Vidhwa saheli sex story : विधवा सहेली को मोटे लंड का तोहफा दिया(Widow sex story)

Vidhwa saheli sex story : यह कहानी मेरी और मेरी एक सहेली जिसका नाम अमृता है उसकी है।

मेरी वैसे दो सहेलियाँ हैं जो बचपन से साथ में खेली पढ़ी और लिखी हैं। हम तीन सहेलियाँ आज भी एक दूसरे के संपर्क में हैं पर समय के साथ पारिवारिक काम काज में व्यस्त रहने की वजह से मिलना जुलना कम हो गया है।

मैं धन्यवाद करना चाहूंगी उन लोगों का जिन्होंने फोन और इंटरनेट जैसे साधन बनाए जो हमें आज भी जोड़े हुए हैं।

अमृता भी मेरी तरह एक मध्य वर्ग की पारिवारिक महिला है। उम्र 46 कद काफी अच्छा खासा है लगभग 5 फीट 8 इंच होगा उम्र के हिसाब से भारी भरकम शरीर और 2 बच्चों की माँ है। उसके दोनों बच्चों की उम्र 24 और 21 है और अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं।

अमृता हम तीन सहेलियों में से एक थी जिसकी शादी सबसे पहले 21 वर्ष की आयु में हुई और बच्चे भी जल्दी हुए। उसके पति एक सरकारी स्कूल में क्लर्क थे और जब उसका दूसरा बच्चा सिर्फ 2 साल का था तब स्कूल की छत बरसात में गिर गई जिसमें उसके पति के सर पर गहरी चोट आई।

शहर के सरकारी सदर अस्पताल ने उन्हें अपोलो रांची भेज दिया पर रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई थी। यह समाचार मेरे लिए काफी दुखद था। मैंने उसके बारे में पता किया तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे उसके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया हो। वो केवल 28 साल की एक जवान महिला थी जो अब दो बच्चों की विधवा माँ थी।

खैर उसे इन सबसे उबरने में काफी समय लग गया और एक अच्छी बात यह हुई कि उसे अपने पति की जगह नौकरी मिल गई। उसने अपनी पढ़ाई शादी के बाद भी जारी रखी थी और स्नातक पूरा कर लिया था। जिसकी वजह से आज वो अपने पति की कुर्सी पर है और बच्चों का भविष्य अच्छा है।

मैंने और वर्षा ने अपनी तरफ से उसे इस भारी सदमे से उबरने में हर संभव प्रयास किया जहां तक हमारी सीमाएं थीं। अमृता की नौकरी लग जाने से परिणाम भी सही निकला दफ्तर जाने और काम में व्यस्त होने के बाद वो पूरी तरह से इस हादसे से उबर चुकी थी।

चार साल बीत गए थे। इस बीच वर्षा तो नहीं पर मैं हफ्ते में एक बार उससे बात कर लिया करती थी और कभी उड़ीसा से घर जाती तो मिल भी लेती थी।

एक अकेली जवान औरत किसी शिकार की तरह होती है जिसके दो शिकारी होते हैं। एक तो मनचले मर्द जो किसी अकेली औरत को भूखे भेड़िये की तरह देखते हैं और दूसरा उसका स्वयं मन भी उसे गलत रास्ते पर ले जाता है। मनचले मर्दों को तो औरत दरकिनार भी कर दे पर अपने मन से कैसे बचे कोई।

यही शायद अमृता के साथ भी अब होने लगा था वो दूसरे मर्दों से तो खुद को बचाती फिर रही थी पर अपने मन से बचना मुश्किल होता जा रहा था। अमृता अब 33 साल की एक अकेली जवान विधवा थी और दो बच्चों की माँ भी इसलिए कोई मर्द उसे पत्नी स्वीकार ले असंभव सा था।

ऊपर से आज भी छोटे शहरों में समाज जो औरतों की दूसरी शादी पसंद नहीं करता। इसी सिलसिले में मैंने एक बार अमृता के घरवालों से बात की पर वो तैयार नहीं हुए ये कह कर कि अमृता अब किसी और घर की बहू है। पर मेरे बार बार विनती करने पर उन्होंने अमृता के ससुराल वालों से बात की पर जवाब न सिर्फ नकारात्मक निकला बल्कि नौकरी छोड़ने की नौबत आ गई।

उसके ससुराल वालों ने यह शक जताया कि शायद अमृता का किसी मर्द के साथ चक्कर है सो उसे जोर देने लगे कि नौकरी छोड़ दे। पर अमृता जानती थी कि उसके बच्चों का भविष्य उसके अलावा कोई और अच्छे से नहीं संवार सकता इसलिए उसने सभी से शादी की बात करने को मना कर दिया और दुबारा बात नहीं करने को कहा।

हालांकि उसने हमसे कभी शादी की बात नहीं की थी बस हम ही खुद भलाई करने चले गए जिसकी वजह से अमृता से मेरी दूरी बढ़ने लगी। मैंने सोच लिया था कि अब उससे कभी बात नहीं करूंगी पर बचपन की दोस्ती कब तक दुश्मनी में रह सकती है। कुछ महीनों के बाद हमारी बातचीत फिर से शुरू हो गई।

वो शाम को जब फुर्सत में होती तो हम घंटों बातें करते और मैं हमेशा यही प्रयास करती कि वो अपने दुखों को भूल जाए। इसलिए वो जो भी मजाक करती मैं उसका जरा भी बुरा नहीं मानती। वो कोई भी ऐसा दिन नहीं होता कि मेरे पति के बारे में न पूछे और मुझे छेड़े ना।

धीरे धीरे मैंने गौर किया कि वो कुछ ज्यादा ही मेरे और मेरे पति के बीच जो कुछ रात में होता है उसे जानने की कोशिश करने लगी। एक बार की बात है मैं बच्चे को स्कूल पहुंचा कर दुबारा सो गई क्योंकि मेरी तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी। तभी अमृता ने मुझे फोन किया मेरी आवाज सुन कर वो समझ गई कि मैं सोई हुई थी।

उसने तुरंत मजाक में कहा क्या बात है इतनी देर तक सोई हो जीजाजी ने रात भर जगाए रखा क्या।

मैंने भी उसको खुश देख मजाक में कहा क्या करूं पति परमेश्वर होता है जब तक परमेश्वर की इच्छा होती है सेवा करती हूं।

उसने कहा लगता है कल रात कुछ ज्यादा ही सेवा की है।

मैंने कहा हां करना तो पड़ता ही है तूने नहीं की क्या।

मेरी यह बात सुन कर वो बिल्कुल खामोश हो गई। मैंने भी अब सोचा कि हे भगवान मैंने यह क्या कह दिया। वो मेरे सामने नहीं थी पर मैं उसकी खामोशी से उसकी भावनाओं को समझ सकती थी। पर उसने भी खुद को संभालते हुए हिम्मत बांधी और फिर से मुझसे बातें करने लगी।

दरअसल बात थी कि मैं अपने एक चचेरे भाई की शादी में घर जाने वाली थी और उसने यही पूछने के लिए फोन किया था कि मैं कब आऊंगी क्योंकि गर्मी की छुट्टी होने को थी तो वो भी मायके आने वाली थी। शाम को मैंने उसका दिल बहलाने के लिए फिर से उसे फोन किया। कुछ देर बात करने पर वो भावुक हो गई।

एक मर्द की कमी उसकी बातों से साफ झलकने लगी। मैं भी समझ सकती थी कि अकेली औरत और उसकी जवानी कैसी होती है। सो मैंने उससे उसके दिल की बात साफ साफ जानने के लिए पूछा क्या कोई है जिसे वो पसंद करती है।

उसने उत्तर दिया नहीं कोई नहीं है और मैं ऐसा सोच भी नहीं सकती मैं एक विधवा हूं।

तो मैं हैरान हो गई कि अभी कुछ देर पहले इसी तरह की बात कर रही थी अब अचानक क्या हो गया। मैंने भी उसे भांपने के लिए कह दिया अगर ऐसा सोच नहीं सकती तो फिर हर वक्त क्यों किसी के होने न होने की बात करती हो। उसने भी मेरी बात को समझा और सामान्य हो गई।

तब मैंने सोचा कि चलो इसके दिल की बात इसके मुंह से आज निकलवा ही लेती हूं और फिर मैंने अपनी बातों में उसे उलझाने की कोशिश शुरू कर दी। कुछ देर तो वो मासूम बनने का ढोंग करती रही पर मैं उसकी बचपन की सहेली हूं इसलिए उसका नाटक ज्यादा देर नहीं चला और उसने साफ कबूल कर लिया कि उसे भी किसी मर्द की जरूरत है जो उसके साथ समय बिताए उसे प्यार करे।

तब मैंने उससे पूछा क्या कोई है जो उसे पसंद है।

तब उसने बताया हां एक मर्द अनूप है जो मेरे स्कूल में पढ़ाता है और हर समय मुझसे बात करने का बहाना ढूंढता रहता है वो अभी भी कुंवारा है पर मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि वो मुझे पसंद करता है या सिर्फ मेरी आंखों का धोखा है।

तब मैंने उसे समझाया कि वो उसे थोड़ा नजदीक आने दे ताकि पता चल सके आखिर बात क्या है। उसने वैसा ही किया और एक दिन अमृता ने मुझे फोन करके बताया कि उस आदमी ने उससे कहा कि वो उससे प्यार करता है और शादी करना चाहता है।

पर अमृता ने उससे कह दिया शादी के लिए कोई भी तैयार नहीं होगा और सबसे बड़ी मुसीबत तो जाति की हो जाती क्योंकि वो दूसरी जाति का है।

तब मैंने अमृता से पूछा आखिर तू क्या चाहती है।

उसने खुल कर तो नहीं कहा पर उसकी बातों में न तो हां था न ही ना था। मैं समझ गई कि अमृता चाहती तो थी कि कोई मर्द उसका हाथ दुबारा थामे पर उसकी मजबूरी भी थी जिसकी वजह से वो ना कह रही थी। खैर इसी तरह वो उस आदमी से बातें तो करती पर थोड़ा दूर रहती क्योंकि उसे डर था कहीं कोई गड़बड़ी न हो जाए। पर वो आदमी उसे बार बार उकसाने की कोशिश करता।

एक दिन मैंने अमृता से कहा मेरी उससे बात करवाओ।

तो अमृता ने उसकी मुझसे बात करवाई फिर मैंने भी उसे समझाया।

वो लड़का समझदार था सो वो समझ गया पर उसने कहा मेरे लिए अमृता को भूलना मुश्किल है।

शादी का दिन नजदीक आ गया और मैं घर चली आई और अमृता से मिली।

मैंने उसके दिल की बात उसके सामने पूछी क्या तुम उस लड़के को चाहती हो।

उसने कहा चाहने न चाहने से क्या फर्क पड़ता है जो हो नहीं सकता उसके बारे में सोच कर क्या फायदा।

मैंने उससे कहा देखो अगर तुम उसे पसंद करती हो तो ठीक है जरूरी नहीं कि शादी करो समय बिताना काफी है तुम लोग रोज मिलते हो अपना दुख सुख उसी कुछ पलों में बांट लिया करो।

तब उसने कहा मैं उसके सामने कमजोर सी पड़ने लगती हूं जब वो कहता है कि वो मुझसे प्यार करता है।

मैंने उससे पूछा क्या लगता है तुम्हें।

मेरा सवाल सुन कर उसकी आंखों में आंसू आ गए और कहने लगी जब वो ऐसे कहता है तब मुझे लगता है उसे अपने सीने से लगा लूं उसकी आंखों में इतना प्यार देख कर मुझसे रहा नहीं जाता।

मैं उसके दिल की भावनाओं को समझ रही थी पर वो रो न दे इसलिए बात को मजाक में उड़ाते हुए कहा तो ठीक है लगा लो न कभी सीने से मौका देख कर।

और मैं हंसने लगी। मेरी हंसी देख कर वो अपने आंसुओं पर काबू करते हुए मुस्कुराने लगी।

मैंने उसका दिल बहलाने के लिए कहा एक काम कर शादी वादी भूल जा सुहागरात मना ले।

वो मुझे मजाक में डांटते हुए बोली क्या पागलों जैसी बातें करती है।

मैंने कहा चल मैं भी समझती हूं तेरे दिल में क्या है अच्छा बता वो दिखने में कैसा है।

उसने तब मुझे बताया वो दिखने में काफी आकर्षक है।

मैंने उससे कहा मैं अपने भाई को बोल कर शादी में उसे भी बुला लेती हूं ताकि तुम दोनों मिल भी सको और घर का कुछ काम भी हो जाए।

वो बहुत खुश हुई पर नखरे करती रही कि किसी को पता चल जाएगा तो मुसीबत होगी।

मैंने उसे समझाया डरो मत मैं सब कुछ ठीक कर दूंगी।

वो बुलाने पर आ गया पर हैरानी की बात ये थी कि वो मेरे पड़ोस के एक लड़के मनीष का दोस्त था जो हमारे साथ ही स्कूल में पढ़ा था। यह मनीष वही था जो मुझे पसंद करता था पर मैं अपने घर वालों के डर से कभी उसके सवाल का उत्तर न दे सकी थी।

आज भी मैं जब मनीष से मिलती हूं तो मुझे वैसे ही देखता है जैसे पहले देखा करता था। वो मुझसे ज्यादा नहीं पर स्कूल के समय अमृता से ज्यादा बातें करता था। मनीष ने अमृता के जरिये ही मुझसे अपने दिल की बात कही थी। मैंने सोचा चलो अच्छा है मनीष के बहाने अगर हो सके तो अमृता को उसके प्यार से मिलवा दिया जाएगा।

मैंने मनीष से बातें करनी शुरू कर दीं फिर एक दिन मैंने बता दिया कि अमृता उसके दोस्त को पसंद करती है इसलिए उसे यहां बहाने से बुलाया था पर अगर वो साथ दे तो अमृता को उससे मिलवाने में परेशानी नहीं होगी और मनीष भी मान गया।

अब रात को हम रोज सारा काम खत्म करने के बाद छत पर चले आते और घंटों बातें करते। अमृता को हम अकेला छोड़ देते ताकि वो लोग आपस में बात कर सकें। कुछ दिनों में घर में मेहमानों का आना शुरू हो गया और घर में सोने की जगह कम पड़ने लगी तो मैं बाकी लोगों के साथ छत पर सोने चली जाती थी।

गर्मी का मौसम था तो छत पर आराम महसूस होता था। बगल वाले छत पर मनीष और अनूप भी सोया करते थे। एक दिन अनूप ने मुझसे पूछा कि क्या कोई ऐसी जगह नहीं है जहां वो अमृता से अकेले में मिल सके। मैं समझ गई कि आखिर क्या बात है पर मेहमानों से भरे घर में मुश्किल था और अमृता मनीष के घर नहीं जा सकती थी क्योंकि कोई बहाना नहीं था।

तो उसने मुझसे कहा क्या ऐसा नहीं हो सकता कि अमृता रात को छत पर ही सोये।

मैंने उससे कहा ठीक है घर में काम का बहाना बना कर मैं उसके घर पर बोल दूंगी कि मेरे साथ सोये।

मैंने उसके घर पर बोल दिया कि शादी तक अमृता मेरे घर पर रहेगी काम बहुत है उसके घर वाले मान गए। रात को हम छत पर सोने गए। कुछ देर हम यूँ ही बातें करते रहे क्योंकि सबको पता था कि हम साथ पढ़े हैं किसी को कोई शक नहीं होता था कि हम लोग क्या कर रहे हैं।

जब बाकी लोग सो चुके थे तब मैंने भी सोचा कि अब सोया जाए। मैंने मनीष की छत पर ही मेरा और अमृता का बिस्तर लगा दिया और मनीष और अनूप का बिस्तर भी बगल में था। अनूप और अमृता आपस में बातें कर रहे थे और मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी और बगल में मनीष अपने बिस्तर पर लेटा था।

तभी मनीष ने मुझसे पूछा तुम्हारे पति कैसे हैं।

मैंने कहा ठीक हैं।

कुछ देर बाद उसने मुझसे पूछा उसने जो मुझसे कॉलेज के समय कहा था उसका जवाब क्यों नहीं दिया।

मैंने तब उससे कहा पुरानी बातों को भूल जाओ मैं अब शादीशुदा हूं।

फिर उसने दुबारा पूछा अगर जवाब देना होता तो मैं क्या जवाब देती।

मैंने कुछ नहीं कहा बस चुप लेटी रही उसे लगा कि मैं सो गई हूं सो वो भी अब खामोश हो गया। रात काफी हो चुकी थी अंधेरा पूरी तरह था हर चीज काली परछाई की तरह दिख रही थी। कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि अमृता मेरे बगल में आकर लेट गई है। गौर किया तो अनूप भी उसके बगल में लेटा हुआ था।

मुझे लगा अब सब सोने जा रहे हैं सो मैं भी सोने का प्रयास करने लगी। तभी मुझे कुछ फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी। उस फुसफुसाहट से मनीष भी करवट लेने लगा तो फुसफुसाहट बंद हो गई। कुछ देर के बाद मुझे फिर से फुसफुसाने की आवाज आई।

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यह आवाज अमृता की थी वो कह रही थी नहीं कोई देख लेगा मत करो।

फिर एक और आवाज आई सभी सो गए हैं किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।

मैं मौन होकर सब देखने की कोशिश करने लगी पर कुछ साफ दिख नहीं रहा था बस हल्की फुसफुसाहट थी। थोड़ी देर में मैंने देखा तो एक परछाई जो मेरे बगल में थी वो कुछ हरकत कर रही थी यह अमृता ही थी मैंने गौर किया तो उसके हाथ खुद के सीने पर गए और वो अपने ब्लाउज के हुक खोल रही थी।

फिर उसके हाथ नीचे आए और साड़ी को ऊपर उठाने लगे और कमर तक उठा कर उसने अपनी पैंटी निकाल कर तकिये के नीचे रख दी। मैं समझ गई कि आज दोनों सुहागरात मनाने वाले हैं और मेरी उत्सुकता बढ़ गई। मैंने अब सोचा कि देखा जाए कि अनूप आखिर क्या कर रहा है। मैंने धीरे से सर उठाया तो देखा उसका हाथ हिल रहा है मैं समझ गई कि वो अपने लिंग को हाथ से हिला कर तैयार कर रहा है।

तभी फिर से फुसफुसाने की आवाज आई अमृता ने कहा आ जाओ।

और कुछ ही पलों में मुझे ऐसा लगा कि जैसे एक परछाई के ऊपर दूसरी परछाई चढ़ी हुई है। अनूप अमृता के ऊपर चढ़ा हुआ था अमृता ने पैर फैला दिए थे जिसकी वजह से उसका पैर मेरे पैर से सट रहा था। उनकी ऐसी हरकतें देख कर मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा था। मैं सोच में पड़ गई कि आखिर इन दोनों को क्या हुआ जो बिना किसी के डर के मेरे बगल में ही ये सब कर रहे हैं।

उनकी हरकतों से मेरी अंतर्वासना भी भड़कने लगी थी पर मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी। मैं ऐसी स्थिति में फंस गई थी कि कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि मेरी कोई भी हरकत उन्हें परेशानी में डाल सकता था और मैं अमृता को इस मौके का मजा लेने देना चाहती थी इसलिए चुपचाप सोने का नाटक करती रही।

अब एक फुसफुसाते हुई आवाज आई घुसाओ।

यह अमृता की आवाज थी जो अनूप को लिंग योनि में घुसाने को कह रही थी।

कुछ देर की हरकतों के बाद फिर से आवाज आई नहीं घुस रहा है कहां घुसाना है समझ नहीं आ रहा।

यह अनूप था।

तब अमृता ने कहा कभी इससे पहले चुदाई नहीं की है क्या तुम्हें पता नहीं कि लंड को बुर में घुसाना होता है।

अनूप ने कहा मुझे मालूम है पर बुर का छेद नहीं मिल रहा है।

तभी अमृता बोली हां बस यहीं लंड को टिका कर धकेलो।

मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था पर उनकी बातों से सब समझ आ रहा था कि अनूप ने पहले कभी संभोग नहीं किया था। इसलिए उसे अंधेरे में परेशानी हो रही थी और वो अपने लिंग से योनि के छेद को टटोल रहा था। जब योनि की छेद पर लिंग लग गया तो अमृता ने उससे कहा धकेलो।

तभी अमृता की फिर से आवाज आई क्या कर रहे हो जल्दी करो बगल में दोनों हैं जाग गए तो मुसीबत हो जाएगी।

अनूप ने कहा घुस ही नहीं रहा है जब धकेलने की कोशिश करता हूं तो फिसल जाता है।

तब अमृता ने कहा रुको एक मिनट।

और उसने तकिये के नीचे हाथ डाला और पैंटी निकाल कर अपनी योनि की चिकनाई को पोंछ लिया और बोली अब घुसाओ।

मैंने गौर किया तो मुझे हल्का सा दिखा कि अमृता का हाथ उसके टांगों के बीच में है तो मुझे समझ में आया कि वो अनूप का लिंग पकड़ कर उसे अपनी योनि में घुसाने की कोशिश कर रही है।

फिर अमृता की आवाज आई तुम बस सीधे रहो मैं लंड को पकड़े हुए हूं तुम बस जोर लगाओ पर थोड़ा आराम से तुम्हारा बहुत बड़ा और मोटा है।

तभी अमृता कसमसाते हुए कराह उठी ऐसे जैसे वो चिल्लाना चाहती हो पर मुंह से आवाज नहीं निकलने देना चाहती हो और बोली ऊऊईईइ माँ आराम से डाल।

तब अनूप रुक गया और अमृता को चूमने लगा। अमृता की कसमसाने और कराहने की आवाज से मुझे अंदाजा हो रहा था कि उसे दर्द हो रहा है क्योंकि काफी समय के बाद वो संभोग कर रही थी।

अमृता ने कहा इतना ही घुसा कर करो दर्द हो रहा है।

पर अनूप का यह पहला संभोग था इसलिए उसके बस का काम नहीं था कि खुद पर काबू कर सके वो तो बस जोर लगाए जा रहा था।

अमृता कराह कराह कर बस बस कहती रही।

अमृता ने फिर कहा अब ऐसे ही धकेलते रहोगे या चोदोगे भी।

अनूप ने उसके स्तनों को दबाते हुआ कहा हां चोद तो रहा हूं।

उसने जैसे ही 10 12 धक्के दिए कि अनूप हांफने लगा और अमृता से चिपक गया।

अमृता ने उससे पूछा हो गया।

अनूप ने कहा हां तुम्हारा हुआ या नहीं।

अमृता सब जानती थी कि क्या हुआ किसका हुआ सो उसने कह दिया हां अब सो जाओ।

मैं जानती थी कि अनूप अपनी भूख को शांत कर चुका था पर अमृता की प्यास बुझी नहीं थी पर वो भी क्या करती अनूप संभोग के मामले में अभी नया था।

तभी अनूप की आवाज आई अमृता एक बार और चोदना चाहता हूं।

अमृता ने कहा नहीं सो जाओ।

मुझे समझ नहीं आया आखिर अमृता ऐसा क्यों बोली।

तभी फिर से आवाज आई प्लीज बस एक बार और।

अमृता ने कहा इतनी जल्दी नहीं होगा तुमसे काफी रात हो गई है सो जाओ फिर कभी करना।

पर अनूप जिद करता रहा तो अमृता मान गई और करवट लेकर अनूप की तरफ हो कर लेट गई। मैंने अपना सर उठा कर देखा तो अनूप अमृता के स्तनों को चूस रहा था साथ ही उन्हें दबा भी रहा था और अमृता उसे लिंग को हाथ से पकड़ कर हिला रही थी।

कुछ देर बाद अमृता ने उससे कहा अपने हाथ से मेरी बुर को सहलाओ।

अनूप वही करने लगा। कुछ देर के बाद वो दोनों आपस में चूमने लगे फिर अमृता ने कहा तुम्हारा लंड कड़ा हो गया है जल्दी से चोदो अब कहीं अनीशा या मनीष जग न जाएं।

उसे क्या मालूम था कि मैं उनका यह खेल शुरू से ही देख रही थी। अमृता फिर से सीधी होकर लेट गई और टांगें फैला दीं। तब अनूप उसके ऊपर चढ़ गया और उसने लिंग योनि में भिड़ा कर झटके से धकेल दिया।

अमृता फिर से बोली आराम से घुसाओ न।

अनूप ने कहा ठीक है तुम गुस्सा मत हो।

अनूप अब उसे धक्के देने लगा। कुछ देर बाद मैंने गौर किया कि अमृता भी हिल रही है। उसने भी नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए थे। दोनों की सांसें तेज होने लगी थीं और फिर कुछ देर बाद अनूप फिर से हांफते हुए गिर गया तो अमृता ने फिर पूछा हो गया।

अनूप ने कहा हां हो गया।

तब अमृता ने उसे तुरंत ऊपर से हटाते हुए अपने कपड़े ठीक करने लगी और बोली सो जाओ अब।

अमृता की बातों में थोड़ा चिढ़चिढ़ापन था जिससे साफ पता चल रहा था कि वो चरम सुख से अभी भी वंचित थी। अनूप अब सो चुका था पर अमृता अभी भी जग रही थी। उसने मेरी तरफ देखा मैंने तुरंत अपनी आंखें बंद कर लीं। वो शायद देख रही थी कि कहीं उसकी चोरी पकड़ी तो नहीं गई।

मेरा किसी तरह का हरकत न देख उसने अपनी साड़ी के अंदर हाथ डाल और अपनी योनि से खेलने लगी थोड़ी देर में वो अपने शरीर को ऐंठते हुए शांत हो गई। मैं यूँ ही खामोशी से उसे देखती रही पर काफी देर उनकी कामक्रीड़ा देख मुझे भी कुछ होने लगा था।

साथ ही एक ही स्थिति में सोये सोये बदन अकड़ सा गया था तो मैंने सोचा कि अब थोड़ा उठ कर बदन सीधा कर लूं सो मैं पेशाब करने के लिए उठी तो देखा कि मनीष जगा हुआ है और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था।

मैं उसे नजरअंदाज करते हुए उठ कर चली गई। पेशाब करके वापस आई और लेट गई।

तब मनीष ने धीरे से पूछा क्या हुआ नींद नहीं आ रही क्या।

मैंने कहा मैं तो सो चुकी थी अभी नींद खुली।

तब उसने कहा तुमने कुछ देखा क्या।

मैंने कहा क्या।

उसने कहा वही जो तुम्हारे बगल में सब कुछ हुआ।

मैं अनजान बनती हुई बोली क्या हुआ।

उसने कहा तुम्हें सच में पता नहीं या अनजान बन रही हो।

मैंने कहा मुझे कुछ नहीं पता मैं सोई हुई थी।

उसने कहा ठीक है चलो नहीं पता तो कोई बात नहीं सो जाओ।

मैं कुछ देर सोचती रही फिर उससे पूछा क्या हुआ था।

उसने कहा जाने दो कुछ नहीं हुआ।

मैंने जोर देकर फिर से पूछा तो उसने कहा तुम्हारे बगल में अमृता और अनूप चुदाई कर रहे थे।

मैंने उसे कहा तुम झूठ बोल रहे हो कोई किसी के सामने ऐसा नहीं करता कोई इतना निडर नहीं होता।

उसने तब कहा ठीक है सुबह अमृता से पूछ लेना अनूप ने अमृता को दो बार चोदा।

मैं समझ गई कि मनीष भी उन्हें देख रहा था पर मैं उसके सामने अनजान बनी रही। फिर मैं खामोश हो गई और मेरा इस तरह का व्यवहार देख मनीष भी खामोश हो गया। मैं अमृता और मनीष का खेल देख कर उत्तेजित हो गई थी। फिर मैंने सोचा कि जब मैं उत्तेजित हो गई थी तो मनीष भी हुआ होगा। यही सोचते हुए मैं सोने की कोशिश करने लगी पर नींद नहीं आ रही थी।

कुछ देर तक तो मैं खामोश रही फिर पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने मनीष से पूछा तुमने क्या क्या देखा।

उसने उत्तर दिया कुछ खास तो दिख नहीं रहा था क्योंकि तुम बीच थीं पर जब अनूप अमृता के ऊपर चढ़ा तो मुझे समझ आ गया था कि अनूप अमृता को चोद रहा है।

मैं तो पहले से ही खुद को गर्म महसूस कर रही थी और ऊपर से मनीष जैसी बातें कर रहा था मुझे और भी उत्तेजना होने लगी पर खुद पर काबू किए हुई थी।

तभी मनीष ने कहा तुमने उस वक्त मेरे सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया था।

मैंने कहा मुझे डर लगता था इसलिए।

फिर उसने कहा अगर तुम जवाब देती तो क्या कहती हां या ना।

मैंने उसे कहा वो पुरानी बात थी उसे भूल जाओ मैं सोने जा रही हूं।

यह बोल कर मैं दूसरी तरफ मुंह करके सोने चली गई पर अगले ही पल उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और कहा अनीशा मैं आज भी तुम्हें बहुत प्यार करता हूं।

मैंने उसे धकेलते हुए गुस्से में कहा क्या कर रहे हो तुम जानते हो कि मैं शादीशुदा हूं।

वो मुझसे अलग होने का नाम नहीं ले रहा था उसने मुझे जोरों से पकड़ रखा था और कहा अमृता भी तो शादीशुदा है फिर तुम उसकी मदद क्यों कर रही हो। मुझे मालूम है अमृता और अनूप की यहां संभोग करने की इतनी हिम्मत इसलिए हुई क्योंकि तुमने ही मदद की है।

अब मेरे दिमाग में यह डर बैठ गया कि मनीष कहीं किसी को बता तो नहीं देगा कि अमृता और अनूप के बीच में कुछ है और मैं उनकी मदद कर रही हूं। मनीष कहता या नहीं कहता पर मैं अब डर गई थी सो मैंने उससे पूछा तुम क्या चाहते हो।

उसने कहा मैं तुमसे अभी भी प्यार करता हूं और यह कहते कहते उसने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया और मेरे होंठों से होंठ लगा दिए।

उसके गर्म होंठ मेरे होंठों पर लगते ही मेरे पूरे शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। उसने मेरे निचले होंठ को धीरे से चूसा फिर अपनी जीभ को मेरे मुंह के अंदर घुसा दिया। उसकी जीभ मेरी जीभ से उलझ गई और जोरदार किसिंग शुरू हो गई। हालांकि मैं जानती थी कि मैं शादीशुदा हूं पर मैं डर गई थी और मैंने मनीष का विरोध करना बंद कर दिया था।

मैंने उससे कहा प्लीज ऐसा मत करो मैं शादीशुदा हूं और बगल में अमृता और अनूप हैं। उनको पता चल गया तो ठीक नहीं होगा।

उसने मुझे पागलों की तरह चूमते हुए कहा किसी को कुछ पता नहीं चलेगा बस तुम चुपचाप मेरा साथ दो मैं तुम्हें बहुत प्यार करूंगा।

और वो मेरे होंठों को चूमने लगा और मेरे स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा। उसके मजबूत हाथ मेरे भरे हुए स्तनों को अच्छी तरह मसल रहे थे। मेरी निप्पल्स ब्लाउज के कपड़े के ऊपर से ही सख्त होकर खड़ी हो गई थीं। मैं भी उसके हरकतों का कितनी देर विरोध कर पाती क्योंकि अमृता और अनूप का संभोग देख कर मैं भी गर्म हो चुकी थी। मैंने भी उसका साथ देने में ही भलाई सोची पर मेरे मुंह से विरोध भरे शब्द निकलते रहे।

तब उसने कहा तुम अगर ऐसे ही बोलती रहीं तो कोई न कोई जग जाएगा।

तो मैंने अपने मुंह से आवाजें निकालना बंद कर दीं। उसने अब अपनी कमर को मेरी कमर से चिपका दिया और लिंग को पजामे के अंदर से ही मेरी योनि के ऊपर रगड़ने लगा। मैं उसके सख्त मोटे लंड की गर्माहट और कठोरता को अपनी चूत पर साफ महसूस कर रही थी। उसकी रगड़ से मेरी चूत धीरे धीरे गीली होने लगी थी।

उसने अब मेरे स्तनों को छोड़ कर हाथ को मेरी जांघों पर फिराते हुए सहलाने लगा। उसकी उंगलियां मेरी नरम और मांसल जांघों पर घूम रही थीं जो मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थीं।

फिर मेरी साड़ी को ऊपर कमर तक उठाकर मेरी नंगी मांसल जांघों से खेलने लगा। उसके इस तरह से मुझे छूने से मेरी योनि और भी गीली होने लगी थी और मैं भी उसे चूमने लगी। मैंने उसे कस कर पकड़ रखा था और हम दोनों के होंठ आपस में चिपके हुए थे।

तभी उसने मेरी पैंटी को खींचना शुरू किया और धीरे धीरे सरका कर घुटनों तक ले गया। ठंडी हवा मेरी गीली योनि को छू रही थी। फिर अपने हाथ से मेरी नंगे चूतड़ को सहलाने लगा और जोर से दबाने लगा। उसके उंगलियां मेरे गोल और नरम चूतड़ों को निचोड़ रही थीं। मुझे उसका स्पर्श अब बेहद मजेदार लगने लगा था। उसके स्पर्श से मैं और भी गर्म होने लगी थी और मैंने एक हाथ से उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया और उसके लिंग को बाहर निकाल कर हिलाने लगी।

उसका लंड बहुत सख्त गर्म और मोटा था। मैंने उसे अपने हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगी। अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था सो मैंने उससे कहा मनीष अब जल्दी से चोद लो वरना कोई जग गया तो देख लेगा।

उससे भी अब रहा नहीं जा रहा था सो मुझे सीधा होने को कहा और मेरी पैंटी निकाल कर किनारे रख दी। मैंने अपने पैर मोड़ कर फैला दिए और मनीष मेरे ऊपर मेरी टांगों के बीच में आ गया। उसने हाथ में थूक लेकर मेरी योनि पर मल दिया। उसने अपनी उंगलियों से मेरी चूत की लेबिया को फैलाकर थूक अच्छे से लगा दिया ताकि घुसने में आसानी हो। फिर झुक कर लिंग को मेरी योनि के छेद पर टिका दिया और धीरे से धकेला। उसका आधा मोटा लिंग मेरी योनि में चला गया था।

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मुझे एक भराव भरा दर्द महसूस हुआ लेकिन साथ ही अच्छा भी लग रहा था। अब वो मेरे ऊपर लेट गया और मुझे पकड़ कर मुझसे कहा तुम बताओ न क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती थी।

मैंने भी सोचा कि यह आज मानने वाला नहीं है सो कह दिया हां करती थी पर डर लगता था।

उसने फिर मुझे प्यार से चूमा और अपना पूरा लिंग मेरी योनि में एक जोरदार धक्के से धकेल दिया और कहा मैं तो तुम्हें आज भी प्यार करता हूं और करता रहूंगा बस एक बार कहो आई लव यू।

मैं भी अब जोश में थी सो कह दिया आई लव यू।

मेरी बात सुनते ही उसने कहा आई लव यू टू।

और जोरों से धक्के देने लगा। मैं उसके हर जोरदार धक्के से सिसकियां लेने लगी। मैंने अपनी सिसकियों को दबाने की पूरी कोशिश की ताकि बगल में सोए अमृता और अनूप जाग न जाएं। उसका मोटा और कड़ा लंड मेरी योनि में बार बार पूरी ताकत से घुस रहा था। हर धक्के पर मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत पूरी तरह भर गई हो और उसका सिरा मेरी गहराई तक जा रहा हो।

उसका लिंग मेरी योनि में तेजी से अंदर बाहर होने लगा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं उसके धक्कों पर छटपटाने लगी। मैंने अपनी टांगें ऊपर उठाकर उसके कंधों पर रख दीं ताकि वो और भी गहराई तक पहुंच सके। फिर मैंने अपनी टांगों से उसकी कमर को मजबूती से जकड़ लिया। कभी कभी मैं उसके कंधों को दोनों हाथों से कस कर पकड़ लेती और उसे अपनी तरफ खींचती। अपने चूतड़ों को नीचे से ऊपर उठाकर उसके हर धक्के का जवाब देती। इससे उसका लंड मेरी चूत में और भी अच्छे से घुस पा रहा था।

मनीष को भी बहुत मजा आ रहा था। वो भी अब धक्के और जोर जोर से लगाने लगा था। हर धक्के के साथ हमारी जांघों की चटकने की आवाज छत पर गूंज रही थी।

हम दोनों मस्ती के सागर में डूब गए। फिर मनीष ने हांफते हुए कहा अनीशा तुम्हारी बुर बहुत कसी है बहुत मजा आ रहा है चोदने में।

मैंने भी उसे मस्ती में जवाब दिया हां तुम्हारा लंड कितना सख्त और मोटा है बहुत मजा आ रहा है बस चोदते रहो ऐसे ही आह।

मैं इतनी गर्म हो गई थी कि मनीष से संभोग के दौरान धीमी आवाज में कामुक बातें भी करने लगी थी। मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मेरे सोचने समझने की शक्ति खत्म हो गई है। बस उसके लिंग को अपने अंदर महसूस करना चाह रही थी। वो मेरी योनि में अपना लिंग बार बार तेज धक्कों से धकेले जा रहा था और मैं अपनी टांगों से उसे और जोरों से कसती जा रही थी। वो मेरी गर्दन को चूसता हुआ मेरे स्तनों को दबाते हुए मुझे और पागल किए जा रहा था।

उसने मुझसे कहा तुमने बहुत तड़फाया है मुझे मैं तुम्हें चोद कर आज अपनी हर कसर निकाल लूंगा तुम्हारी बुर मेरे लिए है।

मैंने भी उसे उत्तेजित होकर कहा हां यह तुम्हारे लिए है मेरी बुर इसे चोदो जी भर कर और इसका रस निकाल दो।

हम दोनों बुरी तरह से पसीने में भीग चुके थे। मेरा ब्लाउज पूरी तरह गीला हो चुका था और हल्की हल्की ठंडी हवा चलने लगी थी। जब हवा मेरे पसीने भरे बदन पर गुजरती थी तो मुझे थोड़ा आराम मिल रहा था। मेरी योनि इतनी गीली और चिकनी हो चुकी थी कि मनीष का लंड फच फच की आवाज के साथ आसानी से अंदर बाहर हो रहा था। पसीने की वजह से मेरी जांघों और योनि के आसपास के हिस्से भी भीग गए थे। जब मनीष अपना लंड बाहर निकालता तो ठंडी हवा लगने से ठंडक महसूस होती पर जैसे ही वो वापस जोर से अंदर धकेलता गर्मी का जोश पूरे शरीर में फैल जाता। यह एहसास मुझे और भी ज्यादा मजेदार लग रहा था।

मैं अब झड़ने के बहुत करीब थी सो बड़बड़ाने लगी मनीष चोदो मुझे प्लीज और जोर से चोदो बहुत मजा आ रहा है मेरा पानी निकाल दो।

वो जोश में आकर और जोरों से धक्के देने लगा और कहने लगा हां मेरी जान चोद रहा हूं आज तुम्हारी बुर का पानी निचोड़ दूंगा।

मैं मस्ती में अपने बदन को ऐंठने लगी। मैंने उसे अपनी ओर खींचा अपनी कमर को नीचे से ऊपर उठाया और अपनी योनि को उसके लंड पर जोर से दबाया। अचानक मेरे शरीर में एक तेज झटका लगा और मैं झड़ गई। मेरी योनि बार बार सिकुड़ने लगी और गर्म रस उसके लंड पर छूटने लगा। मैं हल्के से सिसकते हुए अपनी पकड़ को ढीली करने लगी साथ ही मेरा पूरा बदन थरथराने लगा।

पर मनीष ने मेरे चूतड़ों को अपने मजबूत हाथों से पकड़ कर खींचा और बिना रुके धक्के देता रहा।

उसने मुझे हांफते हुए कहा क्या हुआ अनीशा तुम्हारा पानी निकल गया क्या।

मैं कुछ नहीं बोली बस यूँ ही खामोश रही। जिसका इशारा वो समझ गया और अब और भी जोरों से धक्के देने लगा। करीब 5 मिनट वो मुझसे ऐसे ही लगातार चोदता रहा। फिर मैंने उसके लंड के सुपारे को अपनी योनि में और भी गर्म और फूला हुआ महसूस किया। मैं समझ गई कि वो भी अब झड़ने को है। उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं और उसके धक्के इतने तेज हो गए थे जैसे कोई ट्रेन का पहिया तेज गति से घूम रहा हो।

फिर अचानक उसने रुक रुक कर 10-12 बहुत जोरदार धक्के दिए। उसका पूरा जिस्म और भी सख्त हो गया। उसने मेरे चूतड़ों को जोर से दबाया और उसकी सांस कुछ पलों के लिए रुक गई। फिर मेरी योनि के अंदर एक गर्म धार सी फूट पड़ी। उसके वीर्य की गर्म उछालें मेरी चूत की गहराई में पड़ रही थीं। फिर उसने धीरे धीरे सांस लेना शुरू किया और अपने लिंग को मेरी योनि में हौले हौले अंदर बाहर करने लगा। मैं समझ गई कि वो भी झड़ चुका है।

मनीष धीरे धीरे शांत हो गया और मेरे ऊपर ही लेट गया।

मैंने उससे पूछा हो गया।

उसने कहा हां मैं झड़ गया पर कुछ देर मुझे आराम करने दो अपने ऊपर।

मैंने उससे कहा लंड बाहर निकालो मुझे अपनी बुर साफ करना है।

उसने कहा कुछ देर रुको न तुम्हारी बुर का गर्म अहसास बहुत अच्छा लगा रहा है तुम्हारी बुर बहुत गर्म और कोमल है।

मैंने उसे यूँ ही कुछ देर लेटा रहने दिया फिर उसे धीरे से उठाया और अपनी बुर साफ की और कपड़े ठीक करके सो गई।

अगले दिन सुबह अमृता काफी उदास सी लग रही थी मैंने उससे पूछा भी कि क्या हुआ पर उसने कुछ नहीं बताया।

शाम को बहुत जोर दिया तो उसने कहा मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।

मैंने उससे पूछा क्या गलती हुई।

तो वो रोते हुए बोली मैंने अपनी सीमाएं लांघ दीं और रात को अनूप के साथ संभोग कर लिया जो मुझे नहीं करना चाहिए था मैं बहक गई थी।

मैंने उसे धीरज देते हुए कहा इसमें गलती क्या है तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो और शादी नहीं कर सकते पर जरूरी नहीं कि शादी किया तो ही पति पत्नी बन के रहो। तुम दिल से अगर उसे चाहती हो तो वो बिना किसी नियम कानून के तुम्हारा पति है और अगर तुमने उसके साथ संभोग कर लिया तो कोई बड़ी बात नहीं है। मेरी बात सुन कर उसे बहुत राहत मिली और वो पहले से ज्यादा खुश दिखने लगी।

मुझे भी बहुत अच्छा लगा कि इतने सालों के बाद वो खुश थी। पर उसके मन में एक और बात थी जो उसे परेशान कर रही थी और वो ये बात कि उसने इतना जोखिम उठा कर उसके साथ संभोग किया पर संतुष्टि नहीं हुई। हम दोनों जानते थे कि अनूप ने कभी पहले संभोग नहीं किया होगा तभी ऐसा हुआ है। पर अमृता को सिर्फ इस बात की चिंता थी कि ऐसा मौका फिर दुबारा मिलेगा या नहीं।

रात होते होते मैंने उससे पूछा क्या आज भी तुम दोनों संभोग करोगे क्या।

उसने जवाब दिया पता नहीं और फायदा भी नहीं है करके।

मैंने उससे पूछा क्यों।

उसने तब बता दिया फायदा क्या वो तो करके सो जाता है मैं तड़पती रह जाती हूं।

मैंने तब उसे पूछा अच्छा ऐसा क्यों।

तब उसने खुल कर कह दिया वो जल्दी झड़ जाता है।

मैंने तब उसे कहा नया है समय दो कुछ दिन में तुम्हें थका देगा।

और मैं जोर से हंसने लगी।

मेरी बातें सुन कर उसने भी मुझे छेड़ते हुए कहा पुराने प्यार के बगल में तो तू भी थी क्या तुम थक गई थी क्या।

मैं डर गई कि कहीं उसने मेरे और मनीष के बीच में जो हुआ वो देख तो नहीं लिया था। सो घबरा कर बोली पागल है क्या तू।

पर कुछ ही देर में मुझे अहसास हो गया कि वो अंधेरे में तीर चला रही थी पर मैं बच गई।

रात को फिर हम छत पर उसी तरह सोने चले गए।

अमृता ने मुझे चुपके से कान में कहा तू सो जा जल्दी।

तब मैंने उससे पूछा क्यों।

तो उसने मुझे इशारे से कहा हम दोनों संभोग करना चाहते हैं।

तब मैंने उसे बता दिया कि मैंने कल रात उनको सब कुछ करते देख लिया था और आज भी देखूंगी। पर वो मुझे जिद्द करने लगी कि नहीं तो मैं चुपचाप सोने का नाटक करने लगी। इधर मनीष भी मेरे लिए तैयार था वो भी मुझे चुपके चुपके मेरे जिस्म को छूता और सहलाता।

पर मैं मना कर देती क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि अमृता और अनूप को कुछ पता चले। क्योंकि मैं पहले से शादीशुदा थी। काफी रात हो चुकी थी पर अमृता और अनूप अब भी चुपचाप थे। मैं सोच रही थी कि आखिर क्या हुआ इनको क्योंकि मैं खुद उनके सोने का इंतजार कर रही थी।

काफी देर बाद मैं पेशाब करने उठी मेरे पीछे अमृता भी चली आई और कहा तुम सोई क्यों नहीं अब तक।

मैंने उससे कहा नींद नहीं आ रही क्या करूं तुम जो मर्जी चाहे करो मैं किसी को बताऊंगी नहीं।

तब उसने कहा इतनी बेशर्म समझा है मुझे तूने।

मैंने उससे तब कहा कल रात शर्म नहीं आई करने में मेरे बगल में आज आ रही है।

तब उसने मुझसे विनती करनी शुरू कर दी।

मैंने भी उसे कहा नींद आ गई तो ठीक है वरना मैं कुछ नहीं कर सकती।

इस पर वो मुंह बनाती हुई चली गई और लेट गई। मैं भी वापस आकर लेट गई और सोने की कोशिश करने लगी। यह सोच कर कि अमृता इतने दिनों के बाद खुश है क्यों बेचारी को परेशान करूं। पर पता नहीं मुझे नींद नहीं आ रही थी। जब भी नींद आने को होती तो अनूप के अमृता के ऊपर हरकत से तो कभी मनीष की हरकत से उठ जाती।

तभी अमृता मेरी तरफ मुड़ी और मेरे कान में फुसफुसा कर बोली सोती क्यों नहीं तुझे भी कुछ करना है क्या।

मैंने उससे कहा पागल है क्या अब नींद नहीं आ रही तो मैं क्या करूं मैं तेरी बेचैनी समझ सकती हूं।

तब उसने कहा मुझे पता है तू भी मनीष के साथ कुछ करने के लिए बेताब है।

मैंने उसे कहा तेरा दिमाग खराब है अगर तुझे करना है कर वरना मेरे सोने का इंतजार कर।

तब उसने कहा मुझे पता है कल रात तूने भी मनीष के साथ क्या किया अनूप ने मुझे बता दिया सब।

मैं उसकी बात सुन कर हैरान हो गई कि आखिर उसे कैसे पता चला।

मैंने तुरंत पलट कर मनीष की तरफ देखा तो उसने खुद ही कह दिया कि उसने आज सुबह अनूप को बता दिया था। मुझे बहुत गुस्सा आया और चुपचाप सोने चली गई। पर कुछ देर में मनीष ने मेरे बदन को सहलाना शुरू कर दिया पर मैं उसे बार बार खुद से दूर कर देती।

तब उसने कहा देखो हम सब अच्छे दोस्त हैं और एक दूसरे के बारे में सब पता है। फिर किस बात का डर है हम जो भी करेंगे वो हमारे बीच ही रहेगा।

उसके काफी समझाने के बाद पता नहीं मेरा भी मन बदल गया और फिर उसके साथ चूमने चूसने में व्यस्त हो गई और भूल गई कि बगल में अमृता और अनूप भी हैं। मनीष ने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया। उसने पहले तो मेरे होंठों को धीरे धीरे चूमा फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और मेरी जीभ को चूसने लगा। मैं भी उसकी जीभ को चूसने लगी।

उसके हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे भारी स्तनों को दबाने लगे। पहले हल्के से सहलाते हुए फिर जोर जोर से मसलने लगा। मेरे निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए थे। उसने ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए और ब्रा को ऊपर सरका कर दोनों स्तनों को बाहर निकाल लिया। फिर एक निप्पल को मुंह में ले कर जोर जोर से चूसने लगा जबकि दूसरे निप्पल को उंगलियों से मरोड़ रहा था। मैं सिसकारियां भरने लगी आह मनीष धीरे।

धीरे धीरे उसका हाथ नीचे सरक गया। उसने मेरी साड़ी को कमर तक उठा दिया और पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया। मेरी योनि पहले से ही गीली हो चुकी थी। उसने अपनी उंगली मेरी योनि की दरार पर फिराई फिर दो उंगलियां अंदर डाल दीं और अंदर बाहर करने लगा। मैं कसमसा कर उसके कंधे पकड़ लीं। उसकी उंगलियां तेज होती गईं और मेरी योनि से चिकनाई की आवाज आने लगी।

मैंने भी अपना हाथ उसके पजामे में डाला और उसके मोटे लंड को बाहर निकाल लिया। लंड पूरी तरह खड़ा और गर्म था। मैंने उसे हाथ से पकड़ कर ऊपर नीचे हिलाना शुरू कर दिया। मनीष की सांसें तेज हो गईं।

फिर उसने मेरी पैंटी को पूरी तरह उतार दिया और मेरी टांगें फैला दीं। वो मेरे ऊपर आ गया। उसने लंड का सिरा मेरी योनि के छेद पर रखा और धीरे धीरे दबाव डाला। पहले सिरा ही अंदर गया फिर एक झटके से आधा लंड घुस गया। मैं दर्द और मजे से कराह उठी ऊई माँ। उसने रुक कर मुझे चूमा फिर पूरा लंड एक ही झटके में अंदर कर दिया। अब उसका पूरा मोटा लंड मेरी योनि में समा चुका था।

उसने धीमी गति से धक्के देने शुरू किए। हर धक्के के साथ मेरा बदन हिल रहा था। धीरे धीरे उसकी रफ्तार बढ़ने लगी। अब वो जोर जोर से धक्के दे रहा था। फच फच फच फच की आवाज छत पर गूंज रही थी। मैंने अपनी टांगें उसके कमर पर जकड़ लीं और नीचे से भी कमर उठा उठा कर उसके धक्कों का जवाब देने लगी। मनीष मेरे स्तनों को चूसता रहा गर्दन को चबाता रहा और लगातार चोदता रहा।

कुछ देर बाद उसने मुझे करवट दिला दिया और पीछे से चोदना शुरू कर दिया। एक हाथ से मेरी कमर पकड़े हुए और दूसरे से स्तन दबाते हुए वो तेज तेज धक्के दे रहा था। मैं सिसक रही थी आह मनीष और जोर से चोदो। फिर मैंने उसे पीठ के बल लिटा दिया और खुद उसके ऊपर बैठ गई। मैंने उसके लंड को पकड़ कर अपनी योनि में उतारा और कमर हिलाने लगी। तेज तेज ऊपर नीचे हो रही थी। मेरे स्तन उछल उछल कर उसके चेहरे पर पड़ रहे थे। वो उन्हें चूस रहा था।

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आखिरकार मेरी योनि सिकुड़ने लगी और मैं जोर से कांप उठी। मेरा पूरा रस उसके लंड पर छूट गया। मनीष ने भी मेरी कमर पकड़ कर कुछ और जोरदार झटके दिए और अपनी सारी गर्म मान निकाल दी मेरी योनि के अंदर। हम दोनों पसीने से तर होकर एक दूसरे से चिपके पड़े रहे।

जब हम दोनों झड़ कर अलग हुए तो मैंने देखा कि अमृता और अनूप हम दोनों को देख रहे हैं।

मुझे बड़ी शर्म सी आई पर तभी मनीष ने कहा तुम दोनों का बहुत जल्दी हो गया क्या बात है।

इस पर अमृता भी थोड़ी शरमा गई। मैंने गौर किया तो देखा कि अमृता भी पूरी तरह नंगी है और मेरी तरह खुद को अपनी साड़ी से छुपा रही है। वैसे मैं और अमृता तो चुप थीं पर अनूप और मनीष आपस में बातें कर रहे थे।

मनीष ने मुझे चुपके से कहा अमृता संतुष्ट नहीं है मैं अमृता को चोदना चाहता हूं।

मुझे गुस्सा लगा कि यह क्या बोल रहा है पर मैं इससे पहले कुछ कह पाती उसने अमृता से खुद ही पूछ लिया और ताज्जुब तो तब हुआ जब अमृता ने हां कर दी। पर मैं जानती थी कि अमृता क्यों तैयार हो गई सो उसकी खुशी के लिए चुपचाप रही। अनूप भी मान जाएगा ऐसा सोचा नहीं था पर मुझे इससे कोई लेना देना नहीं था क्योंकि लोगों को अपनी जिंदगी जीने का अधिकार होता है।

अमृता मेरी जगह पर आ गई और मनीष से चिपक गई और फिर उनका खेल शुरू हो गया। उन दोनों ने बड़े प्यार से एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया और अंगों से खेलने लगे। उनके होंठ पहले हल्के से छूए फिर धीरे धीरे दबाव बढ़ाते हुए एक दूसरे में समा गए। अमृता ने अपनी निचली होंठ मनीष के ऊपरी होंठ के बीच दबा ली और चूसने लगी। मनीष ने अपनी जीभ निकाल कर अमृता के मुंह के अंदर डाल दी और दोनों की जीभें लिपट कर घूमने लगीं। उनके मुंह से चप चप की आवाजें आने लगीं। अमृता ने अपना दाहिना हाथ नीचे ले जाकर मनीष के लिंग को पूरी मुट्ठी में जकड़ लिया। वह लिंग को धीरे धीरे ऊपर से नीचे तक मसलते हुए हिलाने लगी। मनीष का लिंग उसके गर्म हाथ में और भी सख्त और मोटा फूलता जा रहा था। इस बीच मनीष ने अमृता के दोनों भारी स्तनों को अपने बड़े मजबूत हाथों में भर लिया। वह उन्हें जोर जोर से दबा रहा था और उंगलियां उनके नरम मांस में धंस रही थीं। उसके अंगूठे अमृता के कड़े हुए गुलाबी निप्पलों को बार बार घुमाते और हल्का सा खींचते रहे। फिर मनीष ने सिर झुकाया और बाएं निप्पल को मुंह में भर लिया। वह जोर जोर से चूसने लगा। उसकी गर्म जीभ निप्पल के चारों ओर तेजी से चक्कर काट रही थी और कभी हल्का सा काट भी लेती थी। अमृता की सांसें तेज हो गईं और मुंह से लगातार सिसकारियां निकलने लगीं। मनीष ने फिर अमृता के मोटे गोल चूतड़ों को दोनों हाथों से कस कर पकड़ लिया। वह उन्हें जोर से मसल रहा था। उंगलियां चूतड़ों की दरार में दबा कर खींच रही थीं और कभी थपकी मार कर लाल कर देता था।

फिर मनीष ने अमृता को अपने ऊपर चढ़ा लिया और उसे कहा अमृता लंड को बुर में घुसा लो।

अमृता ने हाथ नीचे ले जाकर उसके लिंग को पकड़ कर अपनी योनि में घुसा लिया फिर धक्के लगाने शुरू कर दिए। अमृता ने मनीष के अब पूरी तरह खड़े मोटे और गर्म लिंग को अपनी उंगलियों में मजबूती से पकड़ा। उसने लिंग के मोटे गोल सिरे को अपनी योनि की चिपचिपी फांक पर ठीक से टिका दिया। फिर अपनी कमर को धीरे से नीचे दबाया। लिंग का सिरा उसकी गीली योनि की दीवारों को फैलाते हुए अंदर दबता चला गया। अमृता की आंखें आनंद से बंद हो गईं और मुंह से लंबी गहरी आह निकली। जैसे ही पूरा मोटा लिंग उसकी योनि में आधा समा गया अमृता ने अपनी कमर को तेजी से ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। वह मनीष के लिंग पर सवारी कर रही थी। हर बार जब वह नीचे बैठती तो लिंग की पूरी लंबाई उसकी योनि में घुस जाती और फच फच फच की जोरदार आवाज निकलती। अमृता की सिसकारियां अब चीखों में बदलने लगीं। उसके भारी स्तन तेजी से ऊपर नीचे उछल रहे थे और मनीष उन्हें हाथों से कस कर पकड़ कर दबा रहा था। अमृता की योनि से सफेद रस निकल कर मनीष के लिंग और जांघों पर फैल रहा था।

इधर मैं और अनूप उनको देखे जा रहे थे और हम दोनों अभी भी नंगे थे। अनूप अमृता और मनीष की चुदाई देखने के लिए मेरे करीब आ गया जिससे उसका बदन मेरे बदन से छुए जा रहा था।

मेरा पीठ अनूप की तरफ थी और वो मेरे पीछे मुझसे सटा हुआ था। मैंने महसूस किया कि अनूप का लिंग मेरे चूतड़ों से रगड़ खा रहा है और धीरे धीरे खड़ा होने लगा। उसका लिंग काफी मोटा था और मुझे भी अमृता और मनीष की चुदाई देख कर फिर से संभोग की इच्छा होने लगी थी।

मैंने अनूप से कहा ये क्या कर रहे हो।

उसने कहा मुझे फिर से चोदने का मन हो रहा है।

मैंने तब कहा मन कर रहा है तो क्या हुआ अमृता को तुमने किसी और के साथ व्यस्त कर दिया अब इंतजार करो।

तब उसने कहा वो व्यस्त है पर तुम तो नहीं हो।

मैंने कहा क्या बकवास कर रहे हो तुम ऐसा कैसे सोच सकते हो।

उसने कहा प्लीज इसमें कैसी शर्म हम सब एक ही हैं मजे लेने में क्या जाता है हम हमेशा थोड़े साथ रहेंगे।

मैंने कुछ देर सोचा फिर दिमाग में आया कि अनूप कुछ गलत नहीं कह रहा और फिर मेरे मन में उसके लिंग का खयाल भी आया। सो मैंने उसको हां कह दी और उसका लिंग पकड़ लिया। सच में उसका लिंग काफी मोटा था लंबा ज्यादा नहीं था। पर मोटाई इतनी कि मेरी जैसी दो बच्चों की माँ को भी रुला दे। मैंने उसे हाथ में लिया तो मेरी उंगलियां पूरी तरह नहीं घेर पा रही थीं। वह गर्म खून से भरा सख्त मोटा लंड था जिसकी नसें उभरी हुई थीं और सिरा चमक रहा था।

उसने मेरी योनि को हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी मोटी उंगलियां मेरी योनि की बाहर की फांकें अलग करती हुई अंदर घुस गईं। वह उंगलियों को अंदर बाहर तेजी से कर रहा था और मेरी क्लिटोरिस को अंगूठे से गोल गोल रगड़ने लगा। मेरी योनि से गर्म रस बहने लगा और मैं हल्की हल्की सिसकारियां भरने लगी। फिर कुछ देर मैंने भी उसके लिंग को हाथ से हिलाया। मैंने उसके मोटे लिंग को ऊपर से नीचे तक मजबूती से पकड़ कर तेजी से हिलाया और सुपारे को उंगली से दबा कर सहलाया। फिर उसे अपने ऊपर आने को कहा।

उधर अमृता मनीष के लिंग पर बैठ मस्ती में सिसकारी भरती हुई मजे से सवारी किए जा रही थी। वह अपनी कमर को तेज तेज घुमा रही थी और लिंग को पूरी गहराई तक अंदर ले रही थी।

अनूप अब मेरे ऊपर आ चुका था मैंने अपनी दोनों टांगें फैला कर उसे बीच में लिया और वो मेरे ऊपर अपना पूरा वजन देकर लेट गया। उसने मेरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। वह बाएं स्तन का निप्पल मुंह में पूरा भर कर जोर से चूस रहा था। उसकी गर्म जीभ निप्पल को तेजी से चाट रही थी और कभी हल्का सा काट कर खींच लेती थी। दाहिना स्तन वह हाथ से मसल रहा था और निप्पल को उंगलियों से दबा रहा था। मैंने उसके लिंग को पकड़ के अपनी योनि में रगड़ने लगी। मैंने उसके मोटे लिंग के सिरे को अपनी योनि की फांक पर रखा और ऊपर नीचे जोर जोर से रगड़ा। इससे मेरी योनि और चिकनी हो गई और लिंग पर मेरी गर्म चिकनाई चढ़ गई। थोड़ी देर रगड़ने के बाद मैंने उसे अपनी योनि के छेद पर टिका कर कहा धकेलो।

उसने जैसे ही धकेला मैं दर्द से कराह उठी मेरी आवाज सुनकर अमृता और मनीष रुक गए और अमृता ने कहा क्या हुआ बहुत मोटा है न।

मैंने खीसे दिखाते हुए अमृता को कहा तू चुपचाप चुदा मुझे कुछ नहीं हुआ।

मैंने अनूप को पकड़ कर अपनी और खींचा और अपनी टांगें उसके जांघों के ऊपर रख दिया और कहा चोदो।

अनूप ने धक्के देने शुरू कर दिए कुछ देर के बाद मुझे सहज लगने लगा और मैं और भी उत्तेजित होने लगी। उधर मनीष ने अमृता को नीचे लिटा दिया और अब उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा। अनूप ने भी अब धक्के दे कर मेरी योनि को चोदना शुरू कर दिया मुझे शुरू में ऐसा लग रहा था जैसे मेरी योनि फैल गई हो क्योंकि जब जब वो धक्के देता मेरी योनि में दोनों तरफ खिंचाव सा लगता और दर्द होता पर कुछ देर के बाद उसका लिंग मेरी योनि में आराम से घुसने लगा।

थोड़ी देर में अमृता की आवाजें निकलने लगीं। वो अब जोर-जोर से सिसकारियां भर रही थी और मनीष से विनती करने लगी, “बस मनीष… हो गया… बस करो… छोड़ दो मुझे… आह्ह…!”

मनीष ने उसकी एक भी बात नहीं सुनी। वो अपनी कमर को तेज-तेज हिलाता रहा और अमृता की चूत में अपना मोटा लिंग पूरी ताकत से अंदर-बाहर कर रहा था। उसके हर धक्के से अमृता का पूरा बदन हिल जाता था। अमृता पहले ही एक बार झड़ चुकी थी, उसकी चूत अब और भी गीली और संवेदनशील हो चुकी थी, लेकिन मनीष रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसने अमृता की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ रखा था, जिससे अमृता कहीं हिल भी नहीं पा रही थी। वो बस मनीष के नीचे लेटी हुई धक्कों सहती जा रही थी।

मनीष लगातार जोरदार धक्के दे रहा था। उसका लिंग अमृता की चूत के अंदर तक जा रहा था और बाहर निकलते वक्त फच-फच की आवाज कर रहा था। अमृता की सिसकारियां अब दर्द और सुख दोनों से भरी हुई थीं। वो बार-बार कह रही थी, “प्लीज मनीष… छोड़ दो न… दर्द हो रहा है… मार डालोगे क्या… आह्ह… क्या करते हो… कितना जोर से चोद रहे हो… बस करो… मेरी चूत जल रही है…!”

मनीष ने उसकी बातों को अनसुना करते हुए कहा, “बस अमृता… थोड़ी देर और… मेरा निकलने वाला है… तुम्हारी चूत बहुत कसी हुई है… आह्ह… बस थोड़ा और सह ले…!”

उसके धक्के और तेज हो गए। अमृता की टांगें अब हवा में लहरा रही थीं, लेकिन मनीष ने उन्हें अपनी कमर से जकड़ लिया था। वो अमृता के स्तनों को जोर-जोर से दबा रहा था और उसकी गर्दन पर चूमते हुए लगातार चोद रहा था। अमृता की चूत से रस निकल-निकल कर मनीष के लिंग पर चिपक रहा था और हर धक्के के साथ चटक-चटक की आवाज आ रही थी।

इधर अनूप मुझे चोद रहा था। उसके धक्के अब नियमित हो चुके थे और मुझे भी धीरे-धीरे मजा आने लगा था। मेरा बदन उसके साथ ताल मिलाने लगा था। लेकिन मेरी उत्तेजना अभी आधे रास्ते पर ही थी कि अचानक अनूप ने तेज-तेज झटके दिए। उसका शरीर कांपने लगा, वो मेरे ऊपर पूरी तरह गिर पड़ा और अपने लिंग को मेरी चूत के अंदर गहराई तक दबाकर अपना गर्म लावा मेरी योनि में उगल दिया। कुछ सेकंड बाद वो शांत हो गया और मेरे ऊपर ही लेट रहा। मैं अब भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई थी, मेरी चूत अभी भी तड़प रही थी।

पर अमृता और मनीष अभी भी चुदाई में मस्त थे। अमृता की विनती अब भी जारी थी, लेकिन उसकी आवाज अब कमजोर पड़ रही थी। मैंने मनीष से कहा, “छोड़ दो मनीष… वो मना कर रही है तो…!”

मनीष ने हांफते हुए कहा, “बस थोड़ी देर और…!”

मैंने तब कहा, “ठीक है… मेरे ऊपर आ जाओ।”

उसने कहा, “नहीं… बस हो गया…!”

तब तक अमृता का विरोध धीरे-धीरे कम होने लगा। उसकी सांसें तेज हो गईं और वो फिर से गर्म हो उठी। उसने धीरे-धीरे अपनी टांगों को मनीष की कमर पर लपेट लिया और उसे जकड़ लिया। मैं समझ गई कि अमृता अब फिर से झड़ने के करीब पहुंच चुकी है। दोनों ने एक-दूसरे को इतनी जोर से पकड़ लिया जैसे एक-दूसरे में समा जाना चाहते हों। उनके होंठ आपस में चिपक गए। उनका पूरा बदन शांत था, सिर्फ कमर हिल रही थी। मनीष ने आखिरी जोरदार झटके दिए और दोनों एक साथ कांप उठे। अमृता की चूत से रस निकला और मनीष ने भी अपना सारा माल अमृता की चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपक कर शांत हो गए। दोनों एक साथ झड़ चुके थे।

कुछ देर बाद मनीष धीरे से उठा। उसने अमृता की तरफ देखकर पूछा, “मजा आया अमृता?”

अमृता ने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आवाज में कहा, “हां… बहुत।”

फिर वो दोनों अलग हो गए और अमृता अनूप के बगल में आकर सो गई पर मेरी अग्नि अभी भी भड़क रही थी। सो मैंने मनीष को कहा और करना है।

मनीष ने कहा कुछ देर के बाद करेंगे।

और फिर हमने फिर से संभोग किया। मनीष ने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया। मैं उसके लिंग पर बैठ गई। मैंने हाथ से उसका लंड सीधा किया और अपनी योनि के छेद पर लगाकर धीरे से नीचे दबाव डाला। उसका मोटा सिर मेरी चूत में घुस गया। फिर मैंने और नीचे बैठ कर पूरा लंड अंदर ले लिया। एक बार पूरा घुस जाने के बाद मैंने अपनी कमर को आगे पीछे और ऊपर नीचे हिलाना शुरू किया। हर हिलने पर लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था और मुझे सुख की लहरें दौड़ रही थीं। मनीष ने मेरी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के देने लगा। मेरे स्तनों को वह चूम रहा था और दांत से हल्का काट रहा था। मैं सिसक रही थी और तेजी से सवारी कर रही थी।

फिर जब वो झड़ने को हुआ तो उसने मुझे पकड़ कर नीचे लिटा दिया और मुझे नीचे लिटा कर चोदा। उसके झटके समय के साथ काफी दमदार होते चले जाते थे जो मुझे दर्द के साथ एक सुख भी देते थे।

यह सब इतना मजेदार था कि उस रात के बाद यह सिलसिला रुक ही नहीं सका। आज भी हम चारों महीने में एक बार कहीं सुरक्षित जगह पर मिलते हैं और यही सब करते हैं। अब अनूप भी काफी अनुभवी हो चुका है। उसका मोटा लंड अब बहुत अच्छे से काम करता है। वह इतनी अच्छी तरह चोदता है कि अमृता और मैं दोनों उसकी हर धक्के पर पागल हो जाती हैं।

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