ऑफिस बॉय से कॉल बॉय तक पार्ट 2

मैं हमेशा की तरह सुबह आफिस चला गया।आज शनिवार था।दूसरे दिन संडे होने के कारण काम ज्यादा रहता था।शाम को जब काम खत्म हुआ,तो मुझे मेरे भाई का msg दिखा
“मैं 5 दिन के लिए आउट ऑफ मुम्बई हु,ध्यान रखना,bye”
कल संडे था,मैं अकेला क्या करूँगा इस छूटी में।भाईथा तब घूमते थे।इस बार का प्लान बनाने ही वाला था उसके पहले ही श्यामजी शाह का msg
“कल छुटी है तो कुछ प्लान नही होगा तो आज शाम आ जाना”
उसके msg के साथ लोकेशन भी था।
मैंने सोचा ये अचानक नियोता।थोड़ी अजीब सा महसूस हुआ।उसदिन की चैट बाद में पहले दिन वाला ओ सीन मुझे याद आ गया।पर फिर भी मैन मन से समजोता किया”तू कुछ भी मत सोच,अच्छे लोग है,दोस्ती बढ़ाने के लिए किया प्रयास होगा उनका”
मुझे वैसे भी कुछ काम नही था।तो मैं अपनी बैग ऑफिस में रख कर मैं उस लोकेशन पे पहोंच गया।लोकेशन मुम्बई का उच्च दर्जे वाले लोगो की रहनी वाली जगह थी।ओ एक अपार्टमेंट्स की लाइन थी जिसके लास्टके बिल्डिंग के टॉप के फ्लोर पे जाना था।मैं लिफ्ट से ऊपर गया।वहाँपर एक फ्लोर मतलब एक घर था,मतलब पूरा फ्लोर उनका था।
मैंने बेल बजाई।2 मिनटके बाद दरवाजा खुला,30 साल की एक औरतने दरवाजा खोला
ओ:कोन?
मैं:ओ श्यामजी सर ने बुलाया था।
ओ:क्या नाम है आपका?
मैं:विजय 
ओ:अच्छा तो आप हो
तभी अंदर से आवाज आई
“कौन है सीमा”
ओ मतलब सिमा:वो आपके विजय जी आये है मेमसाब
और ओ मेरे तरफ नशीली नजर डालके ओंठो में हसके अंदर चली गयी।
अच्छा तो ये नौकरानी थी।मैने दरवाजा बन्द करके।घर देखने लगा।
बड़ा हॉल,एक साइडमें किचन और मन्दिर 
दूसरे साइड में दो बेडरूम और सामने एक बेडरूम
घर तो शानदार था।
उधर कुछ फैमिली फोटो थी caption के साथ
फोटो के हिसाब से इनका एक ही बेटा था ओ भी शादी शुदा,आंटी की माँ और एक और लेडी थी पर उसका कोई रिश्ता उधर नही लिखा था।
तभी अंकल बाहर आ गए
“अरे विजय कब आये”
अंकल सिर्फ टॉवल में थे,पर सिर गिला नही था।
मतलब नहा के तो नही आये थे।और बर्ताव से ओ नहाने जा रहे है अयसे भी नही लग रहा था।ओ बात मुझे खटकी।
और उस खटकी बात को साबित करने के लिए।आंटी भी नाइटी में बाहर आ गयी।40 साल की भरे हुए दमदार शरीर वाली औरत ,क्या खूब दिख रही थी।
उन दोनो को इस हालत में देख मैं बात को समझ गया,पर मुझसे यहां उनका क्या काम अगर दोनो इतने बिजी है तो।
श्यामजी:अरे विजय थैंक्स,तुम आ गए,मुझे लगा तुम नही आओगे।
मै:बस क्या सर,आपने बुलाया है तो आना ही पड़ा,पर अइसे अचानक?!?!
विणा चाची:अरे बाते होते रहेंगी।तुम बैठो,अरे सिमा चाय लाओ।
हम सब सोफे पे बैठ जाते है।सिंगल सोफे पे चाचा बैठ जाते है और बड़े सोफे पे मैं और विणा चाची।विणा मेरे से थोड़ा सटके के बैठी थी।उनकी उम्र और सर का ख्याल करके मैं थोड़ा खुदको संभाल रहा था।
मैं:बोलो न सर,कोई जरूरी काम बंदे से
श्यामजी थोड़े झिझक रहे थे,पेपर विणा उनको आंखों ही आंखों में जोर देके बात करने को उकसा रही थी।
उतने में सिमा चाय लेके आई।
सिमा:मेमसाब और कुछ काम
विणा:कुछ नही तुम जाओ।कल 11 बजे तक आ जाना।
सीमा के जाने के बाद
श्यामजी:देख विजय,तुम मेरे बड़े भरोसे वाले आदमी हो,और तुम हम लोगो से भी बहुत कुछ वाकिफ हो।और बात यू है की,अभी हमारे बीच मतलब मैं और विणा के बीच थोड़े तनाव पूर्ण स्तिथि चल रही है।
मैं:मतलब
श्यामजी:तुम मेरी हालत तो देख ही रहे हो,इस समय शारीरिक संबंध रखना मुझे नही होगा तेरे मैडम के साथ,तो क्या तुम हमारी मदत करोगे?
मैं:पर सर ये मुमकिन है सही में
विणा:क्यो नही,इस घर में हम दोनो के सिवाय कोई नही है,और तुम अभी पराये भी नही हो,प्लीज इतनी हेल्प कर दो।
में सोचूंगा उसके पहले ही चाची ने मेरे जांग पे हाथ रख सहलाने लगी।एक नाइटी में खुशबू वाला स्प्रे मार्के 40 से45 उम्र की रसीली औरत जांग सहला रही हो तो लन्ड तो तनेगा।जैसे ही मेरा तना हुआ लन्ड विणा ने देखा।
विणा:देख विजय तेरा 5 इंच का लन्ड भी तैयार हो गया अभी तू भी चढ़ जा
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही उसने मुझको धक्का देके सोफे पर टिकाया
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कहानी जारी रहेगी………..……

गरमागरम सेक्स कहानी पढ़िए, खूबसरत कमसिन लड़कियों, हॉट भाभियों और चुदाई की प्यासी आंटियों की स्टोरीज का खजाना
Sexy Kahani padhen Chut chudai ki aur gaand marne ki. Ye sabhi kahaniya hame hamare lekhak mitro se mili he. Wo apni chudai ke anubhaw aap ko batayenge. Aap lund chusne ke anubhaw, chut me lund kaise dalte he aur gaand kaise marte he wo sab aap ko detail me aur mazedar wiwran ke sath batayenge.


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ऑफिस बॉय से कॉल बॉय तक पार्ट 1

नमस्ते सब रिडर्स और विव्हर्स को,ये कहाणी जो मैं पेश करने जा रहा हु आ थोड़ी मेरे जीवन से मेल खा रही है चालू स्तिथि में,बस उसकी भविष्य की कल्पना कर ये कहानी आपके सामने ला रहा हु आशा करता हु आपको बेहद पसंद आएगी।इस कहानी में मेरा नाम विजय है।तो चलो कहानी शुरू करे।
सुबह का टाइम मैंने ऑफिस खोला क्योकि सहयोगी छुट्टी पे था तो काम मेरे माथे आया था।
आज गुरुवार था तो कोई आने वाला नही था ग्राहक ऑफिस में।मैं चुपचाप अपना desibees.com और desibees.in का एकाउंट खोले बैठा था।कहानी ,फ़ोटो वीडियो देख मेरा लण्ड पेंट में तन गया था।फॉर्मल होने से ओ सपष्ट रूप से दिख भी रहा था।तभी अचानक एक चाचा अंदर आये।ये सर्विस सेंटर था तो मैंने उनका स्माइल करके स्वागत किया।पर उनके अचानक आने से मैं खड़ा हुआ था और लण्ड की अकड़न से मैं थोड़ा झुका खड़ा रहा।मेरा मुह लाल था।
चाचा मेरे काफी पहचान के थे।पुराने ग्राहक थे तो थोड़े फ्रैंक थे मेरे से।सोशल मीडिया से भी कनेक्टेड थे।बड़े रहिज खानदान के थे तो खड़े रहके इज्जत देनी थी।
उनका नाम श्यामजी शाह,40 से 45 की उम्र पर काफी नही ज्यादा मोटापा था।जैसे ही आये उन्होंने हांपना चालू किया।पर उनका ध्यान मेरी पेंट के उठाव पे था।
ऑफिस टाइम में गंदी हरकते करते हुए पकड़ा गया था।ओ कहि ऊपर के अधिकारी ओ को शिकायत न करदे इसलिए मैंने सिचुएशन संभालनी चालू की।
मैं:सर क्यो इतना चलके आते हो।मालूम है घर पास है,पर यह लिफ्ट नही है।कुछ होगा तो बुला लो,मेरा नंबर भी है आपके पास
ओ:अरे नही,बस घर पर बैठे कुछ नही था तो आ गया।
मैं:अच्छा,चाय ठंडा कुछ मंगा लू।
ओ मेरी पेंट को देख:नही तुम अपना काम चालू रखो।
उनकी नजर और बात दोनों मुझे चुभ सी गयी।खतरे की घण्टी मेरे दिल को हवा दे गई।
ओ दिन कैसे वैसे गया।
दो दिन जाने के बाद उन्होंने मुझे रात को मैसेज किया।
ओ:हाई विजय सो गए क्या
मैं:नही,अभी सिर्फ कहना खत्म किया,आप बोलो इतनी रात याद किया।
ओ:ओ कुछ नही,चाची पूछ रही थी दिनभर कहा रहते हो,किसके साथ,,,,,
मैने हसने वाला इमोजी भेजा
मैं:उनको बोलो शक न करे ,हमारे सर पत्नीव्रता है(फिरसे हसने वाला इमोजी)
अंकल भी हसने लगे(इमोजी में)
मैने उनको गुड नाईट बोला और सो गया।
दूसरे दिन ओ चाची को लेकर मेरे ऑफिस आये।
मैं थोड़ा फ़ोन पे व्यस्त था।उन दोनों को इशारे में बैठने बोला।अंकल के लिए नया नही था तो उन्होंने चाची को बैठने का इशारा समझा दिया।
अंकल आंटी दोनों मुझे घूर रहे थे और एक दूसरे को देख स्माइल कर रहे थे।मैंने कॉल खत्म कर उनसे बात करना चालू किया।
मैं:क्यो सर,क्या हुआ अचानक यहां,झगड़ा वैगरा कुछ…….
मेरी बात को तोड़ते हुए आंटी बोली
आंटी:अइसा कुछ नही बेटा,जब भी ये यह से घर आते है खुश होते है।मैं बोली देखु तो सही मेरी सौतन कोन है।
मैं:अइसा कुछ नही मेडम बस पुरानी पहचान है,थोड़ा मस्ती मजाक करते है बस।
आंटी:बस मस्ती मजाक,तो ठीक है
इस बात पर दोनों हस पड़े।मैं तो सिर्फ मुह ताकता रहा।
आंटी:वैसे कहा रहते हो?शादी???
मैं:अरे शादी अभी कहा ,21 का तो हु,यही ^^^^^^में रहता हूं।
आंटी:मतलब gf तो होगी न?
मैं थोड़ा uncomfortable होने लगा।मैंने गर्दन से ही ना में जवाब दिया।
आंटी:खाना खाया क्या?घर पे कौन है?
मैं:घर पे मा भाई मैं बस, खाना अभी ऑर्डर करूँगा।
आंटी:क्यो मा नही देती खाना।
मैं:नही ओ गांव में गयी है।
तभी मुझे कॉल आया मैं उसमे लग गया
उन्होंने मुझे व्यस्त देख स्माइल दी और इशारो में अलविदा कहा।
मैं जब काम खत्म करके घर जा रहा था तब दिन भर की ओ बाते याद कर रहा था।अंकल की स्माइल कुछ अलग लगी थी ।
रात को बाहर ख़ाना खाया।भाई कुछ काम से 4 दिन बाहर था।तो मैं अकेला था।
रात के करीब 10 बजे
मुझे UNKNOWN नंबर से मेसेज आया
“हाई विनय विणा हिअर”
मैने Dp ओपन किया तो ओ सुबह वाली चाची थी
“विणा श्यामजी शाह”
दिखने में 40 साल की थी 36 34 36 का शरीर थोड़ा मोटापा था।
मैं:जी मेडम कहिये।
आंटी:पहले तो ये मेडम मत कहो प्लीज।
मैं:ओके आंटी
आंटी:ये आंटी भी क्यो,विणा कहो।
मैं चकरा गया आंटी कुछ ज्यादा ही फैल रही है।
मैं:सर बुरा मानेंगे तो।
विणा:मेसेज और अकेले में बोल रही हु,उनके सामने जो है वही बोलो।
मैं:ठीक जैसे आप कहे,गरीब को याद किया।
विणा:अरे नींद नही आ रही थी।
मैं:क्यो,क्या हुआ,तबियत बिगड़ गयी क्या?
विणा:नही रे पागल,मन थोड़ा मचल रहा है,नींद ही नही आ रही।
मैं:अंकल को बोलो ओ कुछ कर देंगे।
विणा:वो क्या करेंगे(नॉटी वाला इमोजी)
मैं:मेरा मतलब है गोली दे देंगे नींद की,सर दबा देंगे,आराम मिलेगा तो नींद आ जायेगी।
विणा:वो,वो कुछ करते ही नही,तुम कुछ मदत कर दो।
मैं:क्या??
विणा:चैटिंग करो,जबतक नींद नही आती।
मैं:ठीक है।
विणा:फिर शादी कब कर रहे हो तुम,कोई देखी या नही?
मैं:उसको टाइम है,कुछ सोचा नही अबतक,।
विणा:मतलब वरजिन हो न।
मैं:शॉक में:क्या?????
विणा:सही सुना,अभीतक किसी औरत को नही छुआ होगा?
मैं:नही वैसे कभी चांस नही मिला।
विणा:तुम कहानी अच्छे लिखते हो।पढ़ी मैने।
मैं थोड़ा कंफ्यूज हुआ।इनको मेरी स्टोरी कहा से मिली।सोच में इतना टाइम गया कि आंटी का सामने से मेसेज
आंटी:ज्यादा मत सोच उसदिन अंकल ने तेरी ओ देसीबीज की एकाउंट देखी।और घर आके मुझे पढ़वाई।मुझे पसंद आई।तो मैंने सोचा तुमसे मिल लिया जाए।तो मिलने आये थे।
मैं:ओ तो अइसे ही fantacy बस।
विणा:अरे डरो मत।अच्छा कोशिश है।पर सिर्फ काल्पनिक या असली में भी करनी है चुदाई
मैं चुदाई शब्द पढ़ के शॉक हो गया।
तभी आगे से दूसरा मेसेज
“कितने साइज का है वैसे”
मैं:आंटी ये गलत है,अंकल को पता चलेगा तो वो बुरा मानेगे।मेरी नोकरी खतरे में पड़ जाएगी।
विणा:तू क्यों टेंशन ले रहा है।उनको सब पता है।नंबर उन्होंने तो दिया न।
मैं सोच के।
मैं:करीब 4 का होगा कभी गिना नही।
विणा:अच्छा तो फ़ोटो भेज मैं गिनती हु।
मैं:क्या??
विणा:तू फ़ोटो भेज।
मैने थोड़ी देर पोर्न देख लण्ड हिलाया और फ़ोटो डाल दिया।
आगे जो हुआ ओ मेरे सोच समझ के बाहर था।
आंटी ने सामने से किसिंग इमोजी भेजा।मैं तो दंग ही राह गया।
आंटी:क्या मस्त लण्ड है रे तेरा।बेचारा अभी भी वरजिन है।
मैं थोड़ा नर्वस हो गया।वो सिचुएशन मुझसे संभाली नही जा रही थी।
मै:गुड नाईट आंटी कल बात करते है।ऑफिस भी जाना है।
आंटी :ओके गुड नाईट
मैं सो गया ।ओ चैटिंग मेरे दिमाग मे रातभर घूम रही थी।

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Struggling वाली चुदाई पार्ट 3

विकास:क्यो जय,मन लग गया लगता है तुम्हारा,

जय:हा चाचा,अच्छी जगह है,बहोत पसंद आई मुझे

विकास:चाची बहोत प्यार से खयाल रख रही है तेरा,अभी तक मेरा भी नही रखा इतना

जय:अयसे कुछ बात नही है चाचा ओ सबका ख्याल रखती है,

विकास:अरे वा बहोत प्यार आ रहा है चाची पे
तभी निर्मला बाहर आकर जय के पास उसके गाल खींचते हुए बोलती है
“है ही लाडला भतीजा मेरा,मैं प्यार करू या शादी करू आपसे क्या।”यह बोलते बोलते वह उसको पीछे से उसको बाहो में लेके अपने सीने पर दबाती है।उसका मुह चाची के सलवार के उपर से उसके दुधभरे मोटे चुचो को घिसता है।चाची थोड़ी सिसकी लेती है,पर जैसे ही जय उसको शक से घूरता है ओ झट से”मेरा लाडला बेटा है ही प्यारा”बोलके बात को घुमा देती है।
विकास:क्यो जय करेगा चाची से शादी।बोल?

जय:क्या चाचा कुछ भी।

निर्मला:चलो जी बाते तो होती रहेंगी खाना खा लो।

सब लोग खाना खाके हो जाणे के बाद सब सोने की तयारी करणे लगते है।
1रूम किचन होकर भी 4 से ज्यादा लोग हॉल वाले एरिया में रही सो सकते थे।
इसलिए चाचा दीवार की ओर बाद में चाची फिर उनकी लड़की फिर जय सो गए।
चाचा को नींद में रेंगने की आदत थी तो ओ दीवार से सैट के सोते थे।
आधी रात 12 बजे के आसपास की बात।जय बाथरूम जाने उठा।बाथरूम से आने के बाद जब उसने फ्रिज खोल और पानी पी रहा था तो उसकी नजर टहलते हुए चाची के पास गयी।चाची अब उसके सेड आ चुकी थी बच्ची चाचा और चाची के बीच में थी
चाची ने मैक्सी(नाइटी)पहनी थी।और घुटनो के ऊपर तक आ चुकी थी।चुचो का आकर बाद था तो ओ आधे बाहर लटक रहे थे।
यहापर चाची की भी नींद खुल चुकी थी।पर जय सिर के ऊपर होने की वजह से उनकी अधखुली आंख जय को दिखी नही।ओ तो चाची का रसीला बदन देखने में व्यस्त था।
चाची उसके सामने खड़े किये अलमारी के आयने से जय को देख रही थी।
चाची की अधनंगी टांगेऔर आधे लटके चुचे देख जय का लन्ड हलचल करने लगा,खुजली की वजह से जय उसको शॉर्ट के ऊपर से सहलाने लगा।
ये नजारा तो चाची के होश उड़ा गया।उसने जान भुजके अपनी कोहनी बदली और बेटी के ऊपर हाथ रख कर गांड को थोड़ा बाहर निकाल सो गयी।जिससे उसकी नाइटी गांड तक ऊपर आई।उसने ये अइसे किया जैसे ओ नींदमें हो।पर इस हलचल के परिणामके जय होश में आया और पानी की बोतल फ्रिज में रख जगह पे आके सो गया।
पर उसका लन्ड इतना उत्तेजित था की ओ खड़ा ही था अभीतक।
जय जब जगह पे सोया तब उसको अहसास हुआ की चाची की गांड उसके लन्ड को टच हो रही है।उसने लन्ड को सेट करने की पूरी कोशिश की पर ओ नाकाम रहा।
पर इस कोशिश के दरमियान उसके हाथ चाची के गांड को टच कर गए।इधर पराये तगड़े नौजवान के नए नवेले स्पर्श से चाची सातवे आसमान पे थी।
थोड़ी देर कोई हलचल नही हुई।मौका न चला जाए इस के लिए चाची ने अपनी गांड को और बाहर निकाला।जय का लन्ड अभी चाची के गांड के अंदर तक जा रहा था।
पर जय को आश्चर्य इस बात का हुआ की चाची बिना पेंटी के सोई है और ओ भी एक पराये नौजवान के साथ।
पर उसके पास कोई चारा नही था।रात को उसको कोई बवाल खड़ा नही करना था।जिससे उसके चाचा को कोई कारण मील जाए और ओ खुद फस जाए।
बस उसे कैसे भी संयमसे है रात काटनी थी।पर जबतक उसका मानसिक संयम बन जाए उसके पहले चाची अपनी अगली चाल चल चुकी थी।उसने अपनी गांड को लन्ड पे सटाके हिलाना घूमना चालू किया।जय को ये समज ने में देरी नही लगी की ये नींद में नही जान के किया जा रहा है,मतलब चाची जगी हुई है।
उसने कोई रेस्पोंस नही दिया।पर चाची अपनी हवस अपनी तरह से मिटाने के कोशिश में लगी थी।करीब 15 20 मिंट बाद ओ शांत हो गयी(झड़ गयी)।
जय आंखे बंद करके सिर्फ मजे ले रहा था।चाची उठी बाथरूम जाकर आई।उसने सोने से पहले जय के ऊपर देखा,उसका लन्ड अभी भी तना हुआ था,चाची थोड़ी मुस्करा गयी
मन में”क्या तगड़ा लन्ड है बंदे का,अभी तक खड़ा है,मन करता है अभी चूस लू और चूत में घुसेड दु”
पर ओ कंट्रोल करके जगह पे आके सो गयी।इस बार मुह जय के सामने था।
ओ नीद में होने का नाटक चालू कर दी।
यहां पे तने लन्ड की वजह से जय अपनी हवस काबू नही कर पा रहा था।उसने आंखे खोली तो सामने जो देखा और महसूस किया ओ उसके जीवन का एक नया अनूभव था।
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कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

गरमागरम सेक्स कहानी पढ़िए, खूबसरत कमसिन लड़कियों, हॉट भाभियों और चुदाई की प्यासी आंटियों की स्टोरीज का खजाना
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Struggling वाली चुदाई पार्ट 2

शालू के जाणे के बाद थोडी देर बाहर रुक कर जय घर के अंदर घुसा.जय को अंदर एते देख निर्मला ने उसे पूछा
“जय चाय पिओगे”
जय:”हा चाची”
जय बाथरूम में जाकर हाँथ पाव धोकर TV के सामने आके बैठ गया।
निर्मला चाची ने दो कप चाय लाकर उसके सामने ही बैठ गयी.घरके काम करने वाली औरत थी तो सलवार कमीज(पंजाबी ड्रेस टाइप)कपड़े पहने थे पन गले पे ओढ़नी नही थी।चाची के उस यौवन को जय कुछ देर ताकता ही रह गया।चाची की उम्र करीब 40 के ऊपर ही थी दिखने में सावला रंग,पर उम्र के हिसाब से मोठी थी।किसीको पहले फुरसत में पसंद आये अयसे उसका यौवन नही था।
पर जबसे उन दोनो की बाते जय ने सुनी है तबसे उसका चाची की तरफ देखने का नजरिया बदल गया था।
चाची ने थोड़ा उस बात पे गौर किया पर कोई रिएक्शन नही दिया,क्योकि यही तो उनको चाहिए था।अपने इस नादानी को समज आते ही जय पूर्वस्तिथि में आ गया।उसने भी मन में सोचा की “इनकी जाल में अइसे नही फसेंगे।ये लोक क्या तमाशे करते है उसके मजे लेंगे।क्योकि ये कुछ भी करे फायदा तो मेरा होगा,बस चिंता इस बात की थी की कही इस बात को ढाल बनाकर ओ मेरे नाम से मा बाबा को ब्लैकमेल न करे जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो”
जय TV देखते हुए चाय पीने लगा।उस पल के बाद उसने निर्मला की ओर नही देखा।
निर्मला:क्यो जय,कैसा लग रहा है यह पर,खुश तो हो,कोई परेशानी?
जय:कुछ नही चाची,ठीक है,दुनियादारी में उतरना है तो कुछ कुछ सहन करना पड़ेगा,और ये तो मेरा अपना घर है यह पर क्या परेशानी
निर्मला:बाते तो बड़ी अच्छी कर लेते हो,जो कुछ चाहिए तो बेज़िज़क मांग लेना,
जय:जी चाची जरूर
इसबार जय ने चाची को नजर अंदाज करते हुए बात की
चाय खत्म होते ही दोनो कप लेके जप निर्मला ऊठ रही थी तो उसके चुचो की गालिया साफ दिख रही थी,और पसीना होने से उसमे और निखार आ रहा था।पर उस समय जय ने ओ भी नजर अंदाज किया।अब तो निर्मला चौक सी गयी
मन में”क्या हुआ इसको अभी तो लाइन डाल रहा था,अभी कुछ ध्यान ही नही दे रहा है,धत्त तेरे की अच्छी खासी फासे में फसने वाली थी मछली”
शाम को विकास घर पे आ गया।जय छोटी बच्ची के साथ खेल रहा था।1रूम किचन था तो विकास ने आते ही जय की हालचाल पूंछ कर फ्रेश हुआ और किचन में चला गया।
विकास:कुछ बात बनी या नही
निर्मला:एक बार ताक जरूर रहा था पर उसके बाद में कुछ रिएक्शन नही दिखी।
विकास:कुछ भी कर पर उसे इस प्लान के बारे में पता नही चलना चाहिए।
निर्मला:पता नही चलेगा आप उसकी चिंता मत करो,पर मैं इसे काबू में कैसे करू,ओ गोरा चिकना गबरू जवान,और मैं ठहरी सावली मोठी सी औरत,मुझमें कैसे आकर्षित करू,कुछ समझ नही आ रहा
विकास: परेशान होने की बात नही है।थोड़ा सा अंगप्रदर्शन कर ले,काहीपर कुछ हवस भरी बात छेड दे,पारिवारिक मूल्यों को संभालने वाला लड़का है ज्यादा बवाल नही होगा।
निर्मला:कुछ तो जल्दी करना पड़ेगा जी,चूत रोज पानी छोड़ रही है,अभी सहन नही होता।
विकास:थोड़ा धीरज रख मेरी लन्ड की मल्लिका,जड़ जबरदस्ती करेगी तो लड़का और प्रोपर्टी दोनो हाथ से निकल जाएगा,और हा उसके काम के लिए पूछ लिए क्या
निर्मला:हा पूंछ लिया।पर मुझे कुछ ठीक नही लग रहा।मालकिन बड़ी चूदासी है।अक्सर कोई न कोई आता रहता है।कई उसने डोरे डाल दिए तो।
विकास:कल का कल देखेंगे,वैसे भी ओ वैसा लड़का नही है,दिनभर कुछ भी करे रात को तो मिल ही जाएगा।कल भैया पूछेंगे तो कुछ तो जवाब देना है।इसलिए लगा दो।नही तो इस महीने के भैया को हमारे जेब से पैसे देने पड़ेंगे
निर्मला:बात तो हुई है पर मालकिन और उनका परिवार बाह घूमने गया है,मालिक आये है न.जब ओ वापस आएंगे तब लेके जाउंगी उसे.2 3 दिन की बात है
विकास:ठीक है चलो खाना परोसो।मैं जय को बुलाता हु।

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.TO BE CONTINUE
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 1
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7
गरमागरम सेक्स कहानी पढ़िए, खूबसरत कमसिन लड़कियों, हॉट भाभियों और चुदाई की प्यासी आंटियों की स्टोरीज का खजाना
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Struggling वाली चुदाई पार्ट 1


किसीने बहुत खूब कहा है,
           “  क्या जिंदगी है ओ जिसमे लन्ड खड़ा न हो
             कैसी मर्दानगी उसकी जिसके हाथो चूचा बड़ा न हो
      चूत का छेद और हाल कैसे हो मेरे हवसी नाथ
      चोद दे ना उस चूत रानी को चाहे उसका पति खड़ा हो न हो”
नमस्ते दोस्तो मेरा नाम मि.सेक्सी वेबी.कुछ लेके आया हु नया नही है पर रोमांचक भरा जरूर है,अच्छा लगे तो भी कमेंट करना और बुरा लगे तो भी,क्योकि मार्गदर्शन बहुत कुछ सीखा देता है लेखक को,उसके लिए भाषा मायने नही रखती,जड़ बकचोदी न करते हुए.स्टोरी का पहला सीजन पेश करने जा रहा हु.आपके साथ कि आशा है,धन्यवाद!!!

आजकल की जिंदगी तेज रफ्तार सी हो गयी है.हर एक को अपने सपने पूरे करने में बहोत कठिन से कठिन चुनोतीओंका सामना करना पड़ता है।अइसे ही दिल मे अरमान और मन मे बहोत सपने लिए एक साधारण से गांव में पला बड़ा लड़का अपने सपनो को साकार करने शहर आ पहुंचा,सपनो का शहर मुंबई।
नाम है जय।उम्र करीब 21 साल।अच्छा खासा तगड़ा जवान।गरीब किसान के परिवार में पैदा हुआ एक अनमोल रत्न,जिसमे जन्म से हो या कर्म से संगीत गायकी और हार्मोनियम वादन की अलग सी कला अवगत थी,गांव में उसके इस रत्न का पारखी नही था।
     गर्मियों का वक्त था,उसका चाचा छुटियो में गांव आया हुआ था।उसकी इस तम्मना को जानते हुए और भाई की परिस्थिति को समझते हुए उसने जय को मुम्बई लेकर जाने का प्रस्ताव रखा।पहले तो जय के माता पिता ने न नकुर कि पर बाद में मान गये।
कुछ दिन रहने के बाद चाचा जय को लेकर मुम्बई आ गया।जय के लिए शहर वाली जिंदगी नई थी।उसका चाचा एक चॉल में रहता है,उसकी एक 40 साल की बीवी और 5 साल की बेटी है।
चाचा जब जय को घर लेकर आता है तो चाची उसका खूब अच्छे तरह से स्वागत करती है ।चाचा चाची को पूरे परिस्थिति का ज्ञान करा देता है।हालांकि चाचा का रूम बहोत छोटा था पर 4 लोग तो सहजता से रह सकते थे।चाचा ने जय को कुछ दिन रुकने को बोला जबतक उसे कोई काम न ढूंढ ले।दिन अइसे ही जाने लगे।रोज सुबह जल्दी उठना चाची को घर के कामो में मदत करना उसकी दिनचर्या बन चुकी थी।जय की चाची भी घर के काम करने जाती थी तो जय घर पे अकेला हारमोनियम बजाते बैठता था।
एकदिन जब ओ अयसेही घर में बैठा था तो चाल में रहने वाली उसके चाची की दोस्त घर पे आ गयी।चाल का माहौल आम तौर पर क्या रहता है ओ तो सभी अच्छे तरह से जानते है ।जय घर में बनियान और शॉर्ट में बैठा tv देख रहा था,जब चाची की दोस्त अंदर आई तो ओ हड़बड़ा कर खड़ा हुआ।
पहले तो ओ एक दूसरे को ताकते ही रह गए,पर कुछ पल गुजरने के बाद चाची की दोस्त बोली “बेटा निर्मला किधर है”
जय:ओ चाची काम पर गयी है,वैसे आप कौन है?
चाची की दोस्त:निर्मला को बोलना शालू आई थी।
जय :ठीक है।
शालू:वैसे तुम कौन हो,कभी देखा नही?
जय:मैं विकास चाचा का गांव का भतीजा हु,काम के खोज में यह आया हु अभी कूछ दिनों पहले।
शालू:गांव का?अरे तो तुम विजय के लड़के हो,सुमित्रा कैसी है?
जय पहले तो शालू के मुह में मा बाप का नाम सुन चौक गया 
उसने हड़बड़ाते हुए कहा:है ठीक सब सब लोग मजे में
शालू:तू तो बहुत बड़ा हो गया रे,(जय को ताड़ते हुए)बचपन में तो मेरे सामने नंगा घूमता था।
जय थोड़ा शर्मा जाता है।
शालू:ठीक है मैं शाम को अति हु।
शालू के जाते हुए ताड़ते हुए जय सोचविचार में पैड जाता है की ये है कोन?मेरे परिवार के बारे में जानती कैसे है?

शाम 6 बजे जब उसकी चाची निर्मला घर आ जाती है तो ओ सब कुछ जो घटा ओ बया कर देता है।चाची थोड़ा सोचके इस बात को टालने की कोशिश करती है,और उसे बाहर घूमके आने को बोलती है।जय को ये बात थोड़ी खटक जाती है।पर दिनभर घर पे बैठ ओ भी थक चुका था तो ओ भी बाहर घूमने चला जाता है।
इधर उधर टहलकर जय जब घर आता है तो घर के बाहर से उसे अंदर किसी के होने की आवाज सुनाई देती है।अध खुली खिड़की से ओ अंदर देखती है तो,उसे अंदर वही दोपहर वाली शालू चाची दिखाई देती है।उनके बीच कोई बात चल रही थी।जय ओ सुनने की कोशिश करता है।
शालू:तूने बताया नही,विजय का लड़का आया है।
निर्मला:अरे अभी आया है,बताने ही वाली थी।
शालू:अच्छा,तुम मुझे बताने वाली थी(अजीब सी मुस्कान)
निर्मला:देख शालू जेठ जी और तुम्हारे बीच जो था,ओ कब का खत्म हो चुका है,तुम लोगो की प्रेम कहानी को 23 साल पहले ही हो गयी।तुम्हारे सरफिरे स्वभाव को जानकर ही ओ गांव में जाके शादी किया
शालू:मैंने क्या किया,ओ मुझसे भी शादी कर सकता था।
निर्मला:तुम दोनो में क्या गहमागहमी हुई मालूम नही पर इसका मतलब तुम अभी जय पे डोरे न डाल।बचपन में उसके तूने जो तमाशा किया तब जय बहोत छोटा था अभी ओ जवान है।तेरे इस स्वभाव के वजह से न जेठ जी यहां आते है न किसीको भेजते है।बड़ी मुश्किल से जय को भेजा है।
शालू:तूने ही विकास को बोला न उसको लाने को?
शालू के अचानक बोलने से निर्मला हड़बड़ा गयी।
शालू:सच बोल क्या प्लान है तुम लोगो का?
निर्मला:तुम तो जानती हो,बेटी को पैदा करने में ही कितना समय लग गया,अभी उन्हें बेटाभी चाहिए पर उम्र के हिसाब से उनसे ओ हो नही पा रहा।इसलिए हैम दोनो ने मिल कर सोच समज कर ये कदम उठाया है।
शालू:यानी विकास भी इसमे शामिल है।
निर्मला:हा,ये पूरा प्लान ही उनका है,मैने सिर्फ हा कहा है,जिससे मैं मा भी बन जाउंगी और जय जेठ जी का एकलौता लड़का है तो जो संपत्ति है ओ भी हमारे पास आ जाएगी।
शालू:इस प्लान में मैं भी शामिल होना चाहती हु।मुझे भी अपने अधूरे अरमान पूरे करने है।जो बाप से न हुआ ओ मैं बेटे से करवाउंगी
निर्मला:पर थोड़ा धीरज रख तेरे यही सरफिरे स्वभाव के वजह से बाप छूट गया अब बेटे से हाथ धो बैठोगी,तू जो भी करेगी कर पर इनको उसका पता न चल पाए
शालू:ठीक है,पर कुछ भी बोल विजय का लड़का उससे भी दमदार लगता है।
निर्मला:देख ओ मुझे भी बहुत पसंद आया है,पर जैसे उसका हमे फायदा है वैसे ओ जिसके लिए आया है ओ सपना भी उसका पूरा करना पड़ेगा याफिर करने का दिखावा करना पड़ेगा,क्योकि ओ बहोत होशियार है,गरीबी होते हुए भी उसने अपनी कला को निखारते हुए पढ़ाई पूरी की है,ध्यान नही रखा तो पंछी उड़ जाएगा।
दोनो भी हँसने लगे।
जय को ये सब सुन के थोड़ा अजीब से तो फील हुआ पर उसने भी वैसे रिएक्ट न होते हुए जैसे हूँ रहा है वैसे जाने देने का फैसला किया क्योकि सवाल परिवार का था,माता पिता के भावना ओ का था।बस उसे अभ चौकन्ना रह के नहले पे दहला देना था।

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.कहानी जारी रहेगी………..……

सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 2
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 3
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 4
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 5
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 6
सफर चुदाई का struggling वाला पार्ट 7

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