विकास:क्यो जय,मन लग गया लगता है तुम्हारा,

जय:हा चाचा,अच्छी जगह है,बहोत पसंद आई मुझे

विकास:चाची बहोत प्यार से खयाल रख रही है तेरा,अभी तक मेरा भी नही रखा इतना

जय:अयसे कुछ बात नही है चाचा ओ सबका ख्याल रखती है,

विकास:अरे वा बहोत प्यार आ रहा है चाची पे
तभी निर्मला बाहर आकर जय के पास उसके गाल खींचते हुए बोलती है
“है ही लाडला भतीजा मेरा,मैं प्यार करू या शादी करू आपसे क्या।”यह बोलते बोलते वह उसको पीछे से उसको बाहो में लेके अपने सीने पर दबाती है।उसका मुह चाची के सलवार के उपर से उसके दुधभरे मोटे चुचो को घिसता है।चाची थोड़ी सिसकी लेती है,पर जैसे ही जय उसको शक से घूरता है ओ झट से”मेरा लाडला बेटा है ही प्यारा”बोलके बात को घुमा देती है।
विकास:क्यो जय करेगा चाची से शादी।बोल?

जय:क्या चाचा कुछ भी।

निर्मला:चलो जी बाते तो होती रहेंगी खाना खा लो।

सब लोग खाना खाके हो जाणे के बाद सब सोने की तयारी करणे लगते है।
1रूम किचन होकर भी 4 से ज्यादा लोग हॉल वाले एरिया में रही सो सकते थे।
इसलिए चाचा दीवार की ओर बाद में चाची फिर उनकी लड़की फिर जय सो गए।
चाचा को नींद में रेंगने की आदत थी तो ओ दीवार से सैट के सोते थे।
आधी रात 12 बजे के आसपास की बात।जय बाथरूम जाने उठा।बाथरूम से आने के बाद जब उसने फ्रिज खोल और पानी पी रहा था तो उसकी नजर टहलते हुए चाची के पास गयी।चाची अब उसके सेड आ चुकी थी बच्ची चाचा और चाची के बीच में थी
चाची ने मैक्सी(नाइटी)पहनी थी।और घुटनो के ऊपर तक आ चुकी थी।चुचो का आकर बाद था तो ओ आधे बाहर लटक रहे थे।
यहापर चाची की भी नींद खुल चुकी थी।पर जय सिर के ऊपर होने की वजह से उनकी अधखुली आंख जय को दिखी नही।ओ तो चाची का रसीला बदन देखने में व्यस्त था।
चाची उसके सामने खड़े किये अलमारी के आयने से जय को देख रही थी।
चाची की अधनंगी टांगेऔर आधे लटके चुचे देख जय का लन्ड हलचल करने लगा,खुजली की वजह से जय उसको शॉर्ट के ऊपर से सहलाने लगा।
ये नजारा तो चाची के होश उड़ा गया।उसने जान भुजके अपनी कोहनी बदली और बेटी के ऊपर हाथ रख कर गांड को थोड़ा बाहर निकाल सो गयी।जिससे उसकी नाइटी गांड तक ऊपर आई।उसने ये अइसे किया जैसे ओ नींदमें हो।पर इस हलचल के परिणामके जय होश में आया और पानी की बोतल फ्रिज में रख जगह पे आके सो गया।
पर उसका लन्ड इतना उत्तेजित था की ओ खड़ा ही था अभीतक।
जय जब जगह पे सोया तब उसको अहसास हुआ की चाची की गांड उसके लन्ड को टच हो रही है।उसने लन्ड को सेट करने की पूरी कोशिश की पर ओ नाकाम रहा।
पर इस कोशिश के दरमियान उसके हाथ चाची के गांड को टच कर गए।इधर पराये तगड़े नौजवान के नए नवेले स्पर्श से चाची सातवे आसमान पे थी।
थोड़ी देर कोई हलचल नही हुई।मौका न चला जाए इस के लिए चाची ने अपनी गांड को और बाहर निकाला।जय का लन्ड अभी चाची के गांड के अंदर तक जा रहा था।
पर जय को आश्चर्य इस बात का हुआ की चाची बिना पेंटी के सोई है और ओ भी एक पराये नौजवान के साथ।
पर उसके पास कोई चारा नही था।रात को उसको कोई बवाल खड़ा नही करना था।जिससे उसके चाचा को कोई कारण मील जाए और ओ खुद फस जाए।
बस उसे कैसे भी संयमसे है रात काटनी थी।पर जबतक उसका मानसिक संयम बन जाए उसके पहले चाची अपनी अगली चाल चल चुकी थी।उसने अपनी गांड को लन्ड पे सटाके हिलाना घूमना चालू किया।जय को ये समज ने में देरी नही लगी की ये नींद में नही जान के किया जा रहा है,मतलब चाची जगी हुई है।
उसने कोई रेस्पोंस नही दिया।पर चाची अपनी हवस अपनी तरह से मिटाने के कोशिश में लगी थी।करीब 15 20 मिंट बाद ओ शांत हो गयी(झड़ गयी)।
जय आंखे बंद करके सिर्फ मजे ले रहा था।चाची उठी बाथरूम जाकर आई।उसने सोने से पहले जय के ऊपर देखा,उसका लन्ड अभी भी तना हुआ था,चाची थोड़ी मुस्करा गयी
मन में”क्या तगड़ा लन्ड है बंदे का,अभी तक खड़ा है,मन करता है अभी चूस लू और चूत में घुसेड दु”
पर ओ कंट्रोल करके जगह पे आके सो गयी।इस बार मुह जय के सामने था।
ओ नीद में होने का नाटक चालू कर दी।
यहां पे तने लन्ड की वजह से जय अपनी हवस काबू नही कर पा रहा था।उसने आंखे खोली तो सामने जो देखा और महसूस किया ओ उसके जीवन का एक नया अनूभव था।
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कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

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