जय हमेशा की तरह जबसे मुम्बई आया था तबसे जब भी घर में ऊब जाता तो चॉल के एक कोने में समुंदर की तरफ एक नीलू मौसी और उसका पति अपना एक चाय का ठेला डाले रखे थे.वहां जाके बैठ जाता उसको ताजी हवा भी मिल जाती और समुंदर किनारे दिल भी बहल जाता.नीलू मौसी की और उसकी अच्छीखासी पहचान हो गयी थी।सर्व गुणसम्पन्न जय को खाना बनाना भी आता था।तो कभी कभी ओ चाची को चाय या पकोड़े बनाने में मदत कर देता था।
उसदिन जय बहोत विचलित था।हरदिन की तरह ओ अपनी जगह आकर बैठ गया।नीलू मौसी के पति ने उसको पुकारा
“क्यों जय कैसे हो,चाय पिओगे”
जय तो कल से जो घटनाये उसके साथ घट रही है उसमे उलझ गया था।

“क्या मैं सही जगह आया हु?कही मैं फस तो नही गया?चाची की मदत करनी चाहिए?चाचा चाचीके मन मे सच मे कोई लोभ नही है संपत्ती का?”इस सवालोंके भूलभुलैया में अचानक किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा

“क्या हुआ बेटा,आज कुछ उदास हो,तबियत ठीक नही क्या?”

जी हा ओ नीलू मौसी थी:”चाची ने कुछ कहा।”
जय :वो वो मौसी बात अइसी है की

जय के चेहरे का पसीना देख बात के गहराई को समझते उसने उसको अंदर ले गयी।

नीलू मौसी:देख जय कोई परेशानी है तो मुझे बता,मैं कुछ कर पा सकू तो,घूंट घूंट के रहने से कुछ नही होगा’
जय ने कुछ सोच कर जो घटना अबतक घटी ओ सब मौसी को बया कर दी।मौसी को उसके भोले पन पे हंसी आ रही थी पर समय हसी मजाक वाला सही था।
उसने जय को कहा”तू मेरी बात मानेगा,अगर हातो मैं तुझे सुजाव दूंगी”

जय:”चाची इस अनजान शहर में एक तुम ही बची हो।कुछ सुजाव कर दो ,सवालो से मेरा सर फट रहा है।”

 मौसी:देख जय,तेरा तेरे माता पिता के सिवाय एक ही है ओ है चाचा और उसका परिवार,तुम अगर अयसेही घर जाओगे तो तुम्हारे पिताजी वैसे भी परेशान होंगे,और निट्ठल्ला बेटा किसको चाहिए,देख जब तक तुम हो तुम्हारे माता पिता सुखी रहेंगे,अगर तुम चाचा का परिवार भी सुखी कर दोगे तो ओ भी खुश तू भी खुश,इन बातो में नुकसान कहा है,चाची बच्चे के लिए बाहर मुह मारे उससे अच्छा,उनका तुम ही सहारा बन जाओ”

 जय मौसी को बहोत मानता था,उनकी बातो है असर हमेशा उसके दिलो दिमाग में होता था।इसबार भी वही हुआ।

 बहुत देर रात हो चुकी थी।जय ने मौसी को अलविदा कहा और घर आ गया
 चाचा आज जल्दी आया था।

 चाचा:अरे जय आ गए।अच्छा हुआ।चलो खाना खा लेते है।

 जय:आज जल्दी?

 चाचा:अरे हा जय,वो मेरा सेठ का फैमिली फंक्शन है लोनावला उधर जा रहा हु।तुम्हे जल्दी नही तो….

 जय:कोई नही 9 तो बज ही गए है,चलो फिर”

 आज सब लोग खाना एकसाथ खा लिए,
 चाचा जाने की तयारी में लगा,चाची उनको छोड़ने गयी,तबतक जय फ्रेश होकर बेड पे बैठा।
 निर्मला ने उसको देखा और मुस्करा के किचन में चली गयी।
 मौसी की बातो के असर के परिणाम स्वरूप जय ने हिम्मत जुटाई और किचन में चला गया।

 चाची धोये बर्तन फैला रही थी,ना जाने क्यो पर आज उसने सारी पहनी थी।उसकी मोटी गांड फूल के दिख रही थी।कमर इतनी मोटी होने के बाद भी लन्ड को बेकाबू करने में काफी थी।उसका ओ मादक नशीला पिछवाड़े का बदन देख कर जय का लन्ड तन गया।ओ धीरे से पीछे जाके चाची को दबोच लिया।
 दबोचते ही तना हुआ जय का लन्ड चाची के भीगे सारी को ठुस्ता हुआ गांड के अंदर सट गया।
 लन्ड के चुभाव और नौजवान के स्पर्श से निर्मला का पूरा रसभरा बदन सहर गया।उसने लाल गुलाबी होंठ दाँतोतले दबा दिए।

 चाची:आज जाके प्यार आ रहा है मेरे पे,कितना तड़पा कर क्या मिला।

 जय:छोड़ो उस बातो को चाची,अभी जो चाहे सेवा करवा लो”।

 जय ने निर्मला को अपनी तरफ घुमाया,वैसे लन्ड भी घिसते हुए चूत के ऊपर तड़फड़ने लगा।

 निर्मला:अरे तेरा लन्ड बहोत प्यासा लग रहा है।लगता है चूत की खुशबू लेनी है उसको।

 जय:हा मुझे भी अयसेही कुछ कुछ महसूस हो रहा है
 रुको उसको थोड़ा शांत कर लू।

 निर्मला घुटनो पे बैठ गयी और शॉर्ट नीचे कर के लन्ड को आझाद कर दिया।जैसे ही शॉर्ट में दबाया हुआ लन्ड आज़ाद हुआ,तो ओ चाची के मुह पर घिस गया।निर्मला ने उसको ऊपर से नीचे तक सहलाया।थोड़ा हिलाया जिससे ओ थोड़ा तन जाए।उसने जैसे ही लन्ड के टोपे की चमड़ी नीचे खींची जय चिल्लाया”आह चाची*****”
 निर्मला ने झट से उसके लन्ड के टोपे को अपने कोमल ओंठो से ढक दिया।
 जय ने राहत की सांस छोड़ी।उसको मजा आने लगा।
 चाची ने भी वही सिलसिला जारी रखा।उसने उसके टोपे को मुह में रख लन्ड की मुथ मारनी चालू की।ओ लन्ड को टोपे से लेकर अंडो तक चाटनी लगी।उसका पूरा लन्ड मुह में लेकर मजे लेने लगी।
 कुछ देर के इस सिलसिले के बाद जय झड़नेवाला था,उसने चाची निर्मला से कहा भी,पर नए लन्ड की मिलन की खुशी में ओ सब भूल गयी 

 जय थोड़ा अकड़ा और उसके मुह में झड़ दिया।
 “सॉरी चाची”जय।
 को बात नही जय।तुम सोने की तयारी करो”निर्मला।
 जय शॉर्ट सीधा कर बाहर गया।
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.कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
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सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

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