनो इतने बिजी है तो।
श्यामजी:अरे विजय थैंक्स,तुम आ गए,मुझे लगा तुम नही आओगे।
मै:बस क्या सर,आपने बुलाया है तो आना ही पड़ा,पर अइसे अचानक?!?!
विणा चाची:अरे बाते होते रहेंगी।तुम बैठो,अरे सिमा चाय लाओ।
हम सब सोफे पे बैठ जाते है।सिंगल सोफे पे चाचा बैठ जाते है और बड़े सोफे पे मैं और विणा चाची।विणा मेरे से थोड़ा सटके के बैठी थी।उनकी उम्र और सर का ख्याल करके मैं थोड़ा खुदको संभाल रहा था।
मैं:बोलो न सर,कोई जरूरी काम बंदे से
श्यामजी थोड़े झिझक रहे थे,पेपर विणा उनको आंखों ही आंखों में जोर देके बात करने को उकसा रही थी।
उतने में सिमा चाय लेके आई।
सिमा:मेमसाब और कुछ काम
विणा:कुछ नही तुम जाओ।कल 11 बजे तक आ जाना।
सीमा के जाने के बाद
श्यामजी:देख विजय,तुम मेरे बड़े भरोसे वाले आदमी हो,और तुम हम लोगो से भी बहुत कुछ वाकिफ हो।और बात यू है की,अभी हमारे बीच मतलब मैं और विणा के बीच थोड़े तनाव पूर्ण स्तिथि चल रही है।
मैं:मतलब
श्यामजी:तुम मेरी हालत तो देख ही रहे हो,इस समय शारीरिक संबंध रखना मुझे नही होगा तेरे मैडम के साथ,तो क्या तुम हमारी मदत करोगे?
मैं:पर सर ये मुमकिन है सही में
विणा:क्यो नही,इस घर में हम दोनो के सिवाय कोई नही है,और तुम अभी पराये भी नही हो,प्लीज इतनी हेल्प कर दो।
में सोचूंगा उसके पहले ही चाची ने मेरे जांग पे हाथ रख सहलाने लगी।एक नाइटी में खुशबू वाला स्प्रे मार्के 40 से45 उम्र की रसीली औरत जांग सहला रही हो तो लन्ड तो तनेगा।जैसे ही मेरा तना हुआ लन्ड विणा ने देखा।
विणा:देख विजय तेरा 5 इंच का लन्ड भी तैयार हो गया अभी तू भी चढ़ जा
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही उसने मुझको धक्का देके सोफे पर टिकाया
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कहानी जारी रहेगी………..……

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