Struggling वाली चुदाई पार्ट 2

शालू के जाणे के बाद थोडी देर बाहर रुक कर जय घर के अंदर घुसा.जय को अंदर एते देख निर्मला ने उसे पूछा
“जय चाय पिओगे”
जय:”हा चाची”
जय बाथरूम में जाकर हाँथ पाव धोकर TV के सामने आके बैठ गया।
निर्मला चाची ने दो कप चाय लाकर उसके सामने ही बैठ गयी.घरके काम करने वाली औरत थी तो सलवार कमीज(पंजाबी ड्रेस टाइप)कपड़े पहने थे पन गले पे ओढ़नी नही थी।चाची के उस यौवन को जय कुछ देर ताकता ही रह गया।चाची की उम्र करीब 40 के ऊपर ही थी दिखने में सावला रंग,पर उम्र के हिसाब से मोठी थी।किसीको पहले फुरसत में पसंद आये अयसे उसका यौवन नही था।
पर जबसे उन दोनो की बाते जय ने सुनी है तबसे उसका चाची की तरफ देखने का नजरिया बदल गया था।
चाची ने थोड़ा उस बात पे गौर किया पर कोई रिएक्शन नही दिया,क्योकि यही तो उनको चाहिए था।अपने इस नादानी को समज आते ही जय पूर्वस्तिथि में आ गया।उसने भी मन में सोचा की “इनकी जाल में अइसे नही फसेंगे।ये लोक क्या तमाशे करते है उसके मजे लेंगे।क्योकि ये कुछ भी करे फायदा तो मेरा होगा,बस चिंता इस बात की थी की कही इस बात को ढाल बनाकर ओ मेरे नाम से मा बाबा को ब्लैकमेल न करे जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो”
जय TV देखते हुए चाय पीने लगा।उस पल के बाद उसने निर्मला की ओर नही देखा।
निर्मला:क्यो जय,कैसा लग रहा है यह पर,खुश तो हो,कोई परेशानी?
जय:कुछ नही चाची,ठीक है,दुनियादारी में उतरना है तो कुछ कुछ सहन करना पड़ेगा,और ये तो मेरा अपना घर है यह पर क्या परेशानी
निर्मला:बाते तो बड़ी अच्छी कर लेते हो,जो कुछ चाहिए तो बेज़िज़क मांग लेना,
जय:जी चाची जरूर
इसबार जय ने चाची को नजर अंदाज करते हुए बात की
चाय खत्म होते ही दोनो कप लेके जप निर्मला ऊठ रही थी तो उसके चुचो की गालिया साफ दिख रही थी,और पसीना होने से उसमे और निखार आ रहा था।पर उस समय जय ने ओ भी नजर अंदाज किया।अब तो निर्मला चौक सी गयी
मन में”क्या हुआ इसको अभी तो लाइन डाल रहा था,अभी कुछ ध्यान ही नही दे रहा है,धत्त तेरे की अच्छी खासी फासे में फसने वाली थी मछली”
शाम को विकास घर पे आ गया।जय छोटी बच्ची के साथ खेल रहा था।1रूम किचन था तो विकास ने आते ही जय की हालचाल पूंछ कर फ्रेश हुआ और किचन में चला गया।
विकास:कुछ बात बनी या नही
निर्मला:एक बार ताक जरूर रहा था पर उसके बाद में कुछ रिएक्शन नही दिखी।
विकास:कुछ भी कर पर उसे इस प्लान के बारे में पता नही चलना चाहिए।
निर्मला:पता नही चलेगा आप उसकी चिंता मत करो,पर मैं इसे काबू में कैसे करू,ओ गोरा चिकना गबरू जवान,और मैं ठहरी सावली मोठी सी औरत,मुझमें कैसे आकर्षित करू,कुछ समझ नही आ रहा
विकास: परेशान होने की बात नही है।थोड़ा सा अंगप्रदर्शन कर ले,काहीपर कुछ हवस भरी बात छेड दे,पारिवारिक मूल्यों को संभालने वाला लड़का है ज्यादा बवाल नही होगा।
निर्मला:कुछ तो जल्दी करना पड़ेगा जी,चूत रोज पानी छोड़ रही है,अभी सहन नही होता।
विकास:थोड़ा धीरज रख मेरी लन्ड की मल्लिका,जड़ जबरदस्ती करेगी तो लड़का और प्रोपर्टी दोनो हाथ से निकल जाएगा,और हा उसके काम के लिए पूछ लिए क्या
निर्मला:हा पूंछ लिया।पर मुझे कुछ ठीक नही लग रहा।मालकिन बड़ी चूदासी है।अक्सर कोई न कोई आता रहता है।कई उसने डोरे डाल दिए तो।
विकास:कल का कल देखेंगे,वैसे भी ओ वैसा लड़का नही है,दिनभर कुछ भी करे रात को तो मिल ही जाएगा।कल भैया पूछेंगे तो कुछ तो जवाब देना है।इसलिए लगा दो।नही तो इस महीने के भैया को हमारे जेब से पैसे देने पड़ेंगे
निर्मला:बात तो हुई है पर मालकिन और उनका परिवार बाह घूमने गया है,मालिक आये है न.जब ओ वापस आएंगे तब लेके जाउंगी उसे.2 3 दिन की बात है
विकास:ठीक है चलो खाना परोसो।मैं जय को बुलाता हु।

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.TO BE CONTINUE
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