Struggling वाली चुदाई पार्ट 7


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जय अभी चाचा चाची के रचाये योजना के वजह से चुदाई के इस भवर में फंसता जा रहा था।पारिवारिक मूल्यों को मानने वाला एक सर्वसाधारण घर का एक नौ जवान जो चाचा के कहे अनुरूप शहर में नाम कमाने आया था।आज इस अनचाहे रास्ते पर सफर कर रहा है।आगे जाके कितना STRUGGLING करना है उसको इसका कोई ज्ञान नही था।
एक दो दिन अइसे ही बीत गए।उस बीच निर्मला चाची के और नीलू मौसी के साथ जय के शारिरिक और मानसिक दोनो संबंध बड़े गहरे हो गए थे।उसकी गांव में भी मातापिता से बातचीत होती रहती थी।
चाची:सुनो जय,कल से मेरे साथ आना है तुझे।
जय:कहा चाची?
चाची:तेरे लिए एक काम देखा है मैंने,जबतक तेरे संगीत का कोई बंदोबस्त नही हो जाता तबतक कुछ कमा कर जेठजी को भेजा कर,उतनी मदद उनको।
जय चाचा के बारे में सोचने लगा।
चाची समझ जाती है
“तू चाचा का मत सोच,उन्होंने ही कहा था।विश्वास है न अपने चाची चाचा पर?”
जय :जी चाची,कल मैं आ जाऊंगा।
दूसरे दिन सुबह चाची जय को लेकर उनके बस्ती से बस चलते है 15 मिनट की दूरी पर एक अपार्टमेंट कॉलोनी थी,वहां पहुंच गए।
जय ने जिंदगी में पहली बार शानदार जगह देखी थी।बडी गाड़िया,बगीचे,और बहुत कुछ।
उस कॉलोनी के मैन गेट पर आते ही।चाची ने किसीको कॉल किया।
निर्मला चाची:हेलो,शालू,मैं जय को लेके आई हु,तुम….।
चाची बात कर रही थी तब तक जय पूरी कॉलोनी का बाहर से जायजा ले रहा था।
चाची:जय चलो
जय और चाची अंदर घुसे,चाची की सेक्युरिटी से बात हो जाने के बाद,सेक्युरिटी के कहे अनुसार हैम उस बिल्डिंग में घुसे ,सभी बिल्डिंग 5 मंजिल की थी।
लिफ्ट से दोनो 5 वे माले पे पहुंच गए।जो रूम नंबर दिया था वह पर बेल बजाई।
सामने शालू थी।जय चौक सा गया।
निर्मला:जय जिसको मैं या शालू हा बोलने बोले वहा सिर्फ हा बोलो बाकी चुप रहना।
अंदर ये भैया और भाभी बैठे थे और उनके माता पिता।
शालू ने हम दोनो की पहचान करवाई और काम के बारे में पूछताछ होने लगी।जय सिर्फ मुंडी हिलाक़े हामी भर रहा था।उसे कुछ मालूम पता नहीं था की ओ किस चीज को हा कर रहा है।
सामने वाले लोग बहुत खुश दिख रहे थे।गरीब झोपड़े में रहने वाला लड़का आज रइज लोगो के आलीशान महल को देख होश खो गया था,उसे वहां जो कुछ हो रहा था उसका कोई जायजा नही था।
उस भैया के पिताजी ने मुझे पुकारा.:
“क्यो बेटा पसंद आया घर.कल से आ जाना,पर ओ सामने के रूम में,ये मेरे बेटे का है।
जय:जी अंकल जी(जय ने सर झुका कर हा कर दी)
जय निर्मला और शालू तीनो नीचे आ गए।
निर्मला और शालू कुछ बड़बड़ा रही थी
“शालू कुछ होगा तो नही न,विलास मार डालेगा मुझे”
“कुछ नही होता नीमू”
जय ने जैसे आंखे घुमाई दोनो शांत हो गयी।
शालू गेट तक आई ।बाद में निर्मला जय को लेके घर आई।
दोपहर दोनो ने खाना खाया।निर्मला मुन्नी को लेकर सुला रही थी।जय घर से बाहर घूमने निकल गया।
जय आदतन अपने बात को शेयर करने नीलू मौसी के पास पहुंचा।
ठेले के पास जाते ही उसे मौसी का पति दिखा।कहि जा रहा था।जय को भी मालूम हो गया था की मौसी का पति जुवारी है।उसके जाने के बाद जय अंदर घुसा।मौसी कपड़े सूखा रही थी।मौसी हमेशा साड़ी में रहती थी तो पीछे से पसीने की वजह से सदी चिपकी थी।कमर पसीने के पानी से चमक रही थी।
जय उत्तेजित हो रहा था।ओ मौसी के पीछे गया और मौसी को दबोचा।अचानक हुए उत्तेजित स्पर्श से मौसी सिहर गयी।
जय ने मौसी की गर्दन चूमना चालू किया।मौसी चुम्मे से उत्तेजित हो रही थी और उसके हाथ छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।पर जय ने अपना चुम्मा चटाई का काम चालू रखा।उसने हाथ को ऊपर सरका कर चुचो को अपने हाथो के वश में कर लिया।और दबाने मसलने लगा।मौसी सिसक रही थी।पसीने से भीगा ब्लाउज चुचो से चिपका था तो चुचो का अस्पष्ट तरीके से स्पर्श हो रहा था।
हवस की वजह से जय का लन्ड हरकत करने लगा।जैसे ही तना उसका स्पर्श मौसी के गांड और गांड के छेद पर होने लगा।मौसी स्पर्श से सिहर गयी।ओ पूरी लाल हो गयी।जय लन्ड को गांड पर घूमाने लगा।वासना में होश खो बैठी चाची अपनी गांड को उसके लन्ड पर दबाने लगी।
जय उसके चुचो को ब्लाउज खोल के आज़ाद कर दिया

यह पर निर्मला जय को ढूंढते हुए मौसी के दरवाजे तक आई थी।
जय ने मौसी की साड़ी ऊपर खींची और पेंटी खींच के चूत पर हाथ मसलने लगा।मौसी की सिसके बढ़ी
“आह आहजय ययययय आह”
जय ने शॉर्ट के साथ अंडरवियर उतारी ।लन्ड को हाथ में घिसाया और चूत पर पीछे से सेट करके।मौसी को दीवार को टिकाये धक्का मार दिया।
मौसी:आह अम्मा आह सीईई”
थोड़ी प्रतीक्षा कर उसने घोड़े के माफिक चुदने को चालू किया।चुचे मसल के लाल हो गए थे।
निर्मला ये देख पहले तो जय से गुस्सा हो गयी,पर उसके चूत ने भी पानी बहाना चालू किया था।विकास चाचा तो पहले से ही नही चोदता था,बीच में जय ने भी चोदना छोड़ दिया था।और उसका कारण उसको मालूम हो गया।उसके मन में अंदर घुसने की बात आई पर कुछ सोच के ओ घर चली गयी।
इधर जय जोरो से घोड़ दौड़ कर रहा था।मौसी भी आनंद ले रही थी।
पूरी चुदाई में मौसी दो बार झड़ी पर इसबार जय भी चरण सिमा पे आ गया और उसने लन्ड बाहर निकाल लन्ड को हिलाक़े पूरा माल जमीन पे छोड़ दिया

शालू मौसी ने पेंटी ऊपर की और साड़ी ठीक कर जय को पलंग पे बैठने बोली।
ओ कपड़े सूखा रही थी।
जय:मुझे काम मिला है,कल से जाना है
मौसी:अच्छा है,पर मुझे न भूल जाना
जय:नही मौसी,बस रोज रोज नही आ पाऊंगा
मौसी:हप्ते में 1 2 बार तो आ जाना,जब तक तेरा लन्ड नही चखती,चूत ठंडी ही नही होती
जय:हा मौसी,मेरे लन्ड को भी तेरे चूत की आदत सी हो गयी।
मौसी उसके पास जाके बैठती है और गाल पर किस करती है
जय:चाचा नही चोदते क्या
मौसी:उस रन्डवे को मेरे चुत की क्या पड़ी,उसको तो पैसे कमाने का शौक है,तू है तो अभी उसकी जरूरत नही।
जय:ठीक है मैं आता हु,चाची राह देख रUही होगी।
मौसी से अलविदा लेके जय घर पहुंचा।
इधर निर्मला गुस्से से और चुत की आग से तड़प रही थी।
जय जब घर के अंदर घुसा उसे सन्नाटा से मालूम हुआ।मुन्नी सोई थी।पर चाची नही थी वहां।किचन से भी बर्तन की आवाज नही।
जय किचन कर अंदर गया वैसे पीछे से दरवाजा बन्द हुआ।
जय ने देखा चाची पूरी नंगी किचन में खड़ी थी।
बदन गिला था।गिला बदन। संगमरमरी जैसा चमक रहा था।
जय के रोज दबाने से चुचे भी गोल मटोल हो चुके थे
रोज चुदाई होती थी तो निर्मला चुत की झांट भी साफ करती थी।उस वजह से बदन से गिरती सरकती पानी की लहर चुत के बीच में जा रही थी।
जय का भी लन्ड अभी उछलने लगा।उसने खुद को पूरा नंगा किया।
खड़े लन्ड को देख निर्मला का गुस्सा थोड़ा ठंडा पड़ गया।ओ जय से आके चिपक गयी और उसके पूरे शरीर को चूमने लगी।जय ने उसके सर को पकड़ा और उसके ओंठो को चूमने लगा,उसने उसकी जीभ मुह में लेके चूसना चालू किया।उसने जय को कस के पकड़ा।जय चाची के ओंठ बारि बारी चूस रहा था।दोनो नंगे हवस के पुजारी रसपान करने में मदहोश हो चुके थे।
पीछे से पिछवाड़े को दबाकर उसे करीब खींच लिया।
करीब खींच दबाने से लन्ड चुत पे घिसने लगा।चाची सिहर सी गयी।उसने जय के लन्ड को हाथ से मसलना चालू किया।जय चाची की जीभ को चूस रहा था।
दोनो अपनी हवस में थे तभी किचन का दरवाजा खुल गया।
विलास चाचा था।जय का लन्ड जो आग में डाले लोहे जैसा था ओ सिकुड़ गया।
जय को क्या करू क्या नही कुछ समझ नही आ रहा था।उसने कपड़े पहने और चाचा से नजर न मिलाये ही भाग खड़ा हुआ।
पर चाची न खुदको छुपा रही थी न डर रही थी,पर इस बात पर ध्यान देने जितना समय नही था।ओ बस चाचा के मार से बचना चाहता था।
जय के जाने के बाद विलास ने किचन का दरवाजा बंद किया।
जय बाहर के खिड़की से देख सोच रहा था
“अब चाचा पहले चाची की और बाद में मेरी खबर लेगा,…..”

“नही नही मैं थोड़ी देर बाहर रुकता हु चाचा थोड़ा शांत हो जाए तो पैर पकड़ लूंगा”

जय वहां से निकल जाता है

यहाँ नंगी निर्मला अपनी चुत पर हाथ सैलाती हुई
“क्या जी आप भी कुछ समय नही आपका,अच्छी खासी चुत चुदने वाली थी”
विलास:अरे पर दिन में ये सब,रात में ठीक था।
निर्मला:पर चुत को मेरे रात दिन नही दिखता,बस लन्ड चाहिए उसको
विलास:फिर ठीक है,अभी मेरा ही ले लो।
निर्मला का मन नही था पर वो दीवार पर सट के खड़ी हुई और चूतड़ फैला दिए।
विलास ने पेंट नीचे कर लन्ड निकाल सहलाया और जब खड़ा हुआ तो पीछे से लगा के धक्का मार दिया।जय के लन्ड के मुकाबले विकास का लन्ड छोटा और बहोत कमजोर था।
विकास अपनी पूरी ताकद लगा के चुत चुदने की कोशिश कर रहा था।
निर्मला:छोड़ो न जी,नही होगा आपसे।
विकास बाहर जाके बेड पे बैठ गया।निर्मला ठीकठाक तैयार  होकर काम पे जुट गयी।
शाम के 7 बजे थे।
जय डरता हुआ अंदर आया।विकास के चेहरे पर कोई भाव नही था।
जय पूरी तयारी के साथ आया था।उसने आते ही विकास के पैर पकड़े और माफी मांगने लगा।
विकास हड़बड़ाया उसने उसको पकड़ा उठाया
विकास:अरे हा हा शांत हो जाओ।इसमे इतना बुरा मानने वाली बात नही है।
जय:पर चाचा ये गलत था,मुझे जो चाहे सजा दो पर मा बाबा को मत बोलना प्लीज़।
विकास मुस्कराया
“अरे पगले तेरे वजह से तो मेरा परिवार खुश है।मैं जो मेरी बीवी को सुख न दे सका वो तूने दिया।जिससे घर की मर्यादा भी नही टूटी,तू तो घर का ही है।चाची जितनी मेरी उतनी तेरी।”
दोनो की बाते सुन निर्मला बाहर आयी।
निर्मला:”और जय तूझे तो हमारा सपना पूरा करना है।”
जय:कौन सा???
निर्मला:”मुझे प्यार से नन्हा बेटा दे दे।पूरे जिंदगी भर तेरी और तेरे लन्ड की आभारी रहूंगी।आखरी सास तक तेरे लन्ड की सेवा करूँगी।”
विकास:”और तेरी सजा भी यही है।”
जय थोड़ा आश्चर्य में था,उसे लगा नही था चाचा चाची इतने जल्दी खुल जाएंगे

रात के खाने के बाद,विकास मुन्नी को लेके लगाए बिस्तर बार सुला रहा था।जय भी अपनी जगह पे था।निर्मला अपना काम खत्म कर रही थी।
जय की अइसे ही सोये सोये आंख लग गयी।जब आधी रात उसकी आंख खुली तो बाजू में चाचा मुन्नी के साथ सोया था पर उनके बीच जो सोती थी वो निर्मला नही दिखाई दे रही थी।
तभी जय का पेंट अंडरवेअर के साथ नीचे खींच गया।
नीचे देखा रो निर्मला पूरी नंगी लन्ड पे टूट पड़ी।उसने लन्ड को हिलाकर तना दिया और लन्ड चूसने लगी।लन्ड का तापमान और कठिनता देख ओ खड़ी रही और लन्ड पर आके घुटनो पे बैठ गयी।चुत के छेद पर लन्ड का सुपडे को घिसया और हाथ से जोर देकर छेद पर घुसाया।और नीचे बैठ गयी।
“आह अम्मा आह सीईई मर गयी आह”
उसकी मादक आवाज से जय को बहुत रोमांचीत महसूस हुआ।थोड़ी देर रुकने के बाद वो नीचे ऊपर होने लगी।

“आह राजा चोद दे तेरी रानी को आज तेरी ये रंडी दिलखोल आह आह चु ऊऊऊ देगी आह……”
जय भी मजे लेके गांड उठा के चोद रहा था।
रात भर दोनो बड़े मजे से चुदे।

सुबह 7 बजे
जय की किसी आवाज से आंख खुली।उसने देखा चाची उसके साइड में सोई हुई चाचा का लन्ड चूस रही थी।
चाचा:क्या जय रातभर बहोत पेला चाची को,तुम लोगोंकी चुदाई ने मेरे लन्ड का हाल बेहाल किया।इसलिए थोड़ा.
इतना बोल चाचा हस दिया।
जय का ओ नजारा देख लन्ड खड़ा हो रहा था।उसने चाची के नंगे चुचो को मुह में लेकर चूसना चालू किया ।निप्पल्स को खिंचके चूसने लगा।चाची सिसक गयी।
जय का खड़ा लन्ड चाची के कमर के नीचे घिस रहा था।घिसता हुआ लन्ड चाची को और उत्तेजित कर रहा था।

चाची ने उसका लन्ड मसलना चालू किया चाची के कोमल हाथो के छूने से लन्ड और तन गया।और जय में भी उत्तेजना आ गयी।जय ने और जोर से चुचे चूसना मसलना चालू किया।इतने में चाचा झड़ गया।पर चाची सोई हुई थी तो पूरा माल चद्दर पे गिर गया।चाचा उठ कर बाथरूम गया।

चाची ने करवट बदल के मुह जय के साइड किया और उसका मुह उठा के उसे ओंठ चूमने लगी।उनकी मुह की चुसम चुसाई चालू हो गयी।पर तभी शालू ने बाहर से आवाज दी।दोनो झट से उठ लपेट कर तयार हो गए।
जय ने हाफ शार्ट और खुले बदन में जाकर दरवाजा खोला।
शालू ने जय को देखते ही अपनी आंखे चौड़ी की।
जय ने उसका ध्यान तोड़ते हुए अंदर बुलाया।पर शालू सिर्फ बोली”चाची को बोल 1 ला दिन है।देर मत कर”

शालू जाने के बाद जय अंदर गया।चाची बाथरूम से बाहर आ रही थी।जय उसको देखते रह गया पर चाची ने उसे जल्दी तयार होने बोला।
जय को उसके काम पर छोड़ चाची निकल गयी।
जय अंदर गया वैसे भैया की मा ने रूम में बुलाया।
जय झिझकते हुए अंदर गया।उनका नाम सिमा था।
सिमा:देखो जय आज पहला दिन है तो पहले घर देख लो।कुछ होगा तो मैं बता दूंगी।और जबतक मैं न बुलाऊ तबतक वह खिड़की के पास के जगह पर बैठे रहना।
जय हा बोलके बाहर जा बैठा।

उसदिन और अगले 3 4 दिन उसको कोई काम न बताया गया।बस उसे कुछ समान लाने भेजती थी।पर उस दौरान कोई न कोई लड़का घर आता जाता था।पर जय ने उसपर ज्यादा ध्यान नही दिया।उसे अपने काम से काम रखना था।

पर जब भी जय चाची के बुलाने पे जाता था चाची अधनंगी मिलती थी।जय का रोम रोम उत्तेजित होता पर काम है ये समझ के ओ कंट्रोल कर लेता था।जय अभी सारी परिस्थितियां समझ चुका था।पर उसे कोई और कोई काम नही था तो उसने कुछ बात आगे न बढ़ाई।

उसदिन शाम  को जय घर आया।चाची और चाचा कहि पर जा रहे थे मुन्नी को लेकर।चाची रो रही थी।
चाचा:देख जय चाची के पिताजी गुजर गए है।हम दो दिन के लिए वह जा रहे है।चाची ने अपनी किसी दोस्त को तेरे खाने का बोला है।संभाल लेना।
जय:ठीक है चाचा।कोई नही।बस चाची का खयाल रखना।सम्हाल के जाना
चाचा और चाची के जाने के बाद।जय फ्रेश होक शोर्ट और बनियान में बैठे tv देख रहा था।
तभी डोरबेल बजी।उसने उठके दरवाजा खोला।शालू थी।
ओ अंदर आई वैसे उसने दरवाजा बन्द किया।
जय चौक गया।ओ कुछ बोले उसके पहले ओ बोल पड़ी।
“अरे जय ओ तेरा खाना बनाने को बोली थी,चाची तेरी।
जय ने ठीक है बोला और सोफे पे बैठ tv देखने लगा।
शालू उसको ताड़ते हुए किचन के अंदर घुस गयी।
उसने फटाफट खाना बनाया और बाहर जय को बुलाने आई तो उसने देखा।









कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6


गरमागरम सेक्स कहानी पढ़िए, खूबसरत कमसिन लड़कियों, हॉट भाभियों और चुदाई की प्यासी आंटियों की स्टोरीज का खजाना
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Struggling वाली चुदाई पार्ट 3

विकास:क्यो जय,मन लग गया लगता है तुम्हारा,

जय:हा चाचा,अच्छी जगह है,बहोत पसंद आई मुझे

विकास:चाची बहोत प्यार से खयाल रख रही है तेरा,अभी तक मेरा भी नही रखा इतना

जय:अयसे कुछ बात नही है चाचा ओ सबका ख्याल रखती है,

विकास:अरे वा बहोत प्यार आ रहा है चाची पे
तभी निर्मला बाहर आकर जय के पास उसके गाल खींचते हुए बोलती है
“है ही लाडला भतीजा मेरा,मैं प्यार करू या शादी करू आपसे क्या।”यह बोलते बोलते वह उसको पीछे से उसको बाहो में लेके अपने सीने पर दबाती है।उसका मुह चाची के सलवार के उपर से उसके दुधभरे मोटे चुचो को घिसता है।चाची थोड़ी सिसकी लेती है,पर जैसे ही जय उसको शक से घूरता है ओ झट से”मेरा लाडला बेटा है ही प्यारा”बोलके बात को घुमा देती है।
विकास:क्यो जय करेगा चाची से शादी।बोल?

जय:क्या चाचा कुछ भी।

निर्मला:चलो जी बाते तो होती रहेंगी खाना खा लो।

सब लोग खाना खाके हो जाणे के बाद सब सोने की तयारी करणे लगते है।
1रूम किचन होकर भी 4 से ज्यादा लोग हॉल वाले एरिया में रही सो सकते थे।
इसलिए चाचा दीवार की ओर बाद में चाची फिर उनकी लड़की फिर जय सो गए।
चाचा को नींद में रेंगने की आदत थी तो ओ दीवार से सैट के सोते थे।
आधी रात 12 बजे के आसपास की बात।जय बाथरूम जाने उठा।बाथरूम से आने के बाद जब उसने फ्रिज खोल और पानी पी रहा था तो उसकी नजर टहलते हुए चाची के पास गयी।चाची अब उसके सेड आ चुकी थी बच्ची चाचा और चाची के बीच में थी
चाची ने मैक्सी(नाइटी)पहनी थी।और घुटनो के ऊपर तक आ चुकी थी।चुचो का आकर बाद था तो ओ आधे बाहर लटक रहे थे।
यहापर चाची की भी नींद खुल चुकी थी।पर जय सिर के ऊपर होने की वजह से उनकी अधखुली आंख जय को दिखी नही।ओ तो चाची का रसीला बदन देखने में व्यस्त था।
चाची उसके सामने खड़े किये अलमारी के आयने से जय को देख रही थी।
चाची की अधनंगी टांगेऔर आधे लटके चुचे देख जय का लन्ड हलचल करने लगा,खुजली की वजह से जय उसको शॉर्ट के ऊपर से सहलाने लगा।
ये नजारा तो चाची के होश उड़ा गया।उसने जान भुजके अपनी कोहनी बदली और बेटी के ऊपर हाथ रख कर गांड को थोड़ा बाहर निकाल सो गयी।जिससे उसकी नाइटी गांड तक ऊपर आई।उसने ये अइसे किया जैसे ओ नींदमें हो।पर इस हलचल के परिणामके जय होश में आया और पानी की बोतल फ्रिज में रख जगह पे आके सो गया।
पर उसका लन्ड इतना उत्तेजित था की ओ खड़ा ही था अभीतक।
जय जब जगह पे सोया तब उसको अहसास हुआ की चाची की गांड उसके लन्ड को टच हो रही है।उसने लन्ड को सेट करने की पूरी कोशिश की पर ओ नाकाम रहा।
पर इस कोशिश के दरमियान उसके हाथ चाची के गांड को टच कर गए।इधर पराये तगड़े नौजवान के नए नवेले स्पर्श से चाची सातवे आसमान पे थी।
थोड़ी देर कोई हलचल नही हुई।मौका न चला जाए इस के लिए चाची ने अपनी गांड को और बाहर निकाला।जय का लन्ड अभी चाची के गांड के अंदर तक जा रहा था।
पर जय को आश्चर्य इस बात का हुआ की चाची बिना पेंटी के सोई है और ओ भी एक पराये नौजवान के साथ।
पर उसके पास कोई चारा नही था।रात को उसको कोई बवाल खड़ा नही करना था।जिससे उसके चाचा को कोई कारण मील जाए और ओ खुद फस जाए।
बस उसे कैसे भी संयमसे है रात काटनी थी।पर जबतक उसका मानसिक संयम बन जाए उसके पहले चाची अपनी अगली चाल चल चुकी थी।उसने अपनी गांड को लन्ड पे सटाके हिलाना घूमना चालू किया।जय को ये समज ने में देरी नही लगी की ये नींद में नही जान के किया जा रहा है,मतलब चाची जगी हुई है।
उसने कोई रेस्पोंस नही दिया।पर चाची अपनी हवस अपनी तरह से मिटाने के कोशिश में लगी थी।करीब 15 20 मिंट बाद ओ शांत हो गयी(झड़ गयी)।
जय आंखे बंद करके सिर्फ मजे ले रहा था।चाची उठी बाथरूम जाकर आई।उसने सोने से पहले जय के ऊपर देखा,उसका लन्ड अभी भी तना हुआ था,चाची थोड़ी मुस्करा गयी
मन में”क्या तगड़ा लन्ड है बंदे का,अभी तक खड़ा है,मन करता है अभी चूस लू और चूत में घुसेड दु”
पर ओ कंट्रोल करके जगह पे आके सो गयी।इस बार मुह जय के सामने था।
ओ नीद में होने का नाटक चालू कर दी।
यहां पे तने लन्ड की वजह से जय अपनी हवस काबू नही कर पा रहा था।उसने आंखे खोली तो सामने जो देखा और महसूस किया ओ उसके जीवन का एक नया अनूभव था।
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सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
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सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
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सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

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Struggling वाली चुदाई पार्ट 2

शालू के जाणे के बाद थोडी देर बाहर रुक कर जय घर के अंदर घुसा.जय को अंदर एते देख निर्मला ने उसे पूछा
“जय चाय पिओगे”
जय:”हा चाची”
जय बाथरूम में जाकर हाँथ पाव धोकर TV के सामने आके बैठ गया।
निर्मला चाची ने दो कप चाय लाकर उसके सामने ही बैठ गयी.घरके काम करने वाली औरत थी तो सलवार कमीज(पंजाबी ड्रेस टाइप)कपड़े पहने थे पन गले पे ओढ़नी नही थी।चाची के उस यौवन को जय कुछ देर ताकता ही रह गया।चाची की उम्र करीब 40 के ऊपर ही थी दिखने में सावला रंग,पर उम्र के हिसाब से मोठी थी।किसीको पहले फुरसत में पसंद आये अयसे उसका यौवन नही था।
पर जबसे उन दोनो की बाते जय ने सुनी है तबसे उसका चाची की तरफ देखने का नजरिया बदल गया था।
चाची ने थोड़ा उस बात पे गौर किया पर कोई रिएक्शन नही दिया,क्योकि यही तो उनको चाहिए था।अपने इस नादानी को समज आते ही जय पूर्वस्तिथि में आ गया।उसने भी मन में सोचा की “इनकी जाल में अइसे नही फसेंगे।ये लोक क्या तमाशे करते है उसके मजे लेंगे।क्योकि ये कुछ भी करे फायदा तो मेरा होगा,बस चिंता इस बात की थी की कही इस बात को ढाल बनाकर ओ मेरे नाम से मा बाबा को ब्लैकमेल न करे जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो”
जय TV देखते हुए चाय पीने लगा।उस पल के बाद उसने निर्मला की ओर नही देखा।
निर्मला:क्यो जय,कैसा लग रहा है यह पर,खुश तो हो,कोई परेशानी?
जय:कुछ नही चाची,ठीक है,दुनियादारी में उतरना है तो कुछ कुछ सहन करना पड़ेगा,और ये तो मेरा अपना घर है यह पर क्या परेशानी
निर्मला:बाते तो बड़ी अच्छी कर लेते हो,जो कुछ चाहिए तो बेज़िज़क मांग लेना,
जय:जी चाची जरूर
इसबार जय ने चाची को नजर अंदाज करते हुए बात की
चाय खत्म होते ही दोनो कप लेके जप निर्मला ऊठ रही थी तो उसके चुचो की गालिया साफ दिख रही थी,और पसीना होने से उसमे और निखार आ रहा था।पर उस समय जय ने ओ भी नजर अंदाज किया।अब तो निर्मला चौक सी गयी
मन में”क्या हुआ इसको अभी तो लाइन डाल रहा था,अभी कुछ ध्यान ही नही दे रहा है,धत्त तेरे की अच्छी खासी फासे में फसने वाली थी मछली”
शाम को विकास घर पे आ गया।जय छोटी बच्ची के साथ खेल रहा था।1रूम किचन था तो विकास ने आते ही जय की हालचाल पूंछ कर फ्रेश हुआ और किचन में चला गया।
विकास:कुछ बात बनी या नही
निर्मला:एक बार ताक जरूर रहा था पर उसके बाद में कुछ रिएक्शन नही दिखी।
विकास:कुछ भी कर पर उसे इस प्लान के बारे में पता नही चलना चाहिए।
निर्मला:पता नही चलेगा आप उसकी चिंता मत करो,पर मैं इसे काबू में कैसे करू,ओ गोरा चिकना गबरू जवान,और मैं ठहरी सावली मोठी सी औरत,मुझमें कैसे आकर्षित करू,कुछ समझ नही आ रहा
विकास: परेशान होने की बात नही है।थोड़ा सा अंगप्रदर्शन कर ले,काहीपर कुछ हवस भरी बात छेड दे,पारिवारिक मूल्यों को संभालने वाला लड़का है ज्यादा बवाल नही होगा।
निर्मला:कुछ तो जल्दी करना पड़ेगा जी,चूत रोज पानी छोड़ रही है,अभी सहन नही होता।
विकास:थोड़ा धीरज रख मेरी लन्ड की मल्लिका,जड़ जबरदस्ती करेगी तो लड़का और प्रोपर्टी दोनो हाथ से निकल जाएगा,और हा उसके काम के लिए पूछ लिए क्या
निर्मला:हा पूंछ लिया।पर मुझे कुछ ठीक नही लग रहा।मालकिन बड़ी चूदासी है।अक्सर कोई न कोई आता रहता है।कई उसने डोरे डाल दिए तो।
विकास:कल का कल देखेंगे,वैसे भी ओ वैसा लड़का नही है,दिनभर कुछ भी करे रात को तो मिल ही जाएगा।कल भैया पूछेंगे तो कुछ तो जवाब देना है।इसलिए लगा दो।नही तो इस महीने के भैया को हमारे जेब से पैसे देने पड़ेंगे
निर्मला:बात तो हुई है पर मालकिन और उनका परिवार बाह घूमने गया है,मालिक आये है न.जब ओ वापस आएंगे तब लेके जाउंगी उसे.2 3 दिन की बात है
विकास:ठीक है चलो खाना परोसो।मैं जय को बुलाता हु।

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सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7
गरमागरम सेक्स कहानी पढ़िए, खूबसरत कमसिन लड़कियों, हॉट भाभियों और चुदाई की प्यासी आंटियों की स्टोरीज का खजाना
Sexy Kahani padhen Chut chudai ki aur gaand marne ki. Ye sabhi kahaniya hame hamare lekhak mitro se mili he. Wo apni chudai ke anubhaw aap ko batayenge. Aap lund chusne ke anubhaw, chut me lund kaise dalte he aur gaand kaise marte he wo sab aap ko detail me aur mazedar wiwran ke sath batayenge.

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Struggling वाली चुदाई पार्ट 1


किसीने बहुत खूब कहा है,
           “  क्या जिंदगी है ओ जिसमे लन्ड खड़ा न हो
             कैसी मर्दानगी उसकी जिसके हाथो चूचा बड़ा न हो
      चूत का छेद और हाल कैसे हो मेरे हवसी नाथ
      चोद दे ना उस चूत रानी को चाहे उसका पति खड़ा हो न हो”
नमस्ते दोस्तो मेरा नाम मि.सेक्सी वेबी.कुछ लेके आया हु नया नही है पर रोमांचक भरा जरूर है,अच्छा लगे तो भी कमेंट करना और बुरा लगे तो भी,क्योकि मार्गदर्शन बहुत कुछ सीखा देता है लेखक को,उसके लिए भाषा मायने नही रखती,जड़ बकचोदी न करते हुए.स्टोरी का पहला सीजन पेश करने जा रहा हु.आपके साथ कि आशा है,धन्यवाद!!!

आजकल की जिंदगी तेज रफ्तार सी हो गयी है.हर एक को अपने सपने पूरे करने में बहोत कठिन से कठिन चुनोतीओंका सामना करना पड़ता है।अइसे ही दिल मे अरमान और मन मे बहोत सपने लिए एक साधारण से गांव में पला बड़ा लड़का अपने सपनो को साकार करने शहर आ पहुंचा,सपनो का शहर मुंबई।
नाम है जय।उम्र करीब 21 साल।अच्छा खासा तगड़ा जवान।गरीब किसान के परिवार में पैदा हुआ एक अनमोल रत्न,जिसमे जन्म से हो या कर्म से संगीत गायकी और हार्मोनियम वादन की अलग सी कला अवगत थी,गांव में उसके इस रत्न का पारखी नही था।
     गर्मियों का वक्त था,उसका चाचा छुटियो में गांव आया हुआ था।उसकी इस तम्मना को जानते हुए और भाई की परिस्थिति को समझते हुए उसने जय को मुम्बई लेकर जाने का प्रस्ताव रखा।पहले तो जय के माता पिता ने न नकुर कि पर बाद में मान गये।
कुछ दिन रहने के बाद चाचा जय को लेकर मुम्बई आ गया।जय के लिए शहर वाली जिंदगी नई थी।उसका चाचा एक चॉल में रहता है,उसकी एक 40 साल की बीवी और 5 साल की बेटी है।
चाचा जब जय को घर लेकर आता है तो चाची उसका खूब अच्छे तरह से स्वागत करती है ।चाचा चाची को पूरे परिस्थिति का ज्ञान करा देता है।हालांकि चाचा का रूम बहोत छोटा था पर 4 लोग तो सहजता से रह सकते थे।चाचा ने जय को कुछ दिन रुकने को बोला जबतक उसे कोई काम न ढूंढ ले।दिन अइसे ही जाने लगे।रोज सुबह जल्दी उठना चाची को घर के कामो में मदत करना उसकी दिनचर्या बन चुकी थी।जय की चाची भी घर के काम करने जाती थी तो जय घर पे अकेला हारमोनियम बजाते बैठता था।
एकदिन जब ओ अयसेही घर में बैठा था तो चाल में रहने वाली उसके चाची की दोस्त घर पे आ गयी।चाल का माहौल आम तौर पर क्या रहता है ओ तो सभी अच्छे तरह से जानते है ।जय घर में बनियान और शॉर्ट में बैठा tv देख रहा था,जब चाची की दोस्त अंदर आई तो ओ हड़बड़ा कर खड़ा हुआ।
पहले तो ओ एक दूसरे को ताकते ही रह गए,पर कुछ पल गुजरने के बाद चाची की दोस्त बोली “बेटा निर्मला किधर है”
जय:ओ चाची काम पर गयी है,वैसे आप कौन है?
चाची की दोस्त:निर्मला को बोलना शालू आई थी।
जय :ठीक है।
शालू:वैसे तुम कौन हो,कभी देखा नही?
जय:मैं विकास चाचा का गांव का भतीजा हु,काम के खोज में यह आया हु अभी कूछ दिनों पहले।
शालू:गांव का?अरे तो तुम विजय के लड़के हो,सुमित्रा कैसी है?
जय पहले तो शालू के मुह में मा बाप का नाम सुन चौक गया 
उसने हड़बड़ाते हुए कहा:है ठीक सब सब लोग मजे में
शालू:तू तो बहुत बड़ा हो गया रे,(जय को ताड़ते हुए)बचपन में तो मेरे सामने नंगा घूमता था।
जय थोड़ा शर्मा जाता है।
शालू:ठीक है मैं शाम को अति हु।
शालू के जाते हुए ताड़ते हुए जय सोचविचार में पैड जाता है की ये है कोन?मेरे परिवार के बारे में जानती कैसे है?

शाम 6 बजे जब उसकी चाची निर्मला घर आ जाती है तो ओ सब कुछ जो घटा ओ बया कर देता है।चाची थोड़ा सोचके इस बात को टालने की कोशिश करती है,और उसे बाहर घूमके आने को बोलती है।जय को ये बात थोड़ी खटक जाती है।पर दिनभर घर पे बैठ ओ भी थक चुका था तो ओ भी बाहर घूमने चला जाता है।
इधर उधर टहलकर जय जब घर आता है तो घर के बाहर से उसे अंदर किसी के होने की आवाज सुनाई देती है।अध खुली खिड़की से ओ अंदर देखती है तो,उसे अंदर वही दोपहर वाली शालू चाची दिखाई देती है।उनके बीच कोई बात चल रही थी।जय ओ सुनने की कोशिश करता है।
शालू:तूने बताया नही,विजय का लड़का आया है।
निर्मला:अरे अभी आया है,बताने ही वाली थी।
शालू:अच्छा,तुम मुझे बताने वाली थी(अजीब सी मुस्कान)
निर्मला:देख शालू जेठ जी और तुम्हारे बीच जो था,ओ कब का खत्म हो चुका है,तुम लोगो की प्रेम कहानी को 23 साल पहले ही हो गयी।तुम्हारे सरफिरे स्वभाव को जानकर ही ओ गांव में जाके शादी किया
शालू:मैंने क्या किया,ओ मुझसे भी शादी कर सकता था।
निर्मला:तुम दोनो में क्या गहमागहमी हुई मालूम नही पर इसका मतलब तुम अभी जय पे डोरे न डाल।बचपन में उसके तूने जो तमाशा किया तब जय बहोत छोटा था अभी ओ जवान है।तेरे इस स्वभाव के वजह से न जेठ जी यहां आते है न किसीको भेजते है।बड़ी मुश्किल से जय को भेजा है।
शालू:तूने ही विकास को बोला न उसको लाने को?
शालू के अचानक बोलने से निर्मला हड़बड़ा गयी।
शालू:सच बोल क्या प्लान है तुम लोगो का?
निर्मला:तुम तो जानती हो,बेटी को पैदा करने में ही कितना समय लग गया,अभी उन्हें बेटाभी चाहिए पर उम्र के हिसाब से उनसे ओ हो नही पा रहा।इसलिए हैम दोनो ने मिल कर सोच समज कर ये कदम उठाया है।
शालू:यानी विकास भी इसमे शामिल है।
निर्मला:हा,ये पूरा प्लान ही उनका है,मैने सिर्फ हा कहा है,जिससे मैं मा भी बन जाउंगी और जय जेठ जी का एकलौता लड़का है तो जो संपत्ति है ओ भी हमारे पास आ जाएगी।
शालू:इस प्लान में मैं भी शामिल होना चाहती हु।मुझे भी अपने अधूरे अरमान पूरे करने है।जो बाप से न हुआ ओ मैं बेटे से करवाउंगी
निर्मला:पर थोड़ा धीरज रख तेरे यही सरफिरे स्वभाव के वजह से बाप छूट गया अब बेटे से हाथ धो बैठोगी,तू जो भी करेगी कर पर इनको उसका पता न चल पाए
शालू:ठीक है,पर कुछ भी बोल विजय का लड़का उससे भी दमदार लगता है।
निर्मला:देख ओ मुझे भी बहुत पसंद आया है,पर जैसे उसका हमे फायदा है वैसे ओ जिसके लिए आया है ओ सपना भी उसका पूरा करना पड़ेगा याफिर करने का दिखावा करना पड़ेगा,क्योकि ओ बहोत होशियार है,गरीबी होते हुए भी उसने अपनी कला को निखारते हुए पढ़ाई पूरी की है,ध्यान नही रखा तो पंछी उड़ जाएगा।
दोनो भी हँसने लगे।
जय को ये सब सुन के थोड़ा अजीब से तो फील हुआ पर उसने भी वैसे रिएक्ट न होते हुए जैसे हूँ रहा है वैसे जाने देने का फैसला किया क्योकि सवाल परिवार का था,माता पिता के भावना ओ का था।बस उसे अभ चौकन्ना रह के नहले पे दहला देना था।

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.कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

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