विणा जी के आंखों में ओ नशा ओ चुदने की हवस साफ साफ दिखाई दे रही थी।मैं भी जान चुका था की उनको साथ देना ही होगा क्योकि वैसे भी कोई रास्ता नही था जिस तरह ओ सिचुएशन बनि थी।
विणा मेरी पैंट का झिप खोला और लन्ड को आझाद कर दिया।मेरा लन्ड सिर्फ उत्तेजित था,पर जब उन्होंने हाथ लगाया उस वक्त तन के खड़ा होने लगा।
उन्होंने अपनी नाइटी निकाल दी।अंदर से ओ पूरी नंगी थी।झूलते हुए चुचे करिब 34b,पूरा सफेद गोर रंग की मल्लिका होने के कारण गोरे चुचो के ऊपर की लाल निप्पल्स लुंड को और तकलीफ दे रही थी।गोल नाभि जिसको देख कर किसीका का भी दिल उसपे झड़ने का हो जाए।और छूट तो कयामत,काले सफेद झांटो के बीच में रस से बहती चूतऔर गुलाबी रंग से सजे चूतके होंठ ,क्या हवसिंन नज़ारा था।
उसने मेरे लंड को देख ओंठ पर जीभ घुमाई और श्यामजी के पास देखा।
श्यामजी टॉवेल खोल के लंड हिला रहा था।उसका लन्ड सच में थक चुका था।अइसे रसीली चूतरानी को देख कर भी उसके लन्ड में उभार नही था।
श्यामजी:क्यों विणा फ़ोटो से ज्यादा तो रियल में इसका लन्ड बहोत बड़ा और दमदार है।
विणा:हा ना जी,कब इसका लन्ड चूत में ले रही हु अइसा हो रहा है।
विणा जी मेरे लन्ड को सुपडे से नीचे तक सहला रही थी।बीच बीच में गाल पर किस कर रही थी।
मैं:मैडम आज तक कितने लोगो का लिया है।
दोनो एक दूसरे को देखने लगे ,और जोर से हस पड़े।
विणा:तू दूसरा है मेरे लिए,पहले तेरे सर,आगे का मालूम नही।
अभी विणा जी का हाथ उनके चूत पर था अजर ओ पीछे खिसक कर झुक गयी और लन्ड को चाटने लगी,सुपड़े को चूसने लगी,और चूत को सहला रही थी।
उन्होंने मेरा पूरा लन्ड मुह में लिया था और कुछ देर अइसे ही मुह में घूमने लगी।पर उनके चूत को सहलाने का स्पीड बढ़ गया था।
ओ अभी जोर जोर से लन्ड को चूसने लगी।और चूत में उंगली डाल के अंदर बाहर करने लगी।लन्ड पूरा लोहा बन गया था।पर कुछ ही पल में विणा जी का बांध टुटा और ओ झड़ गयी और सोफे पर शांत होंगे पड़ी रही।श्यामजी सर तो कबके लन्ड झड़के सोफे पर थके हुए सो गए थे।
पर मेरे लन्ड की हालत तो बेकार थी।लोहा बन गया था।मेरे में हवस का प्राणी बाहर आने को हो रहा था।
मैंने लन्ड पकड़ा और विणा जी की सोफे पे लिटा कर टांगे फैला दी।उनकी झांट और चूत गीले थे।मेरे में हवस का नशा चढ़ने लगा।मैंने मेरी दो उंगली चूत के अंदर डाल के अंदर बाहर करने लगा।नतीजन विणा जी का स्पर्म बाहर बहने लगा जो अटका था।
मैंने नीचे झुक के चूत में जीभ लगाके चाटने लगा।चुत के गुलाबी पंखुड़ियों को फैला कर जीभ घुड कर घुमाने लगा।
तभी वीणाजी के मुह से
आह आह मेरे राजा चूस चुसले आहसीईईई”निकलने लगा।
उन्होंने मेरा मुह चूत में दबा दिया।मैं पूरे जोश से चूत को चूसने लगा।उसके झड़े हुए सारे माल को मैंने चूस लिया था।
मेरा लन्ड तो लोहा जैसे तन गया था जिसमे हवस का ज्वाला मुखी था।
श्यामजी होश में आके ये खेल को एन्जॉय कर रहे थे।उनका तना लन्ड उनके हाथ में था।
मैं:सर जी हाथ को ज्यादा तकलीफ मत दो,तगड़ा माल लिटाया है द,ठुसवा दो लन्ड
श्यामजी सर उठके लन्ड विणा के मुह में देते है।
मैं चूत को थोड़ा फैला कर होल वे सूपड़ा लगाके लन्ड को घुसेड देता हु।
विणा”आह आउच घुसा पूरा घुसा आह सीईई”
मेरा लन्ड जैसे ही अंदर जाता है ।मैं थोड़ी देर रुक कर आहिस्ता आहिस्ता आगे पीछे करने लगता हु।विनाजी मजे ले रही थी।
मैं अपना स्पीड धीरे धीरे बढ़ा देता हु वैसे विणा जी की आवाजे भी बढ़ने लगती है।
“आह आह मममम चोद बेटा चोद जोर से और जोर रररर आह तेरी मेडम को खुश कर आह ममममम”
अंकल जल्दी ही झड़ गए।इसलिए ही मेडम मेरे से आकर्षित हुई।
अब मैं अपनी चरण सिमा में पहुंच गया था।जैसे ही मेरा लुंड झड़े झटसे बाहर निकल विणा के शरीर पर ही सब गिरा दिया।ओ गुस्सा नही हुई।मैं काफी थक गया था।सब लोक वैसे ही बैठे बैठे सोफे पे सुस्त हो गए।

ये सेक्सी चुदाई कहानी यह खत्म नही हुई,और भी आगे बहोत कुछ है,अगर कोई सुजाव हो तो [email protected] पर मेल करे और हमे बताये.
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.कहानी जारी रहेगी………..……

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