Struggling वाली चुदाई पार्ट 7


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जय अभी चाचा चाची के रचाये योजना के वजह से चुदाई के इस भवर में फंसता जा रहा था।पारिवारिक मूल्यों को मानने वाला एक सर्वसाधारण घर का एक नौ जवान जो चाचा के कहे अनुरूप शहर में नाम कमाने आया था।आज इस अनचाहे रास्ते पर सफर कर रहा है।आगे जाके कितना STRUGGLING करना है उसको इसका कोई ज्ञान नही था।
एक दो दिन अइसे ही बीत गए।उस बीच निर्मला चाची के और नीलू मौसी के साथ जय के शारिरिक और मानसिक दोनो संबंध बड़े गहरे हो गए थे।उसकी गांव में भी मातापिता से बातचीत होती रहती थी।
चाची:सुनो जय,कल से मेरे साथ आना है तुझे।
जय:कहा चाची?
चाची:तेरे लिए एक काम देखा है मैंने,जबतक तेरे संगीत का कोई बंदोबस्त नही हो जाता तबतक कुछ कमा कर जेठजी को भेजा कर,उतनी मदद उनको।
जय चाचा के बारे में सोचने लगा।
चाची समझ जाती है
“तू चाचा का मत सोच,उन्होंने ही कहा था।विश्वास है न अपने चाची चाचा पर?”
जय :जी चाची,कल मैं आ जाऊंगा।
दूसरे दिन सुबह चाची जय को लेकर उनके बस्ती से बस चलते है 15 मिनट की दूरी पर एक अपार्टमेंट कॉलोनी थी,वहां पहुंच गए।
जय ने जिंदगी में पहली बार शानदार जगह देखी थी।बडी गाड़िया,बगीचे,और बहुत कुछ।
उस कॉलोनी के मैन गेट पर आते ही।चाची ने किसीको कॉल किया।
निर्मला चाची:हेलो,शालू,मैं जय को लेके आई हु,तुम….।
चाची बात कर रही थी तब तक जय पूरी कॉलोनी का बाहर से जायजा ले रहा था।
चाची:जय चलो
जय और चाची अंदर घुसे,चाची की सेक्युरिटी से बात हो जाने के बाद,सेक्युरिटी के कहे अनुसार हैम उस बिल्डिंग में घुसे ,सभी बिल्डिंग 5 मंजिल की थी।
लिफ्ट से दोनो 5 वे माले पे पहुंच गए।जो रूम नंबर दिया था वह पर बेल बजाई।
सामने शालू थी।जय चौक सा गया।
निर्मला:जय जिसको मैं या शालू हा बोलने बोले वहा सिर्फ हा बोलो बाकी चुप रहना।
अंदर ये भैया और भाभी बैठे थे और उनके माता पिता।
शालू ने हम दोनो की पहचान करवाई और काम के बारे में पूछताछ होने लगी।जय सिर्फ मुंडी हिलाक़े हामी भर रहा था।उसे कुछ मालूम पता नहीं था की ओ किस चीज को हा कर रहा है।
सामने वाले लोग बहुत खुश दिख रहे थे।गरीब झोपड़े में रहने वाला लड़का आज रइज लोगो के आलीशान महल को देख होश खो गया था,उसे वहां जो कुछ हो रहा था उसका कोई जायजा नही था।
उस भैया के पिताजी ने मुझे पुकारा.:
“क्यो बेटा पसंद आया घर.कल से आ जाना,पर ओ सामने के रूम में,ये मेरे बेटे का है।
जय:जी अंकल जी(जय ने सर झुका कर हा कर दी)
जय निर्मला और शालू तीनो नीचे आ गए।
निर्मला और शालू कुछ बड़बड़ा रही थी
“शालू कुछ होगा तो नही न,विलास मार डालेगा मुझे”
“कुछ नही होता नीमू”
जय ने जैसे आंखे घुमाई दोनो शांत हो गयी।
शालू गेट तक आई ।बाद में निर्मला जय को लेके घर आई।
दोपहर दोनो ने खाना खाया।निर्मला मुन्नी को लेकर सुला रही थी।जय घर से बाहर घूमने निकल गया।
जय आदतन अपने बात को शेयर करने नीलू मौसी के पास पहुंचा।
ठेले के पास जाते ही उसे मौसी का पति दिखा।कहि जा रहा था।जय को भी मालूम हो गया था की मौसी का पति जुवारी है।उसके जाने के बाद जय अंदर घुसा।मौसी कपड़े सूखा रही थी।मौसी हमेशा साड़ी में रहती थी तो पीछे से पसीने की वजह से सदी चिपकी थी।कमर पसीने के पानी से चमक रही थी।
जय उत्तेजित हो रहा था।ओ मौसी के पीछे गया और मौसी को दबोचा।अचानक हुए उत्तेजित स्पर्श से मौसी सिहर गयी।
जय ने मौसी की गर्दन चूमना चालू किया।मौसी चुम्मे से उत्तेजित हो रही थी और उसके हाथ छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।पर जय ने अपना चुम्मा चटाई का काम चालू रखा।उसने हाथ को ऊपर सरका कर चुचो को अपने हाथो के वश में कर लिया।और दबाने मसलने लगा।मौसी सिसक रही थी।पसीने से भीगा ब्लाउज चुचो से चिपका था तो चुचो का अस्पष्ट तरीके से स्पर्श हो रहा था।
हवस की वजह से जय का लन्ड हरकत करने लगा।जैसे ही तना उसका स्पर्श मौसी के गांड और गांड के छेद पर होने लगा।मौसी स्पर्श से सिहर गयी।ओ पूरी लाल हो गयी।जय लन्ड को गांड पर घूमाने लगा।वासना में होश खो बैठी चाची अपनी गांड को उसके लन्ड पर दबाने लगी।
जय उसके चुचो को ब्लाउज खोल के आज़ाद कर दिया

यह पर निर्मला जय को ढूंढते हुए मौसी के दरवाजे तक आई थी।
जय ने मौसी की साड़ी ऊपर खींची और पेंटी खींच के चूत पर हाथ मसलने लगा।मौसी की सिसके बढ़ी
“आह आहजय ययययय आह”
जय ने शॉर्ट के साथ अंडरवियर उतारी ।लन्ड को हाथ में घिसाया और चूत पर पीछे से सेट करके।मौसी को दीवार को टिकाये धक्का मार दिया।
मौसी:आह अम्मा आह सीईई”
थोड़ी प्रतीक्षा कर उसने घोड़े के माफिक चुदने को चालू किया।चुचे मसल के लाल हो गए थे।
निर्मला ये देख पहले तो जय से गुस्सा हो गयी,पर उसके चूत ने भी पानी बहाना चालू किया था।विकास चाचा तो पहले से ही नही चोदता था,बीच में जय ने भी चोदना छोड़ दिया था।और उसका कारण उसको मालूम हो गया।उसके मन में अंदर घुसने की बात आई पर कुछ सोच के ओ घर चली गयी।
इधर जय जोरो से घोड़ दौड़ कर रहा था।मौसी भी आनंद ले रही थी।
पूरी चुदाई में मौसी दो बार झड़ी पर इसबार जय भी चरण सिमा पे आ गया और उसने लन्ड बाहर निकाल लन्ड को हिलाक़े पूरा माल जमीन पे छोड़ दिया

शालू मौसी ने पेंटी ऊपर की और साड़ी ठीक कर जय को पलंग पे बैठने बोली।
ओ कपड़े सूखा रही थी।
जय:मुझे काम मिला है,कल से जाना है
मौसी:अच्छा है,पर मुझे न भूल जाना
जय:नही मौसी,बस रोज रोज नही आ पाऊंगा
मौसी:हप्ते में 1 2 बार तो आ जाना,जब तक तेरा लन्ड नही चखती,चूत ठंडी ही नही होती
जय:हा मौसी,मेरे लन्ड को भी तेरे चूत की आदत सी हो गयी।
मौसी उसके पास जाके बैठती है और गाल पर किस करती है
जय:चाचा नही चोदते क्या
मौसी:उस रन्डवे को मेरे चुत की क्या पड़ी,उसको तो पैसे कमाने का शौक है,तू है तो अभी उसकी जरूरत नही।
जय:ठीक है मैं आता हु,चाची राह देख रUही होगी।
मौसी से अलविदा लेके जय घर पहुंचा।
इधर निर्मला गुस्से से और चुत की आग से तड़प रही थी।
जय जब घर के अंदर घुसा उसे सन्नाटा से मालूम हुआ।मुन्नी सोई थी।पर चाची नही थी वहां।किचन से भी बर्तन की आवाज नही।
जय किचन कर अंदर गया वैसे पीछे से दरवाजा बन्द हुआ।
जय ने देखा चाची पूरी नंगी किचन में खड़ी थी।
बदन गिला था।गिला बदन। संगमरमरी जैसा चमक रहा था।
जय के रोज दबाने से चुचे भी गोल मटोल हो चुके थे
रोज चुदाई होती थी तो निर्मला चुत की झांट भी साफ करती थी।उस वजह से बदन से गिरती सरकती पानी की लहर चुत के बीच में जा रही थी।
जय का भी लन्ड अभी उछलने लगा।उसने खुद को पूरा नंगा किया।
खड़े लन्ड को देख निर्मला का गुस्सा थोड़ा ठंडा पड़ गया।ओ जय से आके चिपक गयी और उसके पूरे शरीर को चूमने लगी।जय ने उसके सर को पकड़ा और उसके ओंठो को चूमने लगा,उसने उसकी जीभ मुह में लेके चूसना चालू किया।उसने जय को कस के पकड़ा।जय चाची के ओंठ बारि बारी चूस रहा था।दोनो नंगे हवस के पुजारी रसपान करने में मदहोश हो चुके थे।
पीछे से पिछवाड़े को दबाकर उसे करीब खींच लिया।
करीब खींच दबाने से लन्ड चुत पे घिसने लगा।चाची सिहर सी गयी।उसने जय के लन्ड को हाथ से मसलना चालू किया।जय चाची की जीभ को चूस रहा था।
दोनो अपनी हवस में थे तभी किचन का दरवाजा खुल गया।
विलास चाचा था।जय का लन्ड जो आग में डाले लोहे जैसा था ओ सिकुड़ गया।
जय को क्या करू क्या नही कुछ समझ नही आ रहा था।उसने कपड़े पहने और चाचा से नजर न मिलाये ही भाग खड़ा हुआ।
पर चाची न खुदको छुपा रही थी न डर रही थी,पर इस बात पर ध्यान देने जितना समय नही था।ओ बस चाचा के मार से बचना चाहता था।
जय के जाने के बाद विलास ने किचन का दरवाजा बंद किया।
जय बाहर के खिड़की से देख सोच रहा था
“अब चाचा पहले चाची की और बाद में मेरी खबर लेगा,…..”

“नही नही मैं थोड़ी देर बाहर रुकता हु चाचा थोड़ा शांत हो जाए तो पैर पकड़ लूंगा”

जय वहां से निकल जाता है

यहाँ नंगी निर्मला अपनी चुत पर हाथ सैलाती हुई
“क्या जी आप भी कुछ समय नही आपका,अच्छी खासी चुत चुदने वाली थी”
विलास:अरे पर दिन में ये सब,रात में ठीक था।
निर्मला:पर चुत को मेरे रात दिन नही दिखता,बस लन्ड चाहिए उसको
विलास:फिर ठीक है,अभी मेरा ही ले लो।
निर्मला का मन नही था पर वो दीवार पर सट के खड़ी हुई और चूतड़ फैला दिए।
विलास ने पेंट नीचे कर लन्ड निकाल सहलाया और जब खड़ा हुआ तो पीछे से लगा के धक्का मार दिया।जय के लन्ड के मुकाबले विकास का लन्ड छोटा और बहोत कमजोर था।
विकास अपनी पूरी ताकद लगा के चुत चुदने की कोशिश कर रहा था।
निर्मला:छोड़ो न जी,नही होगा आपसे।
विकास बाहर जाके बेड पे बैठ गया।निर्मला ठीकठाक तैयार  होकर काम पे जुट गयी।
शाम के 7 बजे थे।
जय डरता हुआ अंदर आया।विकास के चेहरे पर कोई भाव नही था।
जय पूरी तयारी के साथ आया था।उसने आते ही विकास के पैर पकड़े और माफी मांगने लगा।
विकास हड़बड़ाया उसने उसको पकड़ा उठाया
विकास:अरे हा हा शांत हो जाओ।इसमे इतना बुरा मानने वाली बात नही है।
जय:पर चाचा ये गलत था,मुझे जो चाहे सजा दो पर मा बाबा को मत बोलना प्लीज़।
विकास मुस्कराया
“अरे पगले तेरे वजह से तो मेरा परिवार खुश है।मैं जो मेरी बीवी को सुख न दे सका वो तूने दिया।जिससे घर की मर्यादा भी नही टूटी,तू तो घर का ही है।चाची जितनी मेरी उतनी तेरी।”
दोनो की बाते सुन निर्मला बाहर आयी।
निर्मला:”और जय तूझे तो हमारा सपना पूरा करना है।”
जय:कौन सा???
निर्मला:”मुझे प्यार से नन्हा बेटा दे दे।पूरे जिंदगी भर तेरी और तेरे लन्ड की आभारी रहूंगी।आखरी सास तक तेरे लन्ड की सेवा करूँगी।”
विकास:”और तेरी सजा भी यही है।”
जय थोड़ा आश्चर्य में था,उसे लगा नही था चाचा चाची इतने जल्दी खुल जाएंगे

रात के खाने के बाद,विकास मुन्नी को लेके लगाए बिस्तर बार सुला रहा था।जय भी अपनी जगह पे था।निर्मला अपना काम खत्म कर रही थी।
जय की अइसे ही सोये सोये आंख लग गयी।जब आधी रात उसकी आंख खुली तो बाजू में चाचा मुन्नी के साथ सोया था पर उनके बीच जो सोती थी वो निर्मला नही दिखाई दे रही थी।
तभी जय का पेंट अंडरवेअर के साथ नीचे खींच गया।
नीचे देखा रो निर्मला पूरी नंगी लन्ड पे टूट पड़ी।उसने लन्ड को हिलाकर तना दिया और लन्ड चूसने लगी।लन्ड का तापमान और कठिनता देख ओ खड़ी रही और लन्ड पर आके घुटनो पे बैठ गयी।चुत के छेद पर लन्ड का सुपडे को घिसया और हाथ से जोर देकर छेद पर घुसाया।और नीचे बैठ गयी।
“आह अम्मा आह सीईई मर गयी आह”
उसकी मादक आवाज से जय को बहुत रोमांचीत महसूस हुआ।थोड़ी देर रुकने के बाद वो नीचे ऊपर होने लगी।

“आह राजा चोद दे तेरी रानी को आज तेरी ये रंडी दिलखोल आह आह चु ऊऊऊ देगी आह……”
जय भी मजे लेके गांड उठा के चोद रहा था।
रात भर दोनो बड़े मजे से चुदे।

सुबह 7 बजे
जय की किसी आवाज से आंख खुली।उसने देखा चाची उसके साइड में सोई हुई चाचा का लन्ड चूस रही थी।
चाचा:क्या जय रातभर बहोत पेला चाची को,तुम लोगोंकी चुदाई ने मेरे लन्ड का हाल बेहाल किया।इसलिए थोड़ा.
इतना बोल चाचा हस दिया।
जय का ओ नजारा देख लन्ड खड़ा हो रहा था।उसने चाची के नंगे चुचो को मुह में लेकर चूसना चालू किया ।निप्पल्स को खिंचके चूसने लगा।चाची सिसक गयी।
जय का खड़ा लन्ड चाची के कमर के नीचे घिस रहा था।घिसता हुआ लन्ड चाची को और उत्तेजित कर रहा था।

चाची ने उसका लन्ड मसलना चालू किया चाची के कोमल हाथो के छूने से लन्ड और तन गया।और जय में भी उत्तेजना आ गयी।जय ने और जोर से चुचे चूसना मसलना चालू किया।इतने में चाचा झड़ गया।पर चाची सोई हुई थी तो पूरा माल चद्दर पे गिर गया।चाचा उठ कर बाथरूम गया।

चाची ने करवट बदल के मुह जय के साइड किया और उसका मुह उठा के उसे ओंठ चूमने लगी।उनकी मुह की चुसम चुसाई चालू हो गयी।पर तभी शालू ने बाहर से आवाज दी।दोनो झट से उठ लपेट कर तयार हो गए।
जय ने हाफ शार्ट और खुले बदन में जाकर दरवाजा खोला।
शालू ने जय को देखते ही अपनी आंखे चौड़ी की।
जय ने उसका ध्यान तोड़ते हुए अंदर बुलाया।पर शालू सिर्फ बोली”चाची को बोल 1 ला दिन है।देर मत कर”

शालू जाने के बाद जय अंदर गया।चाची बाथरूम से बाहर आ रही थी।जय उसको देखते रह गया पर चाची ने उसे जल्दी तयार होने बोला।
जय को उसके काम पर छोड़ चाची निकल गयी।
जय अंदर गया वैसे भैया की मा ने रूम में बुलाया।
जय झिझकते हुए अंदर गया।उनका नाम सिमा था।
सिमा:देखो जय आज पहला दिन है तो पहले घर देख लो।कुछ होगा तो मैं बता दूंगी।और जबतक मैं न बुलाऊ तबतक वह खिड़की के पास के जगह पर बैठे रहना।
जय हा बोलके बाहर जा बैठा।

उसदिन और अगले 3 4 दिन उसको कोई काम न बताया गया।बस उसे कुछ समान लाने भेजती थी।पर उस दौरान कोई न कोई लड़का घर आता जाता था।पर जय ने उसपर ज्यादा ध्यान नही दिया।उसे अपने काम से काम रखना था।

पर जब भी जय चाची के बुलाने पे जाता था चाची अधनंगी मिलती थी।जय का रोम रोम उत्तेजित होता पर काम है ये समझ के ओ कंट्रोल कर लेता था।जय अभी सारी परिस्थितियां समझ चुका था।पर उसे कोई और कोई काम नही था तो उसने कुछ बात आगे न बढ़ाई।

उसदिन शाम  को जय घर आया।चाची और चाचा कहि पर जा रहे थे मुन्नी को लेकर।चाची रो रही थी।
चाचा:देख जय चाची के पिताजी गुजर गए है।हम दो दिन के लिए वह जा रहे है।चाची ने अपनी किसी दोस्त को तेरे खाने का बोला है।संभाल लेना।
जय:ठीक है चाचा।कोई नही।बस चाची का खयाल रखना।सम्हाल के जाना
चाचा और चाची के जाने के बाद।जय फ्रेश होक शोर्ट और बनियान में बैठे tv देख रहा था।
तभी डोरबेल बजी।उसने उठके दरवाजा खोला।शालू थी।
ओ अंदर आई वैसे उसने दरवाजा बन्द किया।
जय चौक गया।ओ कुछ बोले उसके पहले ओ बोल पड़ी।
“अरे जय ओ तेरा खाना बनाने को बोली थी,चाची तेरी।
जय ने ठीक है बोला और सोफे पे बैठ tv देखने लगा।
शालू उसको ताड़ते हुए किचन के अंदर घुस गयी।
उसने फटाफट खाना बनाया और बाहर जय को बुलाने आई तो उसने देखा।









कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6


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Struggling वाली चुदाई पार्ट 6

चाची ने सब काम खत्म किया।जय ने सोने की तैयारी पूरी करके अपनी जगह लेट गया था।आज चाचा नही था तो जगह बहुत थी।
चाची ने दरवाजा बंद किया एक धीमी रोशनी वाला बल्ब चालू रख सारि लाइट बंद की।जय छोटी मुन्नी को सुला रहा था।मुन्नी सो गयी ये देख।चाची ने मुन्नी को एक साईड करके सुला दिया।चाची ने जय के सामने ही अपनी साड़ी को उतार दिया।उसके साथ ब्लाउज और पेटीकोट को भी उतार फेंका।
चाची सिर्फ पेंटी में थी क्योकि उसने ब्रा नही पहनी थी या निकाल दी थी।चाची आज मुझे 18 साल की लौंडी लग रही थी।40 के चुचे अभी भी भरे थे।चूत की रेशाये पेंटी के ऊपर से दिख रही थी।चूत कमाल की फूली थी।चुदने के लिए बेकरार थी।
चाची मेरे ऊपर हल्के से सो गयी और मुझे चूमने लगी।
चाची की गर्म सांसे और चूमते कोमल ओंठ मेरे लन्ड को गर्म कर रही थी।
चाची ने जय के होंठ पर हाथ की एक उंगली घुमाई और नॉटी सी हस पड़ी।मुझे वह स्पर्श बहोत अच्छा लगा।
उसने जय के होंठो पे जीभ घूमना चालू किया।जय तो सातवे आसमान में था।
उसने जय के लब्जो को बारी बारी चूसना चालू किया।उसकी मिठास जय को बहुत अच्छी लग रही थी।उसके चुचे मेरे छाती पे दब रहे थे।उसने मेरे जीभ को मुह में ले चूसना चालू किया।करीब 15 से 20 मिनिट ये चुसम चुसाई का कार्यक्रम चालू था।
चाची अपने चुचो को मेरे छाती पे घिसने लगी।उसने मेरी बनयान निकाल फेंकी और चुचो को हाथ में ले कर मेरे मुह पर अपने चुचे दबाने लगी।
एक चुचे को मुह में दिया और जय का एक हाथ दूसरे पे रखे दबाया।उनका इशारा समज कर जय ने चुचे को दबाना चालू किया।
चाची:मेरे जानू निप्पल्स भी चुसले।
जय चाची के दोनो चुचे और निप्पल्स बारी बारी चूस रहा था
चाची ने जय के माथे में चूम फिर नाक,फिर ओंठो पे 5 मीनट लिपलॉक फिर छाती पे चाटने लगी।उसकी जीभ नीचे नीचे जा रही थी।
उसने नीचे नीचे जा कर जय की शॉर्ट और अंडरवियर को एकदम से खींचा,वैसे जय का लन्ड एकदम से आज़ाद हुआ।अभी मैं पूरा नंगा था। तभी जय के लन्ड के पास गर्म से महसुस होने लगा।ओ चाची की वासनाभरी सांसे जय के लन्ड को छू रही थी।
चाची ने लन्ड के सुपडे की चमड़ी नीचे कर दी जय के मुह से”आह”निकल गया।पर उस समय जय को उतना दर्द नही हो रहा था।
चाची लन्ड को धीमे धीमे सहला रही थी।जय का लन्ड ठहाके मार रहा था।
चाची ने सुपडे को चूमा फिर लन्ड के नीचे तक चाटने लगी।
उसने लन्ड को चाट के पूरा गिला कर दिया।
उसने पहले मेरा लन्ड का सूपड़ा मुह में लिया और वही सुपडे का टोप लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।नीचे के अंडो को मसलने लगी।अभी ओ जय का पूरा लन्ड मुह में लेकर अंदर ही लन्ड को रख घुमाने लगी।उसकी चुसाई बहोत ही जड़ रोमांचक कारी थी।
पर बहोत देर से खड़ा लन्ड आखिर कर झड़ने को आया।
जय का लन्ड को अकड़ते हुए महसूस करते ही ओ सब समाज गयी पर ओ हिली नही।बल्कि उसने स्पीड बढ़ाया।
जय पूरा झड़ गया।उसने आधे से ज्यादा गटक लिया।बचा हुआ मेरे लन्ड पे था।
ओ वैसे ही उठी।जय को लगा उनको गुस्सा आया।पर उन्होंने पेंटी निकली।उनकी चूत गीली थी,ओ वैसे ही छूट फैला के नीचे बैठी और लन्ड को थोड़ा हिला के लन्ड के सुपडे को चूत के छेद पर लगाके नीचे बैठ गयी।
“आह उहूऊऊज आउच सी ईईईई”चाची सिसक गयी।
थोड़ी देर अइसे ही निकल गया और चाची फिरसे ऊपर नीचे होना चालू कर दी।
“आह उह आह हहहहहहहह उ हहहहहहहह सी ईईज्ज्ज् चुद गयी आज मेरे यार से आह चोद भड़वे चोद रंडी के बच्चे आज तो तेरा पूरा लन्ड खाऊँगी और तेरे बच्चे की मा बनूँगी,,,,,आह उह आह हहहहहहहह उ हहहहहहहह सी ईईज्ज्ज्
चाची की ये बाते जय को चकित और विचलित कर रही थी।
चाची ने जय हाथ चुचो पर रखे।जय चुचो को दबाना मसलना चालू किया,चुचे इतने बड़े थे तो उसके हाथ में निप्पल आ जाती थी।तो ओ अभी निप्पल्स को खींचने मसलने लगा।
चाची का स्पीड अभी थोड़ा कम हो रहा था ,मतलब चाची थक चुकी थी।तो जय ने उनको नीचे कर खुद ऊपर चढ़ा और लन्ड चूत में सेट कर धक्के पेलने लगा।
चाची:
   “हा मेरा आह राजा बेटा जल्दी सिख गया आह हहहहहहहह आह सीईई छोड़ और जोर के धक्के मार बे मादरचोद लन्ड पूरा अंदर घुसेड आह हहहह सीईई”
   चाची चरमसीमा पर आई थी पर मेरा बाकी था।चाची ने अपना माल झाड़ दिया।जैसे ही ओ झड़ी
   चुदाई करते हुए”पछ फकक ककपच्छ पच्च्छ्” आवाजे आने लगी।
   मैं तो पूरे होश खोके चुद रहा था।झड़ने के बाद चाची बहोत शांत हुई थी।मेरा भी वक्त आ रहा था।मेरा भी लन्ड अकड़ने लगा।मैं उसको बाहर निकालके झड़ने वाला था तभी , चाची ने मेरे गांड को दबाके लन्ड अंदर ही झड़ाओ अयसे इशारा किया।मैंने भी वैसे ही किया।मैं पूरा उसके छूट में झड गया।और थकावट से बाजू में गिर के सो गया।चाची भी काफी थकी की।बहोत दिन बाद दोनो की इतनी दमदार चुदाई थी।दोनो खुश थे ,ज्यादा कर निर्मला चाची।

सुबह 08 बजे

निर्मला आज खुश थी।उसकी मन की इच्छा थी ओ पूरी हो रही थी।कभी विकास आ जाए और उनके योजना की सफलता का जश्न मनाये अयसे उसको लग रहा था।
जय भी आंनद में था,क्योकि उसने किसी की मदत की थी।पर न जाने अनजाने उसे अभी चुदाई की लत लगी थी।
निर्मला ने मुन्नी को तैयार किया और हमेशा की तरह जय उसे छोड़ने गया।जाते वक्त निर्मला को मुझे आने में देरी होगी अयसे बता दिया।निर्मला उसके ऊपर खुश थी तो इसने “किसलिए?”कहके उसने उसको टोका भी नाहि।
जय को उसकी ये खुशी वाले इस पल को नीलू मौसी के साथ बांटना था,क्योकि उसके हिसाब से उसके इस बड़ी मुसीबत में जब वो विचलित था टैब नीलू मौसी के कहने पर उसको ये सन्तुष्टता मिली थी।
जय नर्सरी होम से सीधा समंदर किनारे नीलू मौसी के ठेले पर गया।पर ठेला अभीतक नही खुला था।जय आश्चर्य में पड़ गया।क्योकि 9 बजे तक ठेला शुरू हो जाता था।
ओ बात की गहराई समझने के लिए नीलू मौसी के घर में घुस जो ठीक ठेले के पीछे था।
घर का दरवाजा हलकासा बंद था।दरवाजा धकेल जय अंदर गया।
【नीलू मौसी का घर भी उसके रूम इतना ही था।शुरू होते ही खत्म ,बस फर्क इतना था की जय के चाचा का किचन रूम अलग था।पर नीलू मौसी के कमरे में सिर्फ एक बेड सामने सजा हुआ ओटे वाला किचन।एक कोने में बाथरूम(मोरी जैसा जो आधा कटा और  कपड़ो से बंधा)थी।】
जय को अंदर कोई दिखाई नही दिया।न मौसी न उसका पति।वो जैसे ही पीछे पलटने वाला था।उसे पानी की झिनझिन आवाज सुनाई दी।वो थोड़ा आगे होकर देखा तो बाथरूम में बैठ नहा रही थी।
ओ जय के ठीक सामने बैठी थी।तो उसके मुरझाये बड़े चुचे ,गहरे काले निप्पल्स,उसके नीचे झांटो में पानी से भीगी रसभरी चूत।
अइसा रसभरा नजारा देख जय का लन्ड खड़ा होने लगा।
जय अपने आप पर काबू खोने लग गया था।उसने अपने लन्ड को शॉर्ट के ऊपर से ही सहलाना चालू किया।
यहा नीलू मौसी नहाने में दंग थी।नीलू मौसी अपने चूत में अंदर बाहर उंगली करने लगी।
उसकी मुह से सिसक की आवाज आने लगी।जय अभी काफी गर्म हो चुका था।लन्ड पेंट में अकड़ गया था।अकड़न की वजह से उसको दर्द हो रहा था।कुछ देर वो अयसेही देखता रहा।
अभी उसको वासना सहन नही हुई।उसने बाहर देखा कोई है या नही।दरवाजा धीमे से लॉक किया।उसने अपनी पेंट उतारी।और tशर्ट भी।अभी वो सिर्फ बनियान में था।मौसी का नहाना खत्म से हुआ था।ओ उठी और साइड के टॉवल से खुद को पोंछने लगी।अपनी चूत पर से टॉवल घिसते वक्त वो सहम गयी।पर उसकी नजर अबतक जय पर नही गयी।ओ अपनी ही खेल में गुंग थी।जय ने उसकी इस वासना का फायदा उठाने का सोचा।
ओ धीमे से मौसी के पीछे गया और उसे दबोच लिया।अचानक हुए इस वाकिये से मौसी चिल्लाने वाली थी पर,इसका जय को अंदाजा था।उसने मुह हाथ से दबोच लिया।थोड़ी देर झटपट करने के बाद ओ शांत हुई।जय ने हाथ निकालते  हुए।उसके दोनो चुचो को मसलना चालू किया।मौसी ने पीछे मुड के देखा तो जय था।
नीलू मौसी:जय ये क्या घटिया पन है,छोड़ो मुझे।
जय तो पूरे नशे में था।
जय:कैसा घटिया पन,तुझे तो आज लन्ड का स्वाद दूंगा,तू भी बड़ी रसीली माल है।
मौसी:मैं तेरे मा जैसी हु।अइसा मत कर,गलत होगा।
जय:अरि चाची भी तो माँ जैसी थी।पर तूने तो उससे चुदने की राय दी थी।
मौसी:अरे गलती हो गयी।पर अभी छोड़ दे।मुझे कंट्रोल नही हो रहा।
जय ने एक चुचे की मसलते हुए दूसरा हाथ चुत में डाल
बोला”किसने कहा कंट्रोल करने को,तुभी मजे ले मुझे भी देदे”
जय ने मौसी को अपनी तरफ घुमाया और उसके ओंठो पर ओंठ चिपका दिए।ओ मौसी के रसीले लब्जो का रस पीने लगा।ओ चाची के निप्पल्स खींच रहा था।उसका लन्ड चाची के चूत पर घिस रहा था।घिसते लन्ड से रस भरी चूत वासना में आ गयी।मौसी ने जय का लन्ड पकड़ लिया।और उसको धक्का सा लगा।लन्ड काफी बडा और तना था।चूत वैसे भी गरम थी।और अइसे दमदार लन्ड के अनूभव से मौसी भी अभी जय का साथ देने लगी।उसने भी उसको गर्दन पकड़े खींच लिया।मौसी के रिस्पॉन्स को देख जय भी उत्तेजित होक ओंठ चूसने लगा।
उसने चाची को उठाया और पलंग पे सुलाया।
मौसी पूरी नंगी थी।उसने चाची के पैर साइड कर के चूत में उंगली डाली और अंदर बाहर करने लगा।उसने चूत पर जीभ को रगड़ना चालू किया।
मौसी के “आह आह सीईई आह “के सिसकने की आवाजे घूम रही थी
जय ने ज्यादा टाइम न होने की वजह से मौसी के  पर लन्ड को टिकाया और धक्का दिया
मौसी चिल्लाई:आह आह धीमे से ईईईई,दर्द हो रहा हाईईई,,जय आहिस्ता आह”
थोड़ी देर दर्द के जाने तक जय मौसी के चुचो को चूसने लगा।जैसे ही उसको लगा की मौसी सेट है।ओ आहिस्ता आहिस्ता धक्के देना चालू कर देता है।
थोड़ी देर मौसी को मजा आने लगता है ये देख जय भी स्पीड बढ़ाता है
मौसी:
     “आह आह जय आह चोद दे बेटा खुश करदे तेरी रंडी को भर दे पूरा आह आह आह पूरा लन्डआह आह जय आह चोद देआह आह जय आह चोद देआह आह जय आह चोद देआह आह जय आह सीईई,,,,”
कुछ देर अइसे ही चोदने के बाद
“पच्च्छ्पककपचपच”की आवाजे शुरू हुई।
लगता है मौसी झड गयी।
जय ने भी स्पीड को थोड़ी बढ़ाया।
अभी ओ भी झड़ने वाला था।उसने झड़ने के वक्त लन्ड बाहर निकाला।
तभी मौसी खड़ी हुई और उसका लण्ड मुह में लेके चूसने लगी।
जय ने भी कोई संकोच न करते हुए उसके मुह को चोदने लगा।उसका लन्ड अकड़ा और एक साथ ढेर सारा माल उसके मुह में छोड़ दिया।
जय:क्यो मौसी मजा आया।
मौसी:बहोत,बहोत दिनों की संतुष्टि मिली।और मौसी ने उठ के उसके माथे वे चुम्मा ले लिया।
जय:मौसी मैं आता हु ,चाची राह देख रही होगी।
मौसी:आना जरूर,चाची को ही नही मौसी को भी तेरे लन्ड की जरूरी है अभी।भूल न जाना।
जय हस दिया और कपड़े पहने घर चला गया।

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कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

गरमागरम सेक्स कहानी पढ़िए, खूबसरत कमसिन लड़कियों, हॉट भाभियों और चुदाई की प्यासी आंटियों की स्टोरीज का खजाना
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Struggling वाली चुदाई पार्ट 5

जय हमेशा की तरह जबसे मुम्बई आया था तबसे जब भी घर में ऊब जाता तो चॉल के एक कोने में समुंदर की तरफ एक नीलू मौसी और उसका पति अपना एक चाय का ठेला डाले रखे थे.वहां जाके बैठ जाता उसको ताजी हवा भी मिल जाती और समुंदर किनारे दिल भी बहल जाता.नीलू मौसी की और उसकी अच्छीखासी पहचान हो गयी थी।सर्व गुणसम्पन्न जय को खाना बनाना भी आता था।तो कभी कभी ओ चाची को चाय या पकोड़े बनाने में मदत कर देता था।
उसदिन जय बहोत विचलित था।हरदिन की तरह ओ अपनी जगह आकर बैठ गया।नीलू मौसी के पति ने उसको पुकारा
“क्यों जय कैसे हो,चाय पिओगे”
जय तो कल से जो घटनाये उसके साथ घट रही है उसमे उलझ गया था।

“क्या मैं सही जगह आया हु?कही मैं फस तो नही गया?चाची की मदत करनी चाहिए?चाचा चाचीके मन मे सच मे कोई लोभ नही है संपत्ती का?”इस सवालोंके भूलभुलैया में अचानक किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा

“क्या हुआ बेटा,आज कुछ उदास हो,तबियत ठीक नही क्या?”

जी हा ओ नीलू मौसी थी:”चाची ने कुछ कहा।”
जय :वो वो मौसी बात अइसी है की

जय के चेहरे का पसीना देख बात के गहराई को समझते उसने उसको अंदर ले गयी।

नीलू मौसी:देख जय कोई परेशानी है तो मुझे बता,मैं कुछ कर पा सकू तो,घूंट घूंट के रहने से कुछ नही होगा’
जय ने कुछ सोच कर जो घटना अबतक घटी ओ सब मौसी को बया कर दी।मौसी को उसके भोले पन पे हंसी आ रही थी पर समय हसी मजाक वाला सही था।
उसने जय को कहा”तू मेरी बात मानेगा,अगर हातो मैं तुझे सुजाव दूंगी”

जय:”चाची इस अनजान शहर में एक तुम ही बची हो।कुछ सुजाव कर दो ,सवालो से मेरा सर फट रहा है।”

 मौसी:देख जय,तेरा तेरे माता पिता के सिवाय एक ही है ओ है चाचा और उसका परिवार,तुम अगर अयसेही घर जाओगे तो तुम्हारे पिताजी वैसे भी परेशान होंगे,और निट्ठल्ला बेटा किसको चाहिए,देख जब तक तुम हो तुम्हारे माता पिता सुखी रहेंगे,अगर तुम चाचा का परिवार भी सुखी कर दोगे तो ओ भी खुश तू भी खुश,इन बातो में नुकसान कहा है,चाची बच्चे के लिए बाहर मुह मारे उससे अच्छा,उनका तुम ही सहारा बन जाओ”

 जय मौसी को बहोत मानता था,उनकी बातो है असर हमेशा उसके दिलो दिमाग में होता था।इसबार भी वही हुआ।

 बहुत देर रात हो चुकी थी।जय ने मौसी को अलविदा कहा और घर आ गया
 चाचा आज जल्दी आया था।

 चाचा:अरे जय आ गए।अच्छा हुआ।चलो खाना खा लेते है।

 जय:आज जल्दी?

 चाचा:अरे हा जय,वो मेरा सेठ का फैमिली फंक्शन है लोनावला उधर जा रहा हु।तुम्हे जल्दी नही तो….

 जय:कोई नही 9 तो बज ही गए है,चलो फिर”

 आज सब लोग खाना एकसाथ खा लिए,
 चाचा जाने की तयारी में लगा,चाची उनको छोड़ने गयी,तबतक जय फ्रेश होकर बेड पे बैठा।
 निर्मला ने उसको देखा और मुस्करा के किचन में चली गयी।
 मौसी की बातो के असर के परिणाम स्वरूप जय ने हिम्मत जुटाई और किचन में चला गया।

 चाची धोये बर्तन फैला रही थी,ना जाने क्यो पर आज उसने सारी पहनी थी।उसकी मोटी गांड फूल के दिख रही थी।कमर इतनी मोटी होने के बाद भी लन्ड को बेकाबू करने में काफी थी।उसका ओ मादक नशीला पिछवाड़े का बदन देख कर जय का लन्ड तन गया।ओ धीरे से पीछे जाके चाची को दबोच लिया।
 दबोचते ही तना हुआ जय का लन्ड चाची के भीगे सारी को ठुस्ता हुआ गांड के अंदर सट गया।
 लन्ड के चुभाव और नौजवान के स्पर्श से निर्मला का पूरा रसभरा बदन सहर गया।उसने लाल गुलाबी होंठ दाँतोतले दबा दिए।

 चाची:आज जाके प्यार आ रहा है मेरे पे,कितना तड़पा कर क्या मिला।

 जय:छोड़ो उस बातो को चाची,अभी जो चाहे सेवा करवा लो”।

 जय ने निर्मला को अपनी तरफ घुमाया,वैसे लन्ड भी घिसते हुए चूत के ऊपर तड़फड़ने लगा।

 निर्मला:अरे तेरा लन्ड बहोत प्यासा लग रहा है।लगता है चूत की खुशबू लेनी है उसको।

 जय:हा मुझे भी अयसेही कुछ कुछ महसूस हो रहा है
 रुको उसको थोड़ा शांत कर लू।

 निर्मला घुटनो पे बैठ गयी और शॉर्ट नीचे कर के लन्ड को आझाद कर दिया।जैसे ही शॉर्ट में दबाया हुआ लन्ड आज़ाद हुआ,तो ओ चाची के मुह पर घिस गया।निर्मला ने उसको ऊपर से नीचे तक सहलाया।थोड़ा हिलाया जिससे ओ थोड़ा तन जाए।उसने जैसे ही लन्ड के टोपे की चमड़ी नीचे खींची जय चिल्लाया”आह चाची*****”
 निर्मला ने झट से उसके लन्ड के टोपे को अपने कोमल ओंठो से ढक दिया।
 जय ने राहत की सांस छोड़ी।उसको मजा आने लगा।
 चाची ने भी वही सिलसिला जारी रखा।उसने उसके टोपे को मुह में रख लन्ड की मुथ मारनी चालू की।ओ लन्ड को टोपे से लेकर अंडो तक चाटनी लगी।उसका पूरा लन्ड मुह में लेकर मजे लेने लगी।
 कुछ देर के इस सिलसिले के बाद जय झड़नेवाला था,उसने चाची निर्मला से कहा भी,पर नए लन्ड की मिलन की खुशी में ओ सब भूल गयी 

 जय थोड़ा अकड़ा और उसके मुह में झड़ दिया।
 “सॉरी चाची”जय।
 को बात नही जय।तुम सोने की तयारी करो”निर्मला।
 जय शॉर्ट सीधा कर बाहर गया।
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सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

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Struggling वाली चुदाई पार्ट 4

जगह कम थी और निर्मला चाची जय से सटके सोई थी।जिस चुचो को जय दूर से देख रहा था ओ अभी उसके एकदम नजर के सामने थे।ओ अपने हाथो को सिर के नीचे रख सोने की कोशिश करने लगा।पर नसीब तो आज निर्मला के साथ था।कम जगह की वजह से मूडी हुई कलाही की कोई निर्मला के चुचो को घिस रही थी।निर्मला सहर गयी।चुचे इतने बड़े और कोमल थे की अपनी कोहनी चुचो को लग रही है इसका जय को ध्यान नही आया।कुछ पल के बाद निर्मला ने खुद ही अपने आप को हिलाते हुए चुचे उसके कलाही की कोहनी पर घिसना चालू किये।इस हरकत के नतीजे जय का लन्ड तन के उछलने लगा।निर्मला तो हवस से भरी थी,बस आनंद ले रही थी।निर्मला जयके से और सटके सो गयी।जय का लन्ड उसके चूतके ऊपरी हिस्से पर घिसने लगा।जय आंख बन्द कर खुद को काबू करने लगा।उसने अपने हाथो को सीधा कर लिया।पर ओ दोनो इतने करीब थे की अभी कोई भी अपने काबू में नही था।निर्मला की गर्म सांसे जय को बेहाल कर रही थी।
जय का चेहरा पूरा लाल हो चुका था।
निर्मला ने इस मौके का फायदा उठाते हुए।उसके शॉर्ट में हाथ डाल लन्ड को पकड़ लिया।अचानक हुई इस हरकत से जय ने फट से आंखे खोल दी
जय:”चाची***”
जय कुछ बोल पाता उससे पहले उसने उसकी मुह पर हाथ दबा कर शांत रहने का इशारा किया।जय भी उस समय बेबस हो गया था।चाची ने उसकी शॉर्ट पैरो से नीचे दबाके उसके लन्ड को पूरा आज़ाद कर दिया।
निर्मला उसके लन्ड को सहलाये जा रही थी।टोपे से नीचे तक उसको हिला रही थी।उसने उसका एक हाथ अपने चुचो पे दबा दिया।निर्मला के लन्ड हिलाने से जय को थोड़ा सुकून मिला।ओ मजे लेने लगा।हवस के चलते और लन्ड के बहोत ज्यादा तन जाने से उसे बीच में दर्द होता था।जब भी निर्मला उसके लन्ड पर जोर देकर हिलाती तब जय मदहोशी में चाची के चुचे दबा देता।पर ये सिलसिला जड़ देर नही टिका।कुछ पल भर में जय ने चाची के नाइटी पर अपना सारा माल झड़ा दिया।चाची ने उसी नाइटी से उसका लन्ड पोंछ कर उसकी शॉर्ट सीधी कर दी।
दोनो भी अभी शांत होकर सो गए।
सुबह के वक्त जय चाचा के बेटी को नर्सरी छोड़ने चला गया।चाची चाचा दोनो काम पे जाएंगे इस की वजह से ओ एक जो एक्स्ट्रा चावी थी वो भी ले गया।नर्सरी से लौटने के बाद उसने देखा की दरवाजा खुला है।उसने चप्पल रखने की जगह चाची का चप्पल देखा।मतलब चाची काम पे नही गयी थी।
जय बाथरूम में हाथ पाव धोके पानी पीने गया तो।किचन से आवाज आई।
“जय नाश्ता लगा दु क्या बेटा??”
जय: हा ठीक है
निर्मला चाय और नास्ता लेके बाहर आई वही अपने सलवार कमीज में।किचन के काम करते वक्त ओ पसीने से भीग चुकी थी।जिसके परिणाम उसके बड़े चुचे जो आधे बाहर थे उन्होंने हवस भरा आकार लेके रखा था।चुचो के ऊपर नोकदार निप्पल का भी दीदार हो रहा था।इस अवस्था में चाची को देख जय को रात के ओ हवस के पल याद आ गए।चाची ने उसके मन में चल रहे विचारो को समझ लिया।
रात में जो हुआ उससे ओ तो बहोत खुश और उत्साहित थी पर जब जय को कल रात के घटना के बाद भी निर्भयता से देखते हुआ पा कर उसका जिगरा ठंडी सांसे लेने लगा।

कल तक जो जय को आकर्षित करने के योजना के विचार से परेशान थी उसको आज पूरा सुकून सा फील हो रहा था
पर यहां पर जय विचलित था,उसे कलरात हुई घटना पर अपराधी सा महसूस हो रहा था।
चाची अपने अंदाज में हसते मुस्कराते हुए,उसके सामने इस तरह बैठी की आधे से ज्यादा चुचे जय को दिख जाए।अइसी नशीली औरत के चुचे देख किसका भी लन्ड फूत्कार मार देगा,वही हाल जय का भी हुआ।उसे इस बात का अहसास होते ही उसने लन्ड को दबाने की कोशिश की।उसकी इस कोशिश को देख निर्मला फुले नही समा रही थी।पर उसे मजे लेने थे,ओ अइसा बर्ताव कर रही थी मानो जैसे उसे कुछ दिख ही नही रहा हो।
जय कामना के आगोश में थर थर कांप रहा था।निर्मला ने उसके सामने चाय करदी।जय ने थरकते कांपते हांथो से चाय का कप उठाया और मुह में लगाने लगा पर उसका ध्यान अभी भी चाची की उस मोटी चूचो पे था।इस का नतीजा ये हुआ की चाय गर्म थी और ओंठो पर लगाते ही उसके ओंठ पर जलन महसूस हुई और उसने कप छोड़ दी।अब हुआ यू की शॉर्ट तो भीगी ही पर उसका लन्ड भी उस गरमाहट का शिकार बना।
ओ एकदम से चिल्लाया “चाची चाची,जल गया आह दर्द हो रहा है”
दोनो जो हवस में डूबेथे थोड़ी ही देर में होश में आ गए।
चाची ने कुछ आव देखा न ताव झटसे अंदर से गिला कपड़ा ले आई और उसके शार्ट के ऊपर से पोंछने लगी।जब उसने पूरे शार्ट पर दबाके कपड़ा फेरा,उस के वजह से शॉर्टऔर गीली हो गयी।पहले ही नशीले बदन की आंखमिचोली से लन्ड गरम होकर तन रहा था,उसी वक्त उस नशीली औरत के कोमल हाथो का स्पर्श होते ही उसका लन्ड लोहे सा तन गया।
दोनो को इसबात का महसूस हुआ तो।दोनो ने एक दूसरे के आंखों में देखा और कुछ पल एके दूसरे को अइसे ही ताकते रहे।दोनो की आंखे एक दूसरे को भीड़ चुकी थी।पंखे की ह ने भी ठंडे हवाओ का रुख उनकी तरफ कर दिया।
जाने या अनजाने में दोनो करीब आने लगे।दोनो की सांसे अभी उस ठंडे हवाओ में गरमाहटपैदा कर रही थी।ओ चुभती गर्म सासे दोनो में और चुदास भे रही थी।
एक ही पल में दोनो के ओंठ एक दूसरे से भीड़ गए।दोनो ने आंखे बन्द कर दी और एकदूसरे के ओंठो का रसपान करने लगे।जय गांव में रहा था पर उसे चुदाई का पूरा ज्ञान था।निर्मला मुम्बई शहर की मचलती रसीली आंटी थी।दोनो का मिलन जैसे आंखों और दिल को लुभाने वाला था।
निर्मला ने जय को अपने बाहो में खींच लिया।खुद पीठ पे सो कर उसे अपने बाहो में कस के दबाये उसके ओंठो को चूसे जा रही थी।
उनकी हवस आगे बढ़े इससे पहले बाहर से किसीने आवाज दी
“पोस्टमैन”
दोनो अलग हुई।चाची ने बेडपे रखी टॉवल को शरीर पे ओढ़ के दरवाजे पर चली गयी,हवस में उनको दरवाजा खुला होने का ध्यान न रहा।
जय उठा जाकर फ्रेश होकर शॉर्ट बदली और बाहर बेड पे आकर बैठ गया।
दोपहर का कहना हुआ।पर तबतक दोनो सिर्फ आँखों से ही बाते कर कहे थे ,दोनो में से एके के भी मुह से शब्द नही निकल रहा था।
आखिर कर इस चुप्पी को तोड़ते हुए जय निर्मला से बोला
“चाची ये सही नही है”
निर्मला:”क्या?”
जय:”चाची ये कल रात से जो हो रहा है ओ।मैं चाचा को धोखा नही दे सकता”
निर्मला:मत दो धोखा,मैंने कब कहा धोखा देने को
जय:पर जो हो रहा है ओ तो*****!!?!
जय के बातो को काट के:उसका कुछ नही होता,वैसे भी तू तो घर का ही लड़का है,और उसमे बुरी बात क्या है,मैं भी खुश तू भी खुश
जय:और चाचा?
निर्मला:तू चाचा की जरूरत से ज्यादा चिंता कर रहा है,अगर दिल से उसे खुश देखने की दिल की तम्मना है तो एक जरिया है।
जय:क्या?
निर्मला:देख तेरे चाचा से अभी चुदाई नही होती(चुदाई शब्द सुनते है जय की आँख कान चौड़े होते है),चौक मत सही कह रही हु,फिर भी ओ एक बेटा चाहते है,मैं अभी मोटी हो गयी हु,अगर तू मेरे साथ सबंन्ध बना लेता है तो होने वाले बच्चे से सारा घर आनंद से भर जायेगा।
निर्मला के आंखों में नमी सी आ गयी।
जय को उस दीं की बाते याद आ गयी।ओ थोड़ा कशमकश में पड़ गया।
जय कुछ न बोले घर से बाहर निकल गया।उसकी जाती परछाही को निर्मला ताकती रह गयी।.
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सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
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ऑफिस बॉय से कॉल बॉय तक पार्ट 2

मैं हमेशा की तरह सुबह आफिस चला गया।आज शनिवार था।दूसरे दिन संडे होने के कारण काम ज्यादा रहता था।शाम को जब काम खत्म हुआ,तो मुझे मेरे भाई का msg दिखा
“मैं 5 दिन के लिए आउट ऑफ मुम्बई हु,ध्यान रखना,bye”
कल संडे था,मैं अकेला क्या करूँगा इस छूटी में।भाईथा तब घूमते थे।इस बार का प्लान बनाने ही वाला था उसके पहले ही श्यामजी शाह का msg
“कल छुटी है तो कुछ प्लान नही होगा तो आज शाम आ जाना”
उसके msg के साथ लोकेशन भी था।
मैंने सोचा ये अचानक नियोता।थोड़ी अजीब सा महसूस हुआ।उसदिन की चैट बाद में पहले दिन वाला ओ सीन मुझे याद आ गया।पर फिर भी मैन मन से समजोता किया”तू कुछ भी मत सोच,अच्छे लोग है,दोस्ती बढ़ाने के लिए किया प्रयास होगा उनका”
मुझे वैसे भी कुछ काम नही था।तो मैं अपनी बैग ऑफिस में रख कर मैं उस लोकेशन पे पहोंच गया।लोकेशन मुम्बई का उच्च दर्जे वाले लोगो की रहनी वाली जगह थी।ओ एक अपार्टमेंट्स की लाइन थी जिसके लास्टके बिल्डिंग के टॉप के फ्लोर पे जाना था।मैं लिफ्ट से ऊपर गया।वहाँपर एक फ्लोर मतलब एक घर था,मतलब पूरा फ्लोर उनका था।
मैंने बेल बजाई।2 मिनटके बाद दरवाजा खुला,30 साल की एक औरतने दरवाजा खोला
ओ:कोन?
मैं:ओ श्यामजी सर ने बुलाया था।
ओ:क्या नाम है आपका?
मैं:विजय 
ओ:अच्छा तो आप हो
तभी अंदर से आवाज आई
“कौन है सीमा”
ओ मतलब सिमा:वो आपके विजय जी आये है मेमसाब
और ओ मेरे तरफ नशीली नजर डालके ओंठो में हसके अंदर चली गयी।
अच्छा तो ये नौकरानी थी।मैने दरवाजा बन्द करके।घर देखने लगा।
बड़ा हॉल,एक साइडमें किचन और मन्दिर 
दूसरे साइड में दो बेडरूम और सामने एक बेडरूम
घर तो शानदार था।
उधर कुछ फैमिली फोटो थी caption के साथ
फोटो के हिसाब से इनका एक ही बेटा था ओ भी शादी शुदा,आंटी की माँ और एक और लेडी थी पर उसका कोई रिश्ता उधर नही लिखा था।
तभी अंकल बाहर आ गए
“अरे विजय कब आये”
अंकल सिर्फ टॉवल में थे,पर सिर गिला नही था।
मतलब नहा के तो नही आये थे।और बर्ताव से ओ नहाने जा रहे है अयसे भी नही लग रहा था।ओ बात मुझे खटकी।
और उस खटकी बात को साबित करने के लिए।आंटी भी नाइटी में बाहर आ गयी।40 साल की भरे हुए दमदार शरीर वाली औरत ,क्या खूब दिख रही थी।
उन दोनो को इस हालत में देख मैं बात को समझ गया,पर मुझसे यहां उनका क्या काम अगर दोनो इतने बिजी है तो।
श्यामजी:अरे विजय थैंक्स,तुम आ गए,मुझे लगा तुम नही आओगे।
मै:बस क्या सर,आपने बुलाया है तो आना ही पड़ा,पर अइसे अचानक?!?!
विणा चाची:अरे बाते होते रहेंगी।तुम बैठो,अरे सिमा चाय लाओ।
हम सब सोफे पे बैठ जाते है।सिंगल सोफे पे चाचा बैठ जाते है और बड़े सोफे पे मैं और विणा चाची।विणा मेरे से थोड़ा सटके के बैठी थी।उनकी उम्र और सर का ख्याल करके मैं थोड़ा खुदको संभाल रहा था।
मैं:बोलो न सर,कोई जरूरी काम बंदे से
श्यामजी थोड़े झिझक रहे थे,पेपर विणा उनको आंखों ही आंखों में जोर देके बात करने को उकसा रही थी।
उतने में सिमा चाय लेके आई।
सिमा:मेमसाब और कुछ काम
विणा:कुछ नही तुम जाओ।कल 11 बजे तक आ जाना।
सीमा के जाने के बाद
श्यामजी:देख विजय,तुम मेरे बड़े भरोसे वाले आदमी हो,और तुम हम लोगो से भी बहुत कुछ वाकिफ हो।और बात यू है की,अभी हमारे बीच मतलब मैं और विणा के बीच थोड़े तनाव पूर्ण स्तिथि चल रही है।
मैं:मतलब
श्यामजी:तुम मेरी हालत तो देख ही रहे हो,इस समय शारीरिक संबंध रखना मुझे नही होगा तेरे मैडम के साथ,तो क्या तुम हमारी मदत करोगे?
मैं:पर सर ये मुमकिन है सही में
विणा:क्यो नही,इस घर में हम दोनो के सिवाय कोई नही है,और तुम अभी पराये भी नही हो,प्लीज इतनी हेल्प कर दो।
में सोचूंगा उसके पहले ही चाची ने मेरे जांग पे हाथ रख सहलाने लगी।एक नाइटी में खुशबू वाला स्प्रे मार्के 40 से45 उम्र की रसीली औरत जांग सहला रही हो तो लन्ड तो तनेगा।जैसे ही मेरा तना हुआ लन्ड विणा ने देखा।
विणा:देख विजय तेरा 5 इंच का लन्ड भी तैयार हो गया अभी तू भी चढ़ जा
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही उसने मुझको धक्का देके सोफे पर टिकाया
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गरमागरम सेक्स कहानी पढ़िए, खूबसरत कमसिन लड़कियों, हॉट भाभियों और चुदाई की प्यासी आंटियों की स्टोरीज का खजाना
Sexy Kahani padhen Chut chudai ki aur gaand marne ki. Ye sabhi kahaniya hame hamare lekhak mitro se mili he. Wo apni chudai ke anubhaw aap ko batayenge. Aap lund chusne ke anubhaw, chut me lund kaise dalte he aur gaand kaise marte he wo sab aap ko detail me aur mazedar wiwran ke sath batayenge.


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